केंद्रीय कैबिनेट ने 10,783 करोड़ रुपये की तीन रेलवे मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी। पांच राज्यों में 656 किमी रेल नेटवर्क बढ़ेगा और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को भारतीय रेलवे से जुड़ी तीन बड़ी मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इनके माध्यम से करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क का विस्तार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन परियोजनाओं को पांच राज्यों के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और माल ढुलाई की लागत कम करने में मदद मिलेगी। इन परियोजनाओं का लाभ छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को मिलेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि अतिरिक्त रेल नेटवर्क बनने से इन राज्यों के बीच आवागमन और माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी।
पांच राज्यों में मजबूत होगी रेल कनेक्टिविटी
कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स यानी CCEA ने बुधवार को इन तीनों परियोजनाओं को मंजूरी दी। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के महत्वपूर्ण मार्गों पर ट्रैक क्षमता बढ़ेगी और यात्री तथा मालगाड़ियों के संचालन में अधिक सुविधा होगी। सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। परियोजनाएं पांच राज्यों के कुल 14 जिलों को कवर करेंगी। इससे लगभग 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इन क्षेत्रों में रहने वाली करीब 56 लाख की आबादी को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिलेगा।
तीन प्रमुख रेल परियोजनाओं को मिली मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत तीन परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागडेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य मौजूदा रेल मार्गों पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या और माल ढुलाई के दबाव को देखते हुए अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध कराना है। मल्टीट्रैकिंग से एक ही मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकेगी और विभिन्न स्थानों पर ट्रेनों को रोकने या क्रॉसिंग के कारण होने वाली देरी को कम किया जा सकेगा।
रेलवे संचालन में आएगी तेजी
CCEA के अनुसार, अतिरिक्त रेल लाइन बनने से रेलवे की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार होगा। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी और सेवा की विश्वसनीयता बढ़ेगी। मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं रेल मार्गों पर भीड़ और दबाव कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। वर्तमान में कई प्रमुख रेल मार्गों पर यात्री और मालगाड़ियों की संख्या अधिक होने के कारण क्षमता पर दबाव रहता है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों के संचालन की बेहतर योजना बनाई जा सकेगी और रेलवे नेटवर्क की समग्र दक्षता में सुधार होगा।
कोयला, सीमेंट और स्टील की ढुलाई को मिलेगा फायदा
इन परियोजनाओं का एक प्रमुख उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को बेहतर रेल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित रेल मार्गों से कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसी बड़ी मात्रा में ढुलाई होने वाली वस्तुओं के परिवहन को विशेष लाभ मिलेगा। भारत की अर्थव्यवस्था में इन वस्तुओं की आपूर्ति और परिवहन की महत्वपूर्ण भूमिका है। रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी और उद्योगों तक कच्चे माल तथा तैयार उत्पादों की आवाजाही अधिक प्रभावी तरीके से हो सकेगी।
सालाना 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता
CCEA के मुताबिक, इन परियोजनाओं से रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में करीब 27 एमटीपीए यानी 27 मिलियन टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त क्षमता पैदा होगी। इसका सीधा असर देश के माल परिवहन तंत्र पर पड़ सकता है। अधिक माल को रेल के माध्यम से ले जाने से सड़क परिवहन पर दबाव कम करने में भी मदद मिलेगी। इसके साथ ही लंबी दूरी तक भारी और थोक वस्तुओं की ढुलाई अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।
लॉजिस्टिक्स लागत कम करने पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजनाओं के लाभों में लॉजिस्टिक्स लागत कम होने को विशेष रूप से रेखांकित किया है। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में लगने वाला समय और परिवहन लागत कम हो सकती है। इससे उद्योगों को लाभ मिलेगा और विभिन्न राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। रेलवे नेटवर्क में क्षमता विस्तार से देश की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और औद्योगिक विकास को गति देने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
पीएम मोदी ने कहा कि इन परियोजनाओं से केवल औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को ही लाभ नहीं होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर पर विरासत और वन्यजीव पर्यटन के लिए बेहतर रेल कनेक्टिविटी नए अवसर पैदा कर सकती है। पांचों राज्यों में ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों की बड़ी संख्या है। बेहतर रेल संपर्क से देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर होटल, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को भी फायदा मिलने की संभावना है।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
रेल परियोजनाओं के निर्माण के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बेहतर रेल संपर्क से स्थानीय कारोबार और बाजारों को भी फायदा हो सकता है। गांवों और छोटे शहरों को बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक केंद्रों से जोड़ने से लोगों की आवाजाही आसान होगी। इससे स्थानीय उत्पादों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिल सकती है।
पीएम मोदी ने बताया विकास का महत्वपूर्ण कदम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन परियोजनाओं को देश के रेल नेटवर्क के विस्तार और कनेक्टिविटी सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। पांच राज्यों में 656 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क, बेहतर माल ढुलाई क्षमता और कम लॉजिस्टिक्स लागत से आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलने की उम्मीद है। साथ ही पर्यटन, उद्योग और स्थानीय कारोबार को भी इसका लाभ मिल सकता है। सरकार की योजना के अनुसार वर्ष 2029-30 तक इन परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है। इनके पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के महत्वपूर्ण मार्गों पर क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों तथा उद्योगों के लिए अधिक तेज, भरोसेमंद और प्रभावी रेल परिवहन व्यवस्था उपलब्ध हो सकेगी।