संसद का मानसून सत्र शुरू हो गया है। पीएम मोदी ने अंतरिक्ष स्टार्टअप स्काईरूट की तारीफ कर राहुल गांधी पर तंज कसा। सत्र में सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या और वंदे मातरम् बिल पेश होंगे।
संसद का मानसून सत्र आज (20 1जुलाई) से शुरू हो गया है, जो आगामी 13 अगस्त तक चलेगा। सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं की सराहना करते हुए विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर परोक्ष रूप से तीखा तंज कसा। पीएम मोदी ने कहा कि वह अंतरिक्ष क्षेत्र में तिरंगा फहराने वाले स्टार्टअप ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ की सफलता के पीछे खड़े “28 वर्षीय युवाओं” की बात कर रहे हैं, न कि किसी “56 साल के युवा” की। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि देश के कल्याण के लिए मानसून और संसद का यह मानसून सत्र दोनों ही बेहद उत्पादक साबित होंगे।
स्काईरूट एयरोस्पेस की ऐतिहासिक सफलता और पीएम का तंज
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत के युवाओं द्वारा हासिल की गई बड़ी उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने बताया कि ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ के ‘विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1’ ने सफलतापूर्वक कक्षा में प्रवेश कर इतिहास रच दिया है। यह भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट है। ‘मिशन आगमन’ के तहत सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किए गए इस 24 मीटर लंबे रॉकेट ने अपने पेलोड को लगभग 450 किलोमीटर की कक्षा में स्थापित किया। इसके साथ ही भारत निजी ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता रखने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है।
पीएम मोदी ने कहा, “इस स्टार्टअप में काम करने वाले लोगों की औसत आयु केवल 28 वर्ष है। ऐसे युवाओं ने यह कर दिखाया है। मैं किसी 56 साल के ‘युवा’ की बात नहीं कर रहा हूं, बल्कि देश के इन 28 साल के युवाओं की बात कर रहे हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में भारत का झंडा गाड़ दिया है।”
लोकसभा में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक होगा पेश
सत्र के पहले दिन लोकसभा की कार्यसूची के अनुसार, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ‘उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026’ को पेश करने की अनुमति मांगेंगे। यह विधेयक सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में और संशोधन करने के लिए लाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए अध्यादेश को कानून का रूप देना है।
इसके अलावा, सदन की शुरुआत में पूर्व सांसदों- नादेंडला भास्कर राव, ओमवती देवी, सुधांशु सील, मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त), केपी धनपालन, प्यारे लाल शंखवार और कतर के ‘फादर अमीर’ शेख हमद बिन खलीफा अल-थानी के निधन पर शोक व्यक्त किया जाएगा। इसके बाद प्रश्नकाल होगा और विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े दस्तावेज पटल पर रखे जाएंगे।
राज्यसभा में ‘वंदे मातरम्’ बिल और गृह मंत्री अमित शाह की तैयारी
सत्र के पहले दिन राज्यसभा में भी भारी विधायी कामकाज सूचीबद्ध है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ में संशोधन करने के लिए एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगे। इस प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने को एक गंभीर आपराधिक अपराध बनाना है।
इसके साथ ही, उच्च सदन में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के लिए केंद्रीय सलाहकार समिति में एक सदस्य के चुनाव और कुछ अन्य संयुक्त समितियों में सदस्यों की नियुक्ति के प्रस्ताव भी पेश किए जाएंगे। सदन के पटल पर पिछले सत्र में पारित विधेयकों का विवरण और आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 की प्रतियां भी रखी जाएंगी।
नीट (NEET) और राम मंदिर चढ़ावे के मुद्दे पर विपक्ष का आक्रामक रुख
एक तरफ जहां सरकार नए विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष ने सरकार को चौतरफा घेरने के लिए कमर कस ली है। विपक्ष इस सत्र में मुख्य रूप से नीट-यूजी (NEET-UG 2026) पेपर लीक मामला और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे (दान) की कथित चोरी के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने नीट पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए राज्यसभा में नियम 267 के तहत कामकाज निलंबित करने का नोटिस दिया है। दूसरी ओर, कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं पर चर्चा की मांग को लेकर स्थगन प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है।
इस बार का मानसून सत्र सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का गवाह बनेगा। साथ ही, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों द्वारा गठित ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) भी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी के रूप में सदन में अपनी संसदीय पारी की शुरुआत कर रही है, जिससे सदन का संख्या बल और राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुका है।