हरियाणा CM नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार ने सफाई कर्मचारियों की करीब दर्जन मांगें स्वीकार की हैं। बाकी मांगों पर भी गंभीरता से विचार जारी है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि राज्य सरकार सफाई कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार ने सफाई कर्मचारियों की करीब एक दर्जन मांगों को स्वीकार कर लिया है, जबकि शेष मांगों पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार कर रही है।
सरकार के सकारात्मक रुख के बाद कई कर्मचारी ड्यूटी पर लौटे
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार के सकारात्मक रुख को देखते हुए बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी अपने काम पर वापस लौट आए हैं। उन्होंने बाकी कर्मचारियों से भी अपील की कि वे ड्यूटी पर लौटें और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें।
कर्मचारियों की मांगों पर सरकार ने उठाए कदम
प्रदेश सरकार सफाई कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह कृतसंकल्प है। सरकार ने सफाई कर्मचारियों की लगभग एक दर्जन मांगों को स्वीकार कर लिया है, जबकि शेष मांगों पर भी सरकार द्वारा सहानुभूतिपूर्वक और गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
सरकार के सकारात्मक रुख को देखते हुए अनेक…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) September 9, 2026
सरकार की ओर से बताया गया है कि सफाई कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति बन चुकी है। इनमें न्यूनतम वेतन, LTC, ESI और EPF जैसी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। वहीं, नियमितीकरण से संबंधित मांग कानूनी पहलुओं के कारण विचाराधीन है और इस पर न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सफाई व्यवस्था को सुचारू रखना सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सफाई कर्मचारी शहरों की स्वच्छता व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के साथ-साथ प्रदेश में सफाई व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना भी सरकार की प्राथमिकता है।
उन्होंने कर्मचारियों से संवाद और सहयोग के माध्यम से समस्याओं का समाधान करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों पर सकारात्मक रुख के साथ आगे बढ़ रही है।
सरकार और कर्मचारियों के बीच संवाद जारी
हरियाणा सरकार के अनुसार, सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं और संवाद का रास्ता लगातार खुला रखा गया है। सरकार का कहना है कि अधिकांश मांगों को सिद्धांत रूप में स्वीकार किया जा चुका है, जबकि शेष मुद्दों पर नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।