राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कटक में जगद्गुरु कृपालु महाराज विश्वविद्यालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि युवा भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों से मूल्य आधारित शिक्षा, शोध, नवाचार और राष्ट्रनिर्माण पर जोर देने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को ओडिशा के कटक में जगद्गुरु कृपालु महाराज विश्वविद्यालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसके युवा हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे युवा देशों में भारत की गिनती होती है और यही जनसांख्यिकीय शक्ति देश को वर्ष 2047 तक विकसित भारत (विकसित भारत) बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालयों का दायित्व केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और राष्ट्रहित की भावना से प्रेरित हों। उन्होंने कहा कि युवाओं की प्रतिभा को सही दिशा देने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों में ऐसा वातावरण तैयार किया जाना चाहिए, जहां वे अपने सपनों को साकार कर सकें और समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान दे सकें।
मूल्य आधारित शिक्षा से ही बनेगा जिम्मेदार समाज
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में मूल्य आधारित शिक्षा के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक मानी जाएगी जब उसका उपयोग मानवता की सेवा, समाज के कल्याण और राष्ट्र की प्रगति के लिए किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया कि आदिवासी विद्यार्थियों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और बालिकाओं की शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही उन्होंने शोध, नवाचार, कौशल विकास, उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण को संस्थान की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करने की सलाह दी। राष्ट्रपति ने कहा कि नैतिक मूल्यों से जुड़ी शिक्षा युवाओं को बेहतर इंसान बनाने के साथ-साथ देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी मजबूत करती है।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य निर्धारित किया है और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में विश्वविद्यालयों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थान केवल ज्ञान के केंद्र न बनें, बल्कि ऐसे अनुसंधान और तकनीक विकसित करें जो समाज की वास्तविक जरूरतों का समाधान प्रस्तुत करें। उनके अनुसार आधुनिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जगद्गुरु कृपालु महाराज विश्वविद्यालय भविष्य में ऐसे शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और कुशल युवाओं को तैयार करेगा जो विकसित ओडिशा और विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
100 एकड़ में विकसित आधुनिक विश्वविद्यालय की विशेषताएं
कटक में स्थापित जगद्गुरु कृपालु महाराज विश्वविद्यालय लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। यह विश्वविद्यालय बहुविषयक शिक्षा (मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन) प्रदान करेगा, जहां अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक सेवा पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कंप्यूटर साइंस, स्वास्थ्य विज्ञान और प्राकृतिक चिकित्सा (नेचुरोपैथी) जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे संस्थान भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन तैयार करेंगे और युवाओं को रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता की दिशा में भी प्रेरित करेंगे।
तीन दिवसीय ओडिशा दौरे पर राष्ट्रपति, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने तीन दिवसीय ओडिशा दौरे पर हैं। भुवनेश्वर पहुंचने पर उनका स्वागत राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। विश्वविद्यालय के उद्घाटन के बाद राष्ट्रपति रात्रि विश्राम के लिए लोक भवन लौटीं। मंगलवार को वह विशेष ट्रेन से गंजाम जिले के बेरहामपुर जाएंगी। मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश की संभावना को देखते हुए उनकी यात्रा के लिए विशेष रेल व्यवस्था की गई है। राष्ट्रपति की विशेष सैलून बोगी के आगे और पीछे सुरक्षा के लिए अलग-अलग ट्रेनें चलेंगी तथा यात्रा के दौरान उसी रेल ट्रैक पर किसी अन्य ट्रेन को अनुमति नहीं होगी।
राष्ट्रपति की यात्रा को देखते हुए भुवनेश्वर, कटक और बेरहामपुर में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। रेलवे स्टेशनों पर बम निरोधक दस्ते, स्निफर डॉग, व्यापक बैगेज स्क्रीनिंग और रेलवे सुरक्षा बल (RPF), सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) तथा ओडिशा पुलिस की संयुक्त तैनाती की गई है। भुवनेश्वर और कटक में लगभग 40 प्लाटून पुलिस बल तथा 150 से अधिक पुलिस अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है, जबकि गंजाम जिले में राष्ट्रपति के कार्यक्रम स्थलों को “नो-फ्लाइंग जोन” घोषित किया गया है। राष्ट्रपति अपने दौरे के दौरान तप्तपानी के निकट स्थित मां कंधुनी देवी मंदिर में दर्शन भी करेंगी। अधिकारियों के अनुसार यह दौरा पूरी तरह ब्लू बुक प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जा रहा है, ताकि राष्ट्रपति की सुरक्षा और कार्यक्रमों का सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।