हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी ने राजस्थान को पानी का हिस्सा देने पर सहमति जताई। रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं में आएगी तेजी।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च-स्तरीय बैठक में जल संसाधनों को लेकर बड़े फैसले लिए गए हैं। इस बैठक में हरियाणा और राजस्थान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर दशकों पुराने विवाद का समाधान निकालते हुए सहमति बनी है। मुख्यमंत्री सैनी ने घोषणा की है कि 1994 के ‘अपर यमुना रिवर बोर्ड’ समझौते के तहत राजस्थान को उसका हक का पानी दिया जाएगा और इस संबंध में आगामी सोमवार को एक औपचारिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
“परियोजनाओं में आएगी तेजी: रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध”
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री @CRPaatil की अध्यक्षता में हरियाणा और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में जल संसाधन, सिंचाई एवं पेयजल से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने बताया कि 1994 के अपर यमुना रिवर बोर्ड समझौते के… pic.twitter.com/8hkKQfR2Cr
— DPR Haryana (@DiprHaryana) June 23, 2026
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि बैठक में अंतर-राज्यीय जल परियोजनाओं को गति देने पर विशेष जोर दिया गया है। रेणुका, किशाऊ और लखवार बांध परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर दोनों राज्यों ने अपनी सहमति जताई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, बल्कि सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति भी सुगम हो जाएगी।
“घग्घर नहर और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस”
बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री ने घग्घर नहर में प्रवाहित होने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, नदियों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नदियों में अनट्रेटेड (बिना उपचारित) सीवरेज का पानी छोड़ना पूरी तरह बंद किया जाएगा, ताकि जल स्रोतों को प्रदूषित होने से बचाया जा सके।
सुशासन की ओर एक और कदम
इस बैठक को राज्य के जल प्रबंधन के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है। सीएम नायब सैनी ने कहा कि केंद्र सरकार के सहयोग से हरियाणा जल संसाधनों के कुशल प्रबंधन और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इन निर्णयों से हरियाणा और राजस्थान के लाखों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और भविष्य की जल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।