सूरत के दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18,800 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। तापी बैराज और सर्कुलर वाटर इकोनॉमी पर दिया जोर। विपक्ष पर भी साधा निशाना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा हमेशा से राज्य की विकास यात्रा में एक नए अध्याय की तरह होता है। हाल ही में सूरत के अपने दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री ने न केवल आधारभूत संरचना (infrastructure) के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाई, बल्कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई दूरगामी योजनाओं का शिलान्यास भी किया। 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण यह दर्शाता है कि केंद्र सरकार गुजरात को विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बनाने के अपने संकल्प पर कितनी मजबूती से काम कर रही है।
सूरत की ‘सर्कुलर वाटर इकोनॉमी’ और भविष्य की तैयारी
सूरत के विकास की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने जिस बिंदु पर सबसे अधिक जोर दिया, वह थी—सूरत की ‘सर्कुलर वाटर इकोनॉमी’। यह नवाचार न केवल जल संरक्षण के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक का उपयोग कैसे किया जा रहा है। आने वाले कई दशकों तक सूरत के निवासियों को जल संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए तापी बैराज प्रोजेक्ट को स्वीकृति देना एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में ‘प्रकृति के साथ प्रगति’ के मंत्र को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की विकास रणनीति में इकोनॉमी और इकोलॉजी के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है। सड़क, बिजली और औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना मोदी सरकार की उस व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसके तहत विकास को भविष्योन्मुखी और स्थायी बनाया जा रहा है।
जनादेश और भाजपा की विकासवादी राजनीति
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में देश भर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिल रहे निरंतर समर्थन पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश की जनता का भाजपा पर भरोसा अटूट है, जिसका कारण है सरकार की ‘विकास को प्राथमिकता’ देने वाली नीति। हाल ही में बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा और एनडीए को मिला जनादेश इस बात का प्रमाण है कि देश अब विकास की मुख्यधारा के साथ जुड़ना चाहता है। प्रधानमंत्री ने गर्व के साथ कहा कि उनकी विदेश यात्राओं के दौरान भी भारत के इन राज्यों में हो रहे विकास और वहां के राजनीतिक परिवर्तनों की चर्चा वैश्विक मंचों पर हो रही है, जो यह दर्शाता है कि भारत की विकास गाथा अब सीमाएं लांघकर पूरी दुनिया में जानी जा रही है।
विपक्ष पर करारा हमला: अराजकता बनाम विकास
प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों से यह पार्टी केवल देश में अराजकता और अनिश्चितता का माहौल बनाने में लगी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की राजनीति में अवसरवाद की बू आती है, लेकिन भारतीय जनता इसे भली-भांति समझ चुकी है। गुजरात का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने कांग्रेस को हाशिये पर धकेल कर यह स्पष्ट कर दिया है कि नकारात्मक राजनीति के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है।
पीएम मोदी ने हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक का जिक्र करते हुए कहा कि जहाँ-जहाँ कांग्रेस का शासन है, वहां की जनता कुशासन और आंतरिक कलह से त्रस्त है। स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस की हार और कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जनता अब अराजकता फैलाने वालों को सबक सिखाने में देरी नहीं कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस की राजनीति ‘अवसर की तलाश’ तक सिमट गई है, जबकि भाजपा की राजनीति ‘राष्ट्र के विकास’ पर केंद्रित है।
सूरत की यह जनसभा केवल विकास परियोजनाओं के लोकार्पण तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह भारतीय राजनीति के बदलते स्वरूप का एक आईना भी थी। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री ने गुजरात को भविष्य के लिए तैयार करने वाली योजनाओं की नींव रखी, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि देश की जनता अब ‘विकास’ को सर्वोपरि मानती है। आने वाले समय में, यह स्पष्ट है कि सरकार का मुख्य ध्यान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, जल प्रबंधन और औद्योगिक उन्नति पर बना रहेगा, जिससे न केवल गुजरात बल्कि पूरा भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी मजबूत स्थिति कायम रख सके।