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RBI ने Tata Sons को नई Upper Layer NBFC सूची में बरकरार रखा है। हालांकि, NBFC लाइसेंस सरेंडर करने की Tata Sons की अर्जी अभी केंद्रीय बैंक के पास विचाराधीन है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी नई Upper Layer Non-Banking Financial Companies (NBFC-UL) सूची में Tata Sons को बरकरार रखा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने साफ किया है कि सूची में Tata Sons का नाम शामिल किए जाने का कंपनी की ओर से NBFC लाइसेंस सरेंडर करने के लिए दिए गए आवेदन के अंतिम नतीजे पर कोई असर नहीं पड़ेगा। RBI के अनुसार, Tata Sons की डी-रजिस्ट्रेशन की मांग अभी जांच के अधीन है। ऐसे में कंपनी को फिलहाल Upper Layer NBFC से जुड़े सख्त नियामकीय नियमों का पालन करना होगा।
RBI ने जारी की 17 Upper Layer NBFC की सूची
RBI ने गुरुवार को Scale-Based Regulation (SBR) फ्रेमवर्क के तहत Upper Layer में शामिल 17 NBFCs की अपडेटेड सूची जारी की। इस श्रेणी में वे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां आती हैं जिनका आकार, वित्तीय प्रणाली से जुड़ाव, कारोबार की जटिलता और संभावित प्रणालीगत जोखिम इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि उन पर सामान्य NBFCs की तुलना में अधिक कड़े नियम लागू किए जाते हैं।
नई सूची में Tata Sons के अलावा कई प्रमुख वित्तीय संस्थानों को भी शामिल किया गया है। इनमें REC, Power Finance Corporation (PFC), Indian Railway Finance Corporation (IRFC) और Housing and Urban Development Corporation (HUDCO) जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर शामिल हैं।
इसके अलावा Bajaj Finance और Shriram Finance जैसे डिपॉजिट लेने वाले NBFCs, LIC Housing Finance जैसी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी तथा Tata Capital, Cholamandalam Investment and Finance, Muthoot Finance, Aditya Birla Capital, L&T Finance, Bajaj Housing Finance, HDB Financial Services और Piramal Finance भी इस सूची का हिस्सा हैं।
PNB Housing Finance और Sammaan Capital को लेकर भी स्पष्टीकरण
RBI ने PNB Housing Finance और Sammaan Capital को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। इन दोनों कंपनियों की पहचान पिछले आकलनों में NBFC-UL के रूप में की गई थी, लेकिन मौजूदा मूल्यांकन में ये Upper Layer के मानदंडों को पूरा नहीं करतीं।
इसके बावजूद RBI ने कहा कि दोनों कंपनियां फिलहाल NBFC-UL के रूप में बनी रहेंगी और उन पर Upper Layer से जुड़े बढ़े हुए नियामकीय नियम लागू होते रहेंगे। इससे स्पष्ट है कि RBI का नियामकीय ढांचा केवल मौजूदा मानकों पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कुछ मामलों में पूर्व वर्गीकरण के प्रभाव को भी ध्यान में रखता है।
Tata Sons का लाइसेंस सरेंडर आवेदन अभी लंबित
Tata Sons के मामले में RBI ने विशेष रूप से कहा कि कंपनी का Upper Layer सूची में शामिल होना उसकी NBFC de-registration application के नतीजे को प्रभावित नहीं करेगा। RBI ने स्पष्ट किया कि कंपनी की ओर से NBFC लाइसेंस सरेंडर करने का आवेदन अभी जांच के चरण में है।
इसका मतलब है कि Tata Sons को फिलहाल Upper Layer NBFC के तौर पर लागू नियामकीय आवश्यकताओं का पालन करना होगा, लेकिन भविष्य में यदि RBI कंपनी के लाइसेंस सरेंडर करने के आवेदन को मंजूरी देता है तो उसकी स्थिति बदल सकती है।
क्या होता है Upper Layer NBFC?
RBI ने NBFCs को उनके आकार, जटिलता, वित्तीय प्रणाली से आपसी जुड़ाव और संभावित प्रणालीगत जोखिम के आधार पर चार प्रमुख स्तरों में बांटा है। इनमें Base Layer, Middle Layer, Upper Layer और Top Layer शामिल हैं।
Upper Layer में उन NBFCs और Core Investment Companies (CICs) को रखा जाता है जिन्हें वित्तीय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इनके कारोबार या किसी वित्तीय संकट का व्यापक असर पड़ सकता है, इसलिए RBI इनके लिए ज्यादा कड़े नियामकीय प्रावधान लागू करता है।
वहीं, Top Layer को ऐसी संस्थाओं के लिए आरक्षित श्रेणी माना गया है जो असाधारण रूप से उच्च प्रणालीगत जोखिम पैदा कर सकती हैं। फिलहाल यह श्रेणी काफी हद तक खाली है।
Upper Layer में शामिल होने से क्या बदलता है?
किसी NBFC के Upper Layer में शामिल होने के बाद उस पर नियामकीय निगरानी काफी बढ़ जाती है। ऐसी कंपनियों को पूंजी पर्याप्तता, कॉरपोरेट गवर्नेंस, जोखिम प्रबंधन और नियामकीय खुलासे से जुड़े अधिक सख्त नियमों का पालन करना पड़ता है।
RBI का Scale-Based Regulation फ्रेमवर्क बड़े NBFCs के लिए नियामकीय मानकों को बैंकों के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इसका उद्देश्य उन वित्तीय संस्थानों की निगरानी मजबूत करना है जिनकी गतिविधियां देश की वित्तीय व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकती हैं।
RBI के नियमों के मुताबिक, एक बार किसी NBFC को Upper Layer में वर्गीकृत किए जाने के बाद वह कम से कम पांच साल तक इन बढ़े हुए नियामकीय प्रावधानों के अधीन रह सकता है, भले ही बाद के वार्षिक आकलन में वह निर्धारित मानदंडों को पूरा न करे।
2022 में Upper Layer NBFC बना था Tata Sons
Tata Sons को पहली बार 2022 में Upper Layer NBFC के तौर पर वर्गीकृत किया गया था। कंपनी पारंपरिक तरीके से कर्ज देने वाली NBFC नहीं है, बल्कि एक Core Investment Company (CIC) के रूप में काम करती है। इसका मुख्य काम Tata Group की विभिन्न कंपनियों में निवेश रखना है।
Tata Sons के पास Tata Group की कई बड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। इनमें Tata Consultancy Services (TCS), Tata Motors, Titan Company और Indian Hotels Company जैसी प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियां शामिल हैं। कंपनी की कमाई में इन निवेशों से मिलने वाला डिविडेंड भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Tata Sons ने क्यों कम किया वित्तीय कारोबार?
Upper Layer वर्गीकरण के बाद Tata Sons ने अपनी वित्तीय गतिविधियों और कर्ज को कम करने की दिशा में कई कदम उठाए। कंपनी ने अपनी वित्तीय सेवाओं से जुड़े कारोबार को पुनर्गठित किया और उधारी घटाने पर भी ध्यान दिया।
इसी क्रम में Tata Sons ने RBI से अपने NBFC रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने और Upper Layer वर्गीकरण से बाहर निकलने का अनुरोध किया। हालांकि, RBI की ओर से इस आवेदन पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
फिलहाल Tata Sons का Upper Layer सूची में बने रहना यह दर्शाता है कि RBI कंपनी को वित्तीय प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण मानते हुए उस पर कड़ी निगरानी जारी रख रहा है। दूसरी ओर, लाइसेंस सरेंडर करने का आवेदन लंबित होने के कारण आने वाले समय में Tata Sons की नियामकीय स्थिति में बदलाव की संभावना बनी हुई है।