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मल्लिकार्जुन खरगे के पीएम मोदी, अमित शाह और मुख्यमंत्रियों को ‘अवैध’ बताने वाले बयान पर बीजेपी ने हमला बोला है। BJP ने जनादेश का अपमान करने पर खरगे से माफी की मांग की।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ‘अवैध’ बताए जाने वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा पलटवार किया है। बीजेपी ने खरगे पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के जनादेश का अपमान करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कांग्रेस अध्यक्ष से अपने बयान के लिए माफी मांगने की मांग की है। दरअसल, मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को कर्नाटक के कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान देश में हुए चुनावों को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग कर नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की। खरगे ने यह भी कहा कि अगर दोबारा चुनाव होते हैं तो उन्हें बैलेट पेपर के जरिए कराया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और बीजेपी ने इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा मतदाताओं के फैसले पर सवाल उठाने वाला बयान बताया है।
खरगे ने चुनावों को बताया अवैध
कलबुर्गी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मौजूदा चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि देश में हुए सभी चुनाव अवैध थे। इसी क्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी ‘अवैध’ बताया। खरगे ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग करने की मांग करते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की बात कही। कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक मौजूदा चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं और ऐसी स्थिति में जनता के सामने नए सिरे से जाने की जरूरत है। उन्होंने दोबारा चुनाव होने की स्थिति में बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी रखी।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
मल्लिकार्जुन खरगे लंबे समय से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सामने रखते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने चुनावों को बैलेट पेपर के जरिए कराने की मांग की। उनका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच भरोसा बनाए रखना जरूरी है। कांग्रेस और विपक्ष के कुछ अन्य नेता समय-समय पर चुनाव प्रक्रिया और EVM को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग लगातार चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निर्धारित नियमों के तहत मतदान व्यवस्था के इस्तेमाल का बचाव करता रहा है। ऐसे में खरगे के ताजा बयान ने एक बार फिर चुनाव सुधार और मतदान प्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है।
BJP ने कहा- जनादेश का अपमान कर रहे खरगे
खरगे के बयान पर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की है। बीजेपी का कहना है कि देश की जनता चुनावों के माध्यम से अपनी सरकार चुनती है और निर्वाचित प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री तथा जनप्रतिनिधियों को ‘अवैध’ बताना सीधे तौर पर जनता के जनादेश का अपमान है। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर किसी राजनीतिक दल को चुनाव परिणाम या चुनाव प्रक्रिया पर आपत्ति है, तो उसके लिए संवैधानिक और कानूनी रास्ते मौजूद हैं। बीजेपी के मुताबिक चुनावों से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के बजाय संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
लोकसभा और विधानसभाओं को भंग करने की मांग पर विवाद
कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं को भंग करने की मांग को लेकर भी बीजेपी ने सवाल उठाए हैं। देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत होते हैं और निर्वाचित सरकारों को उनका निर्धारित कार्यकाल पूरा करने का अधिकार होता है, जब तक कि संवैधानिक परिस्थितियों में अलग निर्णय न लिया जाए। ऐसे में खरगे की मांग को बीजेपी ने राजनीतिक रूप से अस्थिरता पैदा करने वाला बयान बताया है। दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि अगर चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो जनता के बीच जाकर नए सिरे से जनादेश लिया जाना चाहिए।
CEC ज्ञानेश कुमार पर भी हमलावर हैं खरगे
मल्लिकार्जुन खरगे पिछले कुछ दिनों से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी लगातार सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। कांग्रेस की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं। विशेष रूप से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। खरगे का ताजा बयान भी इसी व्यापक राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि में आया है।
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बढ़ी तकरार
SIR और मतदाता सूची को लेकर विपक्ष तथा चुनाव आयोग के बीच पहले से ही टकराव की स्थिति बनी हुई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव और नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है। वहीं चुनाव आयोग इन आरोपों को खारिज करते हुए चुनावी प्रक्रिया को नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप संचालित करने की बात कहता है। इसी विवाद के बीच खरगे द्वारा चुनावों को ‘अवैध’ बताने और नए चुनाव कराने की मांग करने से राजनीतिक बहस और तीखी हो गई है।
जनादेश और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर केंद्रित हुई बहस
खरगे के बयान के बाद अब बहस केवल EVM या चुनाव प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जनादेश और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका तक पहुंच गई है। बीजेपी जहां खरगे के बयान को जनता के फैसले का अपमान बता रही है, वहीं कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता की मांग को सही ठहरा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल बीजेपी ने कांग्रेस अध्यक्ष से अपने बयान पर माफी मांगने को कहा है, जबकि खरगे की चुनाव प्रक्रिया को लेकर आपत्तियां राजनीतिक विमर्श का प्रमुख मुद्दा बनी हुई हैं।