एयर इंडिया की मुंबई-भोपाल फ्लाइट AI633 की तकनीकी खराबी के चलते भोपाल में सुरक्षित लैंडिंग हुई। साथ ही एयरलाइन ने अपना पहला नया रेट्रोफिटेड बोइंग 787-8 विमान भी पेश किया।
मुंबई-भोपाल फ्लाइट की सुरक्षित ‘प्रिकॉशनरी लैंडिंग’
एयर इंडिया की मुंबई से भोपाल जा रही फ्लाइट संख्या AI633 को रविवार (26 अप्रैल) को तकनीकी खराबी की आशंका के चलते भोपाल हवाई अड्डे पर ‘प्रिकॉशनरी लैंडिंग’ करनी पड़ी। एयरलाइन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, उड़ान के दौरान चालक दल ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन करते हुए एहतियाती तौर पर विमान को उतारने का निर्णय लिया। विमान के सुरक्षित लैंड होने के बाद सभी यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को बिना किसी अप्रिय घटना के सुरक्षित उतार लिया गया। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एयरलाइन ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की ताकि वे अपने गंतव्य तक समय पर पहुँच सकें, जबकि प्रभावित विमान को विस्तृत तकनीकी जांच के लिए भेज दिया गया।
एयर इंडिया का नया कायाकल्प: पहला रेट्रोफिटेड बोइंग 787-8
उसी दिन एयर इंडिया ने अपने बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अपने पहले रेट्रोफिटेड बोइंग 787-8 (VT-ANT) विमान का अनावरण किया। यह विमान उन 26 बोइंग 787 विमानों के बेड़े में से पहला है जिसका ‘नोज-टू-टेल’ केबिन रिफ्रेश किया गया है। कैलिफोर्निया के विक्टरविले में हुए इस अपग्रेड के तहत विमान को न केवल एयर इंडिया की नई और आकर्षक ‘लिवरी’ (पेंट और लोगो) में रंगा गया है, बल्कि इसके आंतरिक भाग को भी पूरी तरह बदल दिया गया है। पहले दो श्रेणियों वाले इस विमान को अब आधुनिक तीन-श्रेणी (Three-class) कॉन्फ़िगरेशन में बदल दिया गया है, जिसमें प्रीमियम अनुभव के लिए नई सीटें और आधुनिक इन-फ्लाइट एंटरटेनमेंट (IFE) सिस्टम लगाए गए हैं।
12,000 कार्य घंटों की मेहनत और विश्वस्तरीय मानक
इस बोइंग 787-8 विमान को नया रूप देने की प्रक्रिया बेहद जटिल और तकनीकी रूप से उन्नत थी, जिसमें लगभग 45 दिनों के भीतर 12,825 मैन-ऑर्स (कार्य घंटे) खर्च किए गए। इस दौरान पुराने इंटीरियर को हटाने से लेकर केबिन को फिर से कॉन्फ़िगर करने, नए कालीन, दीवार के लैमिनेट्स लगाने और गैली व शौचालयों की पूरी मरम्मत करने जैसे कार्य किए गए। एयर इंडिया का यह नया उत्पाद उन मानकों पर आधारित है जो जनवरी 2026 में शामिल किए गए बोइंग 787-9 विमानों में देखे गए थे। इस सफल रेट्रोफिटिंग के बाद अब एयर इंडिया अपने पूरे वाइडबॉडी बेड़े को वैश्विक मानकों के अनुरूप उन्नत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।