राघव चड्ढा का AAP से इस्तीफा और भाजपा में शामिल होने का सच: ‘सत्याग्रह’ या ‘सत्ताग्रह’?

राघव चड्ढा का AAP से इस्तीफा और भाजपा में शामिल होने का सच: 'सत्याग्रह' या 'सत्ताग्रह'?

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने ‘आप’ छोड़कर भाजपा ज्वाइन करने के पीछे के कारणों का खुलासा किया है। जानें क्यों चड्ढा ने कहा कि वे ‘गलत पार्टी’ में थे और सोशल मीडिया पर उनका विरोध क्यों हो रहा है।

आम आदमी पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक रहे राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों अपनी नई राजनीतिक पारी को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। हाल ही में भाजपा में शामिल होने के अपने चौंकाने वाले फैसले के बाद उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच, सोमवार (27 अप्रैल) को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर इस बड़े बदलाव के पीछे की अपनी मजबूरी और पार्टी के भीतर के खराब माहौल का कच्चा चिट्ठा खोला है।

15 साल का समर्पण और ‘आप’ का बदला स्वरूप

राघव चड्ढा ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन के बेशकीमती 15 साल आम आदमी पार्टी को समर्पित किए हैं। खुद को पार्टी का संस्थापक सदस्य बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीति को करियर के रूप में नहीं चुना था, बल्कि एक बदलाव के लिए अपना खून-पसीना एक किया था। हालांकि, उन्होंने वर्तमान ‘आप’ की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि आज यह पार्टी वैसी संस्था नहीं रही जैसी इसकी शुरुआत हुई थी। चड्ढा के अनुसार, पार्टी के भीतर काम करने का माहौल बेहद खराब हो चुका है और सांसदों को संसद में खुलकर अपनी बात रखने से भी रोका जाता है।

सात सांसदों का इस्तीफा: दबाव नहीं, हताशा है कारण

भाजपा में शामिल होने के अपने फैसले को सही ठहराते हुए चड्ढा ने तर्क दिया कि उन्हें लगातार पार्टी में अलग-थलग महसूस कराया जा रहा था। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि मैं सही व्यक्ति तो हूँ, लेकिन गलत पार्टी में हूँ।” इस दौरान उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उनके साथ कुल सात सांसदों ने पार्टी से संबंध तोड़ने का फैसला किया है। चड्ढा ने तंज कसते हुए कहा कि एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग एक साथ गलत नहीं हो सकते। उन्होंने उन आरोपों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने किसी डर या दबाव में इस्तीफा दिया है; उनके अनुसार यह इस्तीफा डर नहीं, बल्कि ‘आप’ से हुए मोहभंग और हताशा का परिणाम है।

सोशल मीडिया पर भारी विरोध और फॉलोअर्स में गिरावट

राघव चड्ढा का यह राजनीतिक हृदय परिवर्तन उनके समर्थकों को रास नहीं आया है। भाजपा में शामिल होने के महज 24 घंटों के भीतर ही उन्हें डिजिटल मोर्चे पर भारी नुकसान उठाना पड़ा। खबरों के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई और उन्होंने करीब 20 लाख फॉलोअर्स खो दिए। सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो क्लिप्स भी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे कभी भाजपा की तीखी आलोचना करते नजर आते थे। इन विरोधाभासी बयानों ने उनके राजनीतिक रुख में आए अचानक बदलाव को लेकर इंटरनेट पर एक नई बहस छेड़ दी है, हालांकि चड्ढा का कहना है कि वे अब और अधिक ऊर्जा के साथ जनता के मुद्दों को उठाते रहेंगे।

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