Table of Contents
मथुरा-वृंदावन में 4 सितंबर 2026 को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का भव्य उत्सव मनाया जाएगा। जानें जन्मभूमि और बांकेबिहारी मंदिर में जन्मोत्सव की खास तैयारियां।
जन्माष्टमी का पर्व दो स्थानों पर मनाया जाता है: भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा और उनकी लीलास्थली वृंदावन। इस अवसर पर देश भर से लाखों लोग कान्हा के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए ब्रजभूमि आते हैं। 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य उत्सव 4 सितंबर को मथुरा में मनाया जाएगा। जन्मोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर से लेकर वृंदावन के श्रीबांकेबिहारी मंदिर तक। मंदिरों में पूजा, अभिषेक, भोग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विशेष सजावट की तैयारी चल रही है।
4 सितंबर को मथुरा में जन्मोत्सव मनाया जाएगा
शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का 5253वां जन्मोत्सव 4 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर मनाया जाएगा। मंदिर के आसपास विशेष सजावट की गई है, और करीब 200 किलोग्राम चांदी से गर्भगृह को सजाया गया है। ठाकुर गोपालजी का जन्म महाभिषेक, जो हाल ही में बनाया गया है, एक प्रमुख आकर्षण होगा। सुबह मंगला आरती के बाद पंचामृत अभिषेक किया जाएगा, और रात में जन्म महाभिषेक किया जाएगा। मध्यरात्रि दोपहर बारह बजे भगवान के प्राकट्य दर्शन और आरती का विशेष कार्यक्रम होगा।
आधी रात को कान्हा का महाभिषेक होगा।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की रात 12 बजे का समय विशेष है। इसी समय भगवान का जन्म मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में विशेष पूजा और अभिषेक किया जाता है। मध्यरात्रि के समय श्रीकृष्ण जन्मभूमि में प्राकट्य दर्शन और आरती के बाद विशिष्ट अभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालुओं को इसके बाद भगवान का श्रृंगार कर दर्शन कराया जाएगा।
बांकेबिहारी मंदिर में तीन दिन का कार्यक्रम
जन्माष्टमी को लेकर वृंदावन के प्रसिद्ध श्रीबांकेबिहारी मंदिर में भी खास तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर में जन्माष्टमी महोत्सव तीन दिनों तक चलेगा। 4 सितम्बर की रात 12 बजे ठाकुर बांकेबिहारी का दिव्य महाभिषेक होगा। यज्ञ में दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, यमुना जल, गुलाब जल, केवड़ा, जड़ी-बूटी और अन्य सामग्री शामिल होंगे। ठाकुरजी को इसके बाद पाग-पंजीरी, फल, मेवा और दूध से बने मिष्ठान का भोग लगाया जाएगा। जन्माभिषेक परंपरागत रूप से गर्भगृह में पर्दे की ओट में होगा।
मंगला आरती पर भी विशेष उत्साह
जन्माष्टमी के अगले चरण में बांकेबिहारी मंदिर की मंगला आरती बहुत महत्वपूर्ण है। यह आरती साल में एक बार होती है और इसे देखने के लिए बहुत से लोग आते हैं। 4 और 5 सितंबर की मध्यरात्रि को इस बार एक विशेष मंगला आरती होगी। मंदिर प्रशासन और प्रबंधन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन और प्रवेश व्यवस्था को नियंत्रित करने की योजना बनाई है।
मंदिरों में भोग और सजावट की तैयारी
जन्माष्टमी से पहले ही मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में साफ-सफाई और सजावट की प्रक्रिया तेज हो गई है। फूलों, रंग-बिरंगी रोशनी और आकर्षक सजावटी वस्तुओं ने मंदिरों को सजाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के लिए खास कपड़े और आभूषण बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा, पंचामृत अभिषेक और भोग के लिए दूध, दही, घी, शहद, शक्कर, फल, मेवा और अन्य सामग्री की व्यवस्था की जाती है। बांकेबिहारी मंदिर में पाग-पंजीरी और अन्य मिष्ठान बनाए जाएंगे।
5 सितंबर को नंदगांव में जन्माष्टमी
ब्रज क्षेत्र के नंदगांव में जन्माष्टमी का उत्सव मथुरा से अलग दिन होगा। 5 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और 6 सितंबर को नंदोत्सव नंदभवन में मनाए जाएंगे। यहां जन्माष्टमी से पहले ही पुराने समाज ने गायन और बधाइयों का दौर शुरू किया था। कृष्ण जन्मोत्सव की तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं का नंदगांव की गलियों और मंदिरों में भी आना शुरू हो गया है।
श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है
प्रशासन ने जन्माष्टमी पर मथुरा-वृंदावन में भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात प्रणाली को मजबूत किया है। योजना भीड़ प्रबंधन के लिए मथुरा और वृंदावन को सात क्षेत्रों और ३५ सेक्टरों में बांटा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस, पीएसी और आरएएफ की तैनाती के साथ सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। जब भीड़ अधिक होती है, तो श्रद्धालुओं को होल्डिंग एरिया में रोककर मंदिर क्षेत्र की ओर भेजा जाता है।
यातायात में भी बदलाव
यातायात पुलिस ने भी जन्माष्टमी पर आने वाले लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए विशेष योजना बनाई है। 3 से 5 सितंबर के बीच, बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाएगा और कई मार्गों पर वाहनों का आवागमन नियंत्रित किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए पार्किंग स्थानों की व्यवस्था की गई है। शासन ने लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित पार्किंग स्थलों का इस्तेमाल करें और यातायात डायवर्जन का पालन करें।
4 सितंबर को, मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर समेत कई मंदिरों में आधी रात को कान्हा के जन्म का उत्सव मनाया जाएगा। 5 सितंबर को जन्माष्टमी और 6 सितंबर को नंदोत्सव ब्रज के नंदगांव में मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के नजदीक आते ही पूरा ब्रज कृष्ण भक्ति में रंग गया है, और मंदिरों से लेकर गलियों तक कान्हा के स्वागत की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।