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अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद कर्नाटक सरकार अलर्ट। सीएम डीके शिवकुमार ने सभी मंदिरों के दान पात्रों और काउंटिंग की CCTV निगरानी और हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाने का फैसला किया।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का सनसनीखेज खुलासा होने के बाद से पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। आस्था के इस सबसे बड़े केंद्र पर हुई इस घटना ने सुरक्षा और प्रबंधन प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अयोध्या पुलिस इस मामले की गहराई से तहकीकात कर रही है और गिरफ्तार किए गए आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने जो चौंकाने वाला खुलासा किया है, उसके अनुसार वे मंदिर में चढ़ाए गए नोटों की आधिकारिक गिनती शुरू होने से पहले ही बड़ी चतुराई से रकम उड़ा लेते थे। वे दान पात्रों से पैसे निकालकर गिनती से पहले ही नोटों को गुप्त जगहों पर छिपा देते थे। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही और उनके ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में कैश, सोने की चेन, मोबाइल फोन और अपराध में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया है। इस घटना के बाद से देशभर के प्रसिद्ध मंदिरों के प्रबंधन और राज्य सरकारें अलर्ट मोड पर आ गई हैं।
कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला: मंदिरों के दान पात्रों पर रहेगा कड़ा पहरा
अयोध्या के राम मंदिर में हुई इस सुरक्षा चूक और बड़ी चोरी की घटना के मद्देनजर कर्नाटक सरकार ने तुरंत कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेलगावी में एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि कर्नाटक के सभी प्रमुख मंदिरों में दान पात्र (हुंडी) और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।
नए नियमों के मुताबिक, कर्नाटक हिंदू धार्मिक संस्थान और धर्मार्थ बंदोबस्त (धार्मिक बंदोबस्त) विभाग के तहत संचालित होने वाले सभी मंदिरों में गर्भगृह के पास रखे दान पात्रों और पैसों की गिनती से जुड़ी हर एक प्रक्रिया की चौबीसों घंटे लाइव सीसीटीवी (CCTV) मॉनिटरिंग की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस कदम से भविष्य में किसी भी मंदिर में चढ़ावे की हेराफेरी या चोरी की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी और श्रद्धालुओं द्वारा आस्था से दिए गए दान की पवित्रता बनी रहेगी।
ट्रैफिक कंट्रोल रूम की तर्ज पर बनेंगे ‘हाई-टेक’ मंदिर कंट्रोल रूम
चोरी को रोकने के लिए कर्नाटक सरकार सिर्फ सीसीटीवी कैमरे लगाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसकी निगरानी के लिए एक मजबूत ढांचा तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि शहरों में कानून व्यवस्था और यातायात संभालने वाले ‘ट्रैफिक कंट्रोल रूम’ की तर्ज पर ही इन मंदिरों के लिए भी जिला और तालुका स्तर पर विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किए जाएंगे।
इन हाई-टेक कंट्रोल रूम का सीधा नियंत्रण जिला पुलिस अधीक्षक (SP), जिलाधिकारी (DM) या फिर तालुका स्तर के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों के पास होगा। इन कार्यालयों में बैठे अधिकारी सीधे अपनी स्क्रीन पर मंदिर के भीतर चल रही पैसे की गिनती और दान पात्रों की गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे। इससे स्थानीय स्तर पर मंदिर प्रशासन या कर्मचारियों द्वारा किसी भी प्रकार की मिलीभगत की संभावना को रोका जा सकेगा।
अयोध्या पुलिस की रडार पर बैंक कर्मचारी और पूर्व ट्रस्टी: जांच में बड़ा मोड़
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद की जड़ यानी अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस ने बेहद तेज कर दी है। इस मामले में अब एक नया और बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के कुछ कर्मचारी पुलिस की रडार पर आ गए हैं। चूंकि मंदिर का सारा कैश प्रबंधन बैंक के माध्यम से होता था, इसलिए पुलिस ने बैंक के कुछ संदिग्ध कर्मचारियों को औपचारिक नोटिस जारी किया है और उनसे बहुत जल्द आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा सकती है। इसके साथ ही, मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा से भी पुलिस पूछताछ करने की तैयारी में है।
इस बीच, इस महाचोरी के तीन मुख्य आरोपियों—अनुकल्प, लवकुश और करुणेश—की पुलिस रिमांड की अवधि समाप्त हो गई है। रिमांड खत्म होने के बाद अदालत के आदेश पर तीनों को दोबारा अयोध्या जेल भेज दिया गया है। अपनी 40 घंटे की कड़ी पुलिस रिमांड के दौरान, आरोपियों ने कई राज उगले, जिसके आधार पर पुलिस ने उनके गुप्त ठिकानों से भारी मात्रा में नगदी, सोने के कीमती जेवर, एक लग्जरी कार और मंदिर के आंतरिक प्रबंधन से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज बरामद किए हैं, जो इस घोटाले की गहराई को बयां करते हैं।