सावन के पहले सोमवार पर महाकालेश्वर, काशी विश्वनाथ, बाबा बैद्यनाथ धाम और देशभर के शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा। जानें भस्म आरती, जलाभिषेक, महाकाल की शाही सवारी और मंदिरों में विशेष पूजा की पूरी जानकारी।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है और इस माह का पहला सोमवार विशेष धार्मिक महत्व रखता है। सावन के पहले सोमवार के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’, ‘बम-बम भोले’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से गूंज उठे। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम, गाजियाबाद के दूधेश्वर नाथ मंदिर सहित देश के विभिन्न शिवालयों में भक्तों ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त किया। सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं में अद्भुत उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के साथ हुई विशेष पूजा
मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धालुओं की भीड़ देर रात से ही लगनी शुरू हो गई थी। मंदिर प्रशासन ने रात्रि ढाई बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए। इसके बाद प्रातः तीन बजे बाबा महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती संपन्न हुई। भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल का जलाभिषेक और महा पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से भगवान का अभिषेक हुआ। इसके बाद भांग और चंदन से बाबा का दिव्य श्रृंगार किया गया तथा उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाए गए। श्रृंगार के उपरांत बाबा महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई और झांझ, मंजीरे, ढोल-नगाड़ों तथा शंखनाद के बीच भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। इस दिव्य आरती के दर्शन के लिए देशभर से हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
आज निकलेगी बाबा महाकाल की पारंपरिक शाही सवारी
सावन के प्रत्येक सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की शाही सवारी निकालने की परंपरा भी निभाई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, राजा महाकाल अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इसी परंपरा के तहत सोमवार शाम को बाबा महाकाल की सवारी निकाली जाएगी। सवारी के दौरान लाखों श्रद्धालु सड़क किनारे घंटों पहले से खड़े होकर बाबा महाकाल के दर्शन का इंतजार करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दिव्य सवारी के दर्शन मात्र से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रशासन ने सवारी को लेकर सुरक्षा और यातायात की व्यापक व्यवस्था की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
काशी विश्वनाथ मंदिर में पुष्पवर्षा से हुआ श्रद्धालुओं का स्वागत
उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में भी सावन के पहले सोमवार पर भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े नजर आए। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं का स्वागत पुष्पवर्षा कर किया, जिससे पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का अनूठा माहौल बन गया। श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की तथा परिवार की सुख-समृद्धि और देश की खुशहाली की कामना की।
बाबा बैद्यनाथ धाम में कांवड़ियों की भारी भीड़
झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में भी सावन के पहले सोमवार पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। लाखों कांवड़िए बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर लगभग 100 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचे और जलाभिषेक किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अतिरिक्त बैरिकेडिंग, विशेष अर्घा व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। जगह-जगह चिकित्सा शिविर, पेयजल और विश्राम केंद्र भी बनाए गए हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सके।
दूधेश्वर नाथ मंदिर समेत कई शिवालयों में उमड़ी भीड़
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित प्रसिद्ध दूधेश्वर नाथ मंदिर में भी सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए तथा मंदिर परिसर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग बनाए गए। इसके अलावा दिल्ली, हरिद्वार, प्रयागराज, भोपाल, जयपुर, पटना, इंदौर और देश के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
सावन का पहला सोमवार बना आस्था और भक्ति का महापर्व
सावन का पहला सोमवार केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में यह दिन श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक बन गया। लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की। मंदिरों में शिव भजन, रुद्राभिषेक, महाआरती और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण शिवमय दिखाई दिया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं, जिससे भक्तों ने शांतिपूर्वक दर्शन और पूजा-अर्चना की। सावन के पहले सोमवार पर उमड़ी यह आस्था एक बार फिर भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की गहरी धार्मिक आस्था का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई।