Monsoon Health Tips: बारिश में घर की सीलन और मिट्टी जैसी बदबू छिपी नमी व फफूंद का संकेत हो सकती है। जानें mould exposure से फेफड़ों पर क्या असर पड़ सकता है।
मानसून के मौसम में बारिश के साथ घर के अंदर नमी बढ़ना आम बात है। कई बार बेडरूम, अलमारी, लिविंग रूम या दीवारों के आसपास से आने वाली सीलन और मिट्टी जैसी बदबू को लोग मौसम का सामान्य असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लगातार बनी रहने वाली ऐसी गंध घर में छिपी नमी और फफूंद यानी mould की शुरुआती निशानी हो सकती है। अगर समय रहते इसका समाधान न किया जाए, तो फफूंद घर की दीवारों, फर्नीचर, पर्दों और कपड़ों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO के अनुसार, नम और फफूंद वाले वातावरण में रहने से सांस संबंधी लक्षण, एलर्जी, अस्थमा और कुछ श्वसन संक्रमणों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए बारिश के मौसम में घर की सीलन को केवल बदबू की समस्या मानना सही नहीं है।
सीलन वाली बदबू क्यों आती है?
जब बारिश के मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है, तो घर के ऐसे हिस्से जहां हवा का आवागमन कम होता है, वहां moisture जमा होने लगता है। दीवारों के पीछे, फर्नीचर के नीचे, अलमारी के कोनों, पर्दों, गद्दों और कालीनों में लंबे समय तक नमी रहने पर mould के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। फफूंद बढ़ने पर एक खास तरह की damp या musty smell आने लगती है। कई लोग इस गंध को खत्म करने के लिए एयर फ्रेशनर का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इससे समस्या का मूल कारण दूर नहीं होता। एयर फ्रेशनर कुछ समय के लिए गंध को ढक सकता है, लेकिन अगर नमी और mould मौजूद है तो बदबू दोबारा लौट सकती है।
मानसून में बढ़ जाता है mould का खतरा
घर के अंदर सामान्य humidity को लेकर अलग-अलग परिस्थितियों में अलग सलाह हो सकती है, लेकिन बहुत अधिक नमी mould के विकास को बढ़ावा देती है। मानसून के दौरान जब घर की खिड़कियां लंबे समय तक बंद रहती हैं और बाहर भी वातावरण नम रहता है, तो कमरे के भीतर moisture जमा हो सकता है। दीवारों पर काले या हरे धब्बे, पेंट का फूलना, कपड़ों में बासी गंध और लकड़ी के फर्नीचर पर फफूंद जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर उन कमरों में जहां धूप और ventilation कम हो, वहां समस्या तेजी से बढ़ सकती है।
मोल्ड फेफड़ों को कैसे प्रभावित करता है?
नम और mould वाले वातावरण में सांस लेने का मतलब है कि हवा में मौजूद सूक्ष्म mould spores शरीर के अंदर जा सकते हैं। स्वस्थ व्यक्ति का immune system आमतौर पर रोजमर्रा में मिलने वाले कई कणों से निपट सकता है, लेकिन लंबे समय तक या अधिक मात्रा में exposure कुछ लोगों में सांस की नली में irritation और inflammation पैदा कर सकता है। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य मौसमी एलर्जी जैसे लग सकते हैं। छींक आना, आंखों में पानी, गले में खराश या लगातार गले में कुछ अटका हुआ महसूस होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं।
समय के साथ कुछ लोगों में लगातार खांसी, सीने में जकड़न, सांस लेने में परेशानी और wheezing जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। ऐसे लक्षण खास तौर पर उन लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं जिन्हें पहले से asthma या COPD जैसी respiratory conditions हैं। इनके लिए mould exposure सांस से जुड़ी समस्या को बढ़ा सकता है और flare-up की स्थिति पैदा कर सकता है।
एलर्जी और अस्थमा वालों को ज्यादा सावधानी
मोल्ड के प्रति संवेदनशील लोगों में allergic reactions हो सकती हैं। नमी और फफूंद वाले कमरे में लंबे समय तक रहने पर नाक बंद होना, छींक, आंखों में खुजली या पानी आना और खांसी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अस्थमा से पीड़ित लोगों में mould spores airway irritation को बढ़ाकर wheezing और सांस फूलने जैसी समस्या को trigger कर सकते हैं। इसलिए अगर किसी कमरे में जाने के बाद बार-बार सांस संबंधी लक्षण बढ़ते हैं और दूसरे स्थान पर जाने से राहत मिलती है, तो indoor air quality और mould exposure पर ध्यान देना जरूरी है।
लंबे समय तक exposure को लेकर क्या कहती है रिसर्च?
नमी और mould exposure को लेकर कई शोध किए गए हैं। Espoo Cohort Study सहित कुछ अध्ययनों में लंबे समय तक residential dampness और mould exposure तथा respiratory problems के बीच संबंध की जांच की गई है। वहीं, clinical reviews में prolonged exposure को airway inflammation, chronic cough और asthma के बिगड़ने जैसी समस्याओं से जोड़ा गया है। हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव समान नहीं होता और किसी भी विशेष बीमारी का कारण केवल mould exposure को मान लेना उचित नहीं होगा। जोखिम व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, exposure की अवधि और अन्य environmental factors पर निर्भर कर सकता है।
घर की सीलन को कैसे कम करें?
सबसे जरूरी कदम है नमी के स्रोत को पहचानना। दीवारों में leakage, पाइप से पानी का रिसाव, छत से सीपेज या कमरे में पर्याप्त ventilation न होना समस्या की वजह हो सकता है। प्रभावित हिस्सों को जल्द से जल्द सुखाना चाहिए और जहां visible mould हो, वहां उसकी सुरक्षित सफाई करानी चाहिए। कपड़े, पर्दे और अन्य washable सामान को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है। कमरे में हवा का प्रवाह बनाए रखें और संभव हो तो sunlight आने दें। जरूरत पड़ने पर dehumidifier का इस्तेमाल भी indoor humidity नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
बदबू को सिर्फ एयर फ्रेशनर से न छिपाएं
बारिश के मौसम में अगर घर में लगातार मिट्टी या सीलन जैसी गंध आ रही है, तो इसे केवल fragrance से ढकने के बजाय उसके स्रोत की जांच करना बेहतर है। यदि घर में mould दिखाई दे रहा है या परिवार के किसी सदस्य को लगातार खांसी, सांस फूलना, wheezing या एलर्जी जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो समस्या को नजरअंदाज न करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें। खासकर asthma या अन्य respiratory समस्या वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। घर की साफ-सफाई के साथ-साथ उसकी हवा की गुणवत्ता और नमी को नियंत्रित रखना भी स्वस्थ रहने का महत्वपूर्ण हिस्सा है।