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पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि नया कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को मजबूत करेगा।
सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर सख्ती के उद्देश्य से लाया गया पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 अब संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। लोकसभा से बुधवार और राज्यसभा से गुरुवार को मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक अब राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। इस कानून का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस विधेयक के पारित होने का स्वागत करते हुए कहा कि यह देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
एस. जयशंकर ने बताया ऐतिहासिक कदम
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संसद के दोनों सदनों से पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026 का पारित होना भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की ईमानदारी, पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि यह कानून केवल पेपर लीक रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र को अधिक जवाबदेह और सुरक्षित बनाने का प्रयास है।
कानून में होंगे समयबद्ध जांच और फास्ट ट्रैक कोर्ट
एस. जयशंकर ने नए कानून की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें समयबद्ध जांच, विशेष लोक अभियोजकों (Special Public Prosecutors) की नियुक्ति, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना और त्वरित अपीलीय व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। उनका कहना है कि इन व्यवस्थाओं से पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच और सुनवाई में तेजी आएगी तथा दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी। इससे भविष्य में ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
‘मेहनती युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है सरकार’
विदेश मंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के मेहनती और प्रतिभाशाली युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि करोड़ों छात्र वर्षों की मेहनत के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं और उनकी मेहनत किसी भी तरह की धांधली या पेपर लीक की वजह से बर्बाद नहीं होनी चाहिए। सरकार का लक्ष्य ऐसा परीक्षा तंत्र विकसित करना है, जिसमें प्रतिभा और मेहनत के आधार पर ही सफलता मिले।
राज्यसभा से भी मिला विधेयक को समर्थन
गुरुवार को राज्यसभा ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी। हालांकि मतदान से पहले विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया और सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। इससे पहले बुधवार को लोकसभा भी इस विधेयक को पारित कर चुकी थी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा और सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का आधार बनेगा।
जितेंद्र सिंह ने शिक्षा सुधारों का किया उल्लेख
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के हर परिवार से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए वर्षों तक मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस कानून से लगभग 7.65 करोड़ छात्रों को लाभ मिलेगा, क्योंकि यह सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को बताया गेम चेंजर
डॉ. जितेंद्र सिंह ने चर्चा के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक “गेम चेंजर” बताया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति ने छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की आजादी दी है। इससे पहले कई बार छात्रों को परिवार या समाज की अपेक्षाओं के आधार पर विषय चुनने पड़ते थे, लेकिन अब उन्हें अपने करियर का निर्णय स्वयं लेने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
दो महीने में जांच और तीन महीने में ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नए कानून के तहत पेपर लीक और परीक्षा में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी। इसके बाद चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर फास्ट ट्रैक अदालतों में मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि समयबद्ध प्रक्रिया से दोषियों को जल्द सजा मिलेगी और लंबे समय तक मुकदमे लंबित रहने की समस्या भी कम होगी।
पेपर लीक को बताया राष्ट्रीय चिंता का विषय
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक कोई नई समस्या नहीं है। देश के विभिन्न राज्यों और अलग-अलग समय की सरकारों के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं। इसलिए इस समस्या से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं थी, बल्कि मजबूत कानूनी व्यवस्था की भी आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि सरकार अब ऐसी व्यवस्था बना रही है जिसमें पेपर लीक के पूरे नेटवर्क—चाहे वह सॉल्वर गैंग हो, कोचिंग माफिया, प्रिंटिंग एजेंसियां या अंदरूनी अधिकारी—सभी पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
उच्च शिक्षा और आदिवासी शिक्षा पर भी सरकार का फोकस
अपने संबोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,293 हो गई है। इसके अलावा देशभर में 400 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिससे आदिवासी क्षेत्रों के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ परीक्षा प्रणाली को भी अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है।
कड़े प्रावधानों से पेपर लीक पर लगेगी रोक
नए कानून में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। समयबद्ध जांच, विशेष लोक अभियोजक, विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया जैसे प्रावधानों के जरिए सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक परीक्षाओं में केवल योग्यता और मेहनत के आधार पर ही सफलता मिले। सरकार का मानना है कि यह कानून देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य की रक्षा करने और परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।