भारत और आसियान देशों ने खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कृषि सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। एआई आधारित डिजिटल कृषि और किसान-केंद्रित नवाचारों पर चर्चा हुई।
भारत और आसियान देशों ने खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ कृषि, जलवायु परिवर्तन और कृषि क्षेत्र के सामने उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 9वीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक में दोनों पक्षों ने अधिक खाद्य सुरक्षित, टिकाऊ और जलवायु एवं आपदा जोखिमों का सामना करने में सक्षम कृषि व्यवस्था विकसित करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक की सह-अध्यक्षता फिलीपींस के कृषि विभाग के सचिव फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। बैठक में किसानों को केंद्र में रखते हुए कृषि और वानिकी के क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने तथा भारत-आसियान व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर चर्चा हुई।
2026-2030 की कार्ययोजना को आगे बढ़ाने पर सहमति
बैठक में ‘आसियान 2045: हमारा साझा भविष्य’ और आसियान खाद्य, कृषि एवं वानिकी क्षेत्रीय योजना 2026-2030 का स्वागत किया गया। इन योजनाओं को क्षेत्र में टिकाऊ और मजबूत कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक ढांचे के रूप में देखा गया। मंत्रियों ने कृषि एवं वानिकी में सहयोग के लिए आसियान-भारत मध्यम अवधि की कार्ययोजना 2026-2030 को अपनाने और लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई। इस कार्ययोजना में नीतिगत संवाद, डिजिटल तकनीक, तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान, क्षमता निर्माण और किसानों के बीच आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के कृषि संस्थानों और किसानों के बीच ज्ञान, अनुभव तथा आधुनिक तकनीकों का आदान-प्रदान बढ़ाना है।
जलवायु अनुकूल कृषि और एआई पर विशेष ध्यान
बैठक में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने वाली कृषि व्यवस्था को सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना गया। बदलते मौसम, अनियमित वर्षा, सूखा, बाढ़ और तापमान में बदलाव का कृषि उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में भारत और आसियान देशों ने जलवायु अनुकूल खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके साथ कम उत्सर्जन वाली धान की खेती, पानी की उत्पादकता बढ़ाने, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर भी चर्चा हुई। एआई आधारित डिजिटल कृषि को भी महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा गया। तकनीक की मदद से किसानों को मौसम, फसल, मिट्टी और बाजार से संबंधित बेहतर जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
शोध और नवाचार को किसानों तक पहुंचाने की जरूरत
मंत्रियों ने कृषि क्षेत्र में हो रहे वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी नवाचारों का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। इसके लिए शोध संस्थानों, तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों, कृषि विस्तार एजेंसियों, निजी क्षेत्र और किसानों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक बताया गया। सर्कुलर बायोइकोनॉमी, कृषि वानिकी और मजबूत कृषि मूल्य श्रृंखला को भी सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया। दोनों पक्षों का मानना है कि वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने और किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप समाधान तैयार करने से कृषि उत्पादकता तथा किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक चुनौतियों से मिलकर मुकाबला
भारत और आसियान देशों ने माना कि कृषि क्षेत्र के सामने जलवायु परिवर्तन के अलावा कई अन्य चुनौतियां भी मौजूद हैं। अत्यधिक मौसम की घटनाएं, भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताएं, कृषि इनपुट की कीमतों में उतार-चढ़ाव, व्यापार संबंधी बाधाएं तथा सीमा पार फैलने वाले कीट और रोग खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। इन परिस्थितियों में आपसी सहयोग, बेहतर सूचना साझेदारी और मजबूत कृषि आपूर्ति श्रृंखला आवश्यक है। बैठक में कृषि उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच बेहतर बनाने, मूल्यवर्धन बढ़ाने तथा कृषि और वानिकी से जुड़ी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
‘भारत-आसियान मैत्री स्पाइक’ का अनावरण
बैठक के दौरान ‘इंडिया-आसियान फ्रेंडशिप स्पाइक फॉर एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री’ का अनावरण किया गया। इसे भारत और आसियान देशों के बीच कृषि एवं वानिकी क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और साझा प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में पेश किया गया। इस अवसर पर आसियान देशों के प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली स्थित आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, पूसा का दौरा भी किया। प्रतिनिधिमंडल ने संरक्षित खेती केंद्र, बाजरा और धान के खेत, नानाजी देशमुख फेनोमिक्स सुविधा तथा आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो के जीन बैंक का निरीक्षण किया।
भारतीय कृषि तकनीकों की प्रदर्शनी
प्रतिनिधियों को भारत में फसल अनुसंधान, आधुनिक कृषि तकनीक और पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी दी गई। कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय वैज्ञानिकों तथा शोधकर्ताओं से संवाद किया। मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, सूचना एवं संचार तकनीक, पशु विज्ञान, मत्स्य विज्ञान और बागवानी से जुड़ी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। किसान सारथी प्लेटफॉर्म भी प्रदर्शित किया गया, जो 13 भारतीय भाषाओं में किसानों को कृषि संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल माध्यम के रूप में काम कर रहा है।
पशुपालन, मत्स्य और बागवानी तकनीकों पर भी जोर
प्रदर्शनी में अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लिए स्वदेशी वैक्सीन, पशु रोगों की पूर्व चेतावनी प्रणाली, मत्स्य पालन से जुड़ी तकनीकें और झींगा पालन मॉडल भी प्रदर्शित किए गए। बागवानी क्षेत्र में विविध फसलों, मसालों, मूल्यवर्धित उत्पादों और एरोपोनिक्स तकनीक के जरिए वायरस मुक्त आलू बीज उत्पादन से संबंधित तकनीकों को भी प्रतिनिधियों के सामने रखा गया। इससे भारत की कृषि अनुसंधान क्षमता और आधुनिक तकनीकों को आसियान देशों के साथ साझा करने की संभावनाएं सामने आईं।
2028 में होगी अगली मंत्रिस्तरीय बैठक
बैठक से एक दिन पहले नई दिल्ली में 10वीं आसियान-भारत कृषि कार्य समूह की बैठक आयोजित हुई, जिसमें आसियान के 11 सदस्य देशों के 45 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसमें कृषि और वानिकी क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर चर्चा की गई। मंत्रिस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि 10वीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक 2028 में आयोजित की जाएगी। कुल मिलाकर, इस बैठक ने भारत और आसियान के बीच कृषि सहयोग को तकनीक, अनुसंधान, जलवायु अनुकूल खेती और किसान-केंद्रित नवाचारों के माध्यम से नई दिशा देने की मजबूत नींव रखी है।