पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन की गंभीर स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के सांसदों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। जानें राहत कार्य, IMD का अलर्ट और केंद्र सरकार के बड़े फैसले।
पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के सांसदों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में दोनों राज्यों में राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा, प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता, क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण और केंद्र व राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ स्थिति का आकलन करते हुए भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार दोनों राज्यों के साथ मिलकर हर चुनौती का सामना करेगी और प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रधानमंत्री मोदी ने X पर दिया भरोसा
बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के सांसदों के साथ बाढ़ की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार दोनों राज्य सरकारों के साथ मिलकर मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने के लिए लगातार कार्य करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने सभी प्रभावित लोगों की सुरक्षा और कुशलता की भी कामना की तथा कहा कि संकट की इस घड़ी में केंद्र सरकार पूरी मजबूती के साथ राज्यों के साथ खड़ी है।
लगातार बारिश से डेढ़ लाख से अधिक लोग प्रभावित
मानसून की लगातार बारिश, नदियों के उफान और कई स्थानों पर हुए भूस्खलन ने अरुणाचल प्रदेश में व्यापक तबाही मचाई है। राज्य में लगभग 1.5 लाख लोग बाढ़ और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए हैं। कई जिलों में सड़क संपर्क टूट गया है, पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं और कई गांवों का संपर्क मुख्य क्षेत्रों से कट गया है। कई स्थानों पर जान-माल का भी भारी नुकसान हुआ है। वहीं नागालैंड में भी भारी वर्षा और भूस्खलन के कारण कई लोगों की मौत हुई है तथा बड़ी संख्या में मकान और सार्वजनिक संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं।
बैठक में शामिल हुए दोनों राज्यों के सांसद
प्रधानमंत्री के साथ हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में अरुणाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व भाजपा सांसद तापिर गाओ, केंद्रीय मंत्री एवं सांसद किरेन रिजिजू और राज्यसभा सांसद ताई तागक ने किया। वहीं नागालैंड की ओर से लोकसभा सांसद एस. सुपोंगमेरेन जमीर और राज्यसभा सांसद एस. फांगनोन कोन्याक बैठक में शामिल हुए। सभी सांसदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति, राहत कार्यों की प्रगति और केंद्र से आवश्यक सहायता की मांगों को प्रधानमंत्री के समक्ष रखा।
IMD ने जारी किया भारी बारिश का अलर्ट
इस बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 30 जुलाई से 1 अगस्त तक असम और उससे सटे पूर्वोत्तर राज्यों में कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा तथा गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) ने लोगों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग के अनुसार अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग, लोहित, नामसाई, लॉन्गडिंग, पापुमपारे, लोअर सुबनसिरी और लोअर दिबांग वैली जिलों में भारी वर्षा की संभावना है, जिसका असर असम के तिनसुकिया, धेमाजी और लखीमपुर जिलों पर भी पड़ सकता है। इसके अलावा असम के तिनसुकिया जिले में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं नागालैंड के मोन, मोकोकचुंग और वोखा जिलों के लिए भी ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में जलभराव, बाढ़, अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड), यातायात बाधित होने और भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है।
प्रशासन और राहत एजेंसियां अलर्ट मोड पर
राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), पुलिस, असम राइफल्स और स्थानीय स्वयंसेवक राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं और जरूरतमंद परिवारों तक भोजन, दवाइयां तथा अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को भी पूरी तरह सक्रिय रखा है ताकि किसी भी नई स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
मोन जिले में भूस्खलन से कई लोगों की मौत
इस महीने की शुरुआत में नागालैंड के मोन जिले में भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर बड़े भूस्खलन हुए थे। इन घटनाओं में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई थी और 12 अन्य घायल हुए थे। मोन जिले के उपायुक्त वेन्येई कोन्याक के अनुसार सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र मोन टाउन और तिजित रहे। राहत दलों ने मलबे से कई शव बरामद किए, जबकि अन्य लोगों की तलाश के लिए अभियान लगातार जारी रहा। भूस्खलन के कारण कई मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए।
राहत कार्यों की सराहना और संवेदना व्यक्त
नागालैंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बेंजामिन येप्थोमी ने मोन और मोकोकचुंग जिलों में हुई त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह पूरे राज्य के लिए बेहद दुखद समय है। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी NDRF, SDRF, जिला प्रशासन, सुरक्षा बलों, चिकित्सा कर्मियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों की सराहना करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में उनका समर्पण और सेवा भावना प्रशंसनीय है। उन्होंने प्रभावित परिवारों के जल्द सामान्य जीवन में लौटने की कामना की और कहा कि सरकार तथा समाज मिलकर इस प्राकृतिक आपदा से उबरने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे।