मान सरकार का ऐतिहासिक अध्यादेश! पंजाब के 7,800 प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगी रोक। 32 लाख से ज्यादा माता-पिता को मिली स्थायी राहत।
पंजाब की भगवंत सिंह मान सरकार ने राज्य के इतिहास में शिक्षा क्षेत्र का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी सुधार लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा की जाने वाली मनमानी और नाजायज फीस बढ़ोतरी पर हमेशा-हमेशा के लिए पूर्ण रोक लगा दी है। राज्य सरकार द्वारा तैयार किए गए ‘द पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (अमेंдमेंट) ऑर्डिनेंस, 2026’ को माननीय राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की मंजूरी मिल गई है और यह ऐतिहासिक अध्यादेश पूरे राज्य में तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है।
अध्यादेश की 4 सबसे बड़ी बातें: माता-पिता के पक्ष में झुका कानून
ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਸਕੂਲਾਂ ਦੀ ਫ਼ੀਸ ਵਾਧੇ ਦੀ ਮਨਮਰਜ਼ੀ ‘ਤੇ ਕਨੂੰਨੀ ਸ਼ਿਕੰਜਾ!
ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਆਰਡੀਨੈਂਸ ਰਾਹੀਂ ਕੀਤਾ ਪੱਕਾ ਹੱਲ, ਸੂਬੇ ਭਰ ਦੇ 32 ਲੱਖ ਮਾਪਿਆਂ ਦੀ ਚਿਰਾਂ ਤੋਂ ਲਟਕੀ ਮੰਗ ਹੋਈ ਪੂਰੀ pic.twitter.com/pp4P3gGFdV
— AAP Punjab (@AAPPunjab) July 16, 2026
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस अध्यादेश के कड़े प्रावधानों को सार्वजनिक किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब कोई भी स्कूल अपनी मर्जी से जनता की जेब नहीं काट सकेगा। इस कानून के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
सालाना बढ़ोतरी पर 5% का कैप: अब कोई भी प्राइवेट स्कूल साल में 5% से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। यदि कोई स्कूल इससे अधिक की वृद्धि करना चाहता है, तो उसे सरकार की हाई-पावर कमिटी से ऑडिट करवाकर पूर्व अनुमति लेनी होगी।
- ज्यादा वसूली गई फीस होगी रिफंड: पिछले 3 वर्षों के दौरान जिन स्कूलों ने कुल मिलाकर 15% से अधिक फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त वसूली गई पूरी रकम माता-पिता को वापस (Refund) करनी होगी। इसे अगले महीनों की फीस में ‘एडजस्ट’ करने का बहाना नहीं चलेगा, नकद या बैंक ट्रांसफर से सीधे पैसे लौटाने होंगे।
- छिपे हुए चार्ज बंद, सब कुछ ‘ट्यूशन फीस’ का हिस्सा: अक्सर स्कूल बिल्डिंग फंड, ट्रांसपोर्ट फीस, कंप्यूटर फीस या स्पोर्ट्स फंड के नाम पर अलग से पैसे वसूलते थे। नए कानून के तहत, किसी भी नाम से ली जाने वाली अनिवार्य राशि को ‘ट्यूशन फीस’ का ही हिस्सा माना जाएगा और 5% की सीमा उन सब पर संयुक्त रूप से लागू होगी।
- रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य: सभी निजी संस्थानों को पिछले 4 साल की फीस का पूरा ब्यौरा अगले 10 दिनों के भीतर शिक्षा विभाग के पोर्टल पर अपलोड करना होगा, जिसकी डिप्टी कमिश्नर (DC) की अध्यक्षता वाली कमिटी जांच करेगी।
32 लाख परिवारों की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी: सीएम मान
इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा एक पवित्र कार्य है, इसे मुनाफे की फैक्ट्री नहीं बनने दिया जाएगा। मुझे लगातार पंजाब भर के माता-पिता के फोन आ रहे थे कि स्कूल अलग-अलग मदों में भारी फीस वसूल कर रहे हैं, जिससे आम आदमी पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा था। हमारी सरकार ने 32 लाख माता-पिता से वादा किया था कि हम उन्हें राहत देंगे और आज हमने वह स्थायी समाधान करके दिखाया है।”
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई, रद्द होगी मान्यता
मान सरकार ने निजी स्कूलों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि कानून का उल्लंघन करने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।
अध्यादेश के तहत कड़े दंड प्रावधान तय किए गए हैं:
पहली बार नियम तोड़ने पर: ₹50,000 का जुर्माना।
दूसरी बार उल्लंघन करने पर: ₹1,00,000 (1 लाख) का जुर्माना।
तीसरी बार उल्लंघन करने पर: स्कूल की मान्यता (Affiliation/License) को सीधे रद्द कर दिया जाएगा।