संसद के मानसून सत्र के पहले दिन कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च को लेकर जंतर-मंतर पर 10 हजार जवान तैनात हैं। सुरक्षा के चलते दिल्ली के 5 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए हैं।
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक और सुरक्षा का पारा चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां मोदी सरकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ से जुड़े अहम संशोधनों समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पटल पर रखने की तैयारी में है, वहीं दूसरी तरफ पूरे देश की निगाहें दिल्ली के ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर टिकी हुई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा संसद मार्च के बड़े ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। जंतर-मंतर से लेकर संसद भवन तक के पूरे रास्ते को किले में तब्दील कर दिया गया है, जिससे आज सत्र के पहले ही दिन सड़क से लेकर सदन तक भारी टकराव के आसार बन गए हैं।
जंतर-मंतर बना अभेद्य किला: 10 हजार जवान और 3 लेयर सिक्योरिटी
जंतर-मंतर पर इस वक्त भारी सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, जहां पांच से छह हजार प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं, वहीं उन्हें रोकने के लिए दस हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को मोर्चे पर लगाया गया है। प्रदर्शनकारियों को संसद की तरफ बढ़ने से रोकने के लिए रास्ते में तीन स्तर (लेयर) की मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। जंतर-मंतर के आसपास भारी मात्रा में टियर गैस (आंसू गैस के गोले), लाठी (बैटन) से लैस बल और वज्र वाहनों को मुस्तैद रखा गया है।
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा 163 (जो पहले धारा 144 थी) लागू कर दी गई है। इसके तहत जंतर-मंतर के निर्धारित प्रदर्शन स्थल को छोड़कर नई दिल्ली के किसी भी अन्य हिस्से में पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने पर पूरी तरह पाबंदी है। दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस संसद मार्च के लिए कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए किसी को भी आगे बढ़ने की इजाजत नहीं होगी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को अधिकतम ‘केरल भवन’ तक ही जाने दिया जाएगा और बैरिकेड्स पार करने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के नेतृत्व के बीच बातचीत का दौर जारी है।
सोनम वांगचुक की चार शर्तें: सरकार और सांसदों के सामने रखा प्रस्ताव
इसी बीच, लद्दाख के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सफदरजंग अस्पताल से अपनी नजरबंदी का आरोप लगाते हुए अपना अनशन खत्म करने के लिए सरकार और विपक्ष के सामने चार प्रमुख शर्तें रखी हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी एक चिट्ठी साझा करते हुए कहा कि उनके आने-जाने और बोलने की आजादी पर गैर-कानूनी तरीके से रोक लगाई गई है। वांगचुक द्वारा रखी गई चार शर्तें इस प्रकार हैं:
- पहली शर्त: केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में हाल ही में सामने आईं बड़ी नाकामियों और देशव्यापी पेपर लीक मामलों की पूरी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करे।
- दूसरी शर्त: सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के शीर्ष नेतृत्व को शांतिपूर्ण तरीके से संसद भवन तक मार्च करने की अनुमति दी जाए।
- तीसरी शर्त: देश की विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के सांसद और वरिष्ठ नेता जंतर-मंतर या संसद के पास आकर उन्हें यह लिखित या मौखिक भरोसा दिलाएं कि वे वर्तमान सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे।
- चौथी शर्त: यदि स्वास्थ्य कारणों या सुरक्षा बंदिशों की वजह से संसद तक जाना मुमकिन न हो, तो विभिन्न दलों के सांसद और नेता खुद अस्पताल आकर उनकी चिंताओं पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दें।
सुरक्षा के चलते दिल्ली मेट्रो प्रभावित; पार्लियामेंट स्ट्रीट पूरी तरह सील
इस बड़े प्रदर्शन और हंगामे की आशंका को देखते हुए दिल्ली का यातायात और लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो भी प्रभावित हुई है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि सुरक्षा एजेंसियों के निर्देश पर जनपथ, राजीव चौक, पटेल चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक यात्रियों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
इसके साथ ही, पार्लियामेंट स्ट्रीट रोड को जंतर-मंतर की तरफ से बड़े-बड़े बैरिकेड्स लगाकर पूरी तरह सील कर दिया गया है। इस वीआईपी रोड पर मीडिया कर्मियों से लेकर आम प्रदर्शनकारियों तक किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक प्रदर्शनकारी इन बैरिकेड्स को कानूनन नहीं तोड़ते—जो कि मौजूदा सुरक्षा घेरे को देखते हुए नामुमकिन लग रहा है—तब तक किसी भी स्थिति में मार्च को लुटियंस दिल्ली के कोर एरिया में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनी इस कमान ने संसद के इस मानसून सत्र की शुरुआत को बेहद संवेदनशील बना दिया है।