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फॉर्मूला-ई रेस मामले में बीआरएस नेता केटी रामाराव ने आरोपों से मुक्त करने की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की है। अदालत ने एसीबी को नोटिस जारी कर 30 अक्टूबर को सुनवाई तय की।
तेलंगाना की राजनीति से जुड़े फॉर्मूला-ई रेस मामले में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव ने अदालत का रुख किया है। उन्होंने इस मामले में खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए डिस्चार्ज याचिका दायर की है। केटी रामाराव इस मामले में मुख्य आरोपी हैं और उन पर पिछली बीआरएस सरकार के कार्यकाल के दौरान फॉर्मूला-ई रेस के आयोजन से संबंधित भुगतान में कथित अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। रामाराव की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई ठोस साक्ष्य नहीं है और सरकारी धन के दुरुपयोग का भी कोई मामला नहीं बनता। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए शहर की अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 अक्टूबर की तारीख तय की है। इस घटनाक्रम से तेलंगाना में फॉर्मूला-ई रेस से जुड़ा कानूनी मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
क्या है केटी रामाराव की डिस्चार्ज याचिका?
बीआरएस नेता केटी रामाराव ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के संबंधित प्रावधानों के तहत अदालत में याचिका दाखिल कर उन्हें मामले से मुक्त करने की मांग की है। उनके वकील जे. लक्ष्मण ने सोमवार को बताया कि याचिका में कई आधार प्रस्तुत किए गए हैं। बचाव पक्ष का तर्क है कि रामाराव के खिलाफ ऐसा कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता, जिसके आधार पर मुकदमा आगे बढ़ाया जाना चाहिए। याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप उचित नहीं है। अदालत ने याचिका पर एसीबी से जवाब मांगा है और सुनवाई की अगली तारीख 30 अक्टूबर निर्धारित की है। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और जांच एजेंसी का पक्ष महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, याचिका दायर होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया है। इस पर अंतिम निर्णय अदालत की सुनवाई और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होगा।
दिसंबर 2024 में दर्ज हुआ था मामला
तेलंगाना के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दिसंबर 2024 में फॉर्मूला-ई रेस से संबंधित कथित अनियमितताओं को लेकर मामला दर्ज किया था। इस मामले में तत्कालीन मंत्री केटी रामाराव के अलावा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरविंद कुमार, हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के पूर्व मुख्य अभियंता बी.एल.एन. रेड्डी और अन्य लोगों के नाम शामिल किए गए। जांच एजेंसी ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप लगाए। इनमें आपराधिक गबन और साजिश से संबंधित आरोप भी शामिल हैं। एसीबी ने मार्च 2026 में केटी रामाराव और अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किया था। इसके बाद अदालत के निर्देशों के अनुसार रामाराव और मामले के अन्य आरोपी हाल ही में न्यायालय में पेश हुए थे। अब रामाराव ने डिस्चार्ज याचिका के जरिए आरोपों से मुक्त किए जाने की मांग की है।
करीब 55 करोड़ रुपये के भुगतान की जांच
फॉर्मूला-ई रेस मामले की जांच का मुख्य केंद्र लगभग 55 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़ा है। आरोप है कि पिछली बीआरएस सरकार के दौरान वर्ष 2024 में प्रस्तावित रेस के आयोजन के लिए यह राशि निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किए बिना जारी की गई थी। बताया गया है कि भुगतान का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्रा में किया गया था। एसीबी इसी बात की जांच कर रही है कि भुगतान किस प्रक्रिया के तहत किया गया, संबंधित अधिकारियों की क्या भूमिका थी और क्या निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ। जांच एजेंसी ने इन लेन-देन को कथित वित्तीय अनियमितताओं से जोड़ते हुए मामला दर्ज किया था। वहीं, केटी रामाराव इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना है कि आयोजन के लिए राशि हस्तांतरित करने का फैसला हैदराबाद की अंतरराष्ट्रीय छवि को मजबूत करने और शहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से लिया गया था। उन्होंने किसी भी तरह के भ्रष्टाचार से इनकार किया है।
2023 में हुई थी पहली रेस, दूसरी रेस हुई रद्द
हैदराबाद में फॉर्मूला-ई रेस का पहला आयोजन फरवरी 2023 में हुआ था। इस आयोजन का उद्देश्य शहर को अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट्स के नक्शे पर स्थापित करना और वैश्विक स्तर पर इसकी पहचान को बढ़ावा देना था। इसके बाद वर्ष 2024 में रेस का दूसरा संस्करण आयोजित करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, दिसंबर 2023 में कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद 2024 के लिए निर्धारित दूसरा आयोजन रद्द कर दिया गया। इसी आयोजन की तैयारियों और उससे संबंधित वित्तीय लेन-देन को लेकर बाद में विवाद सामने आया। एसीबी की जांच में भुगतान की प्रक्रिया और सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई। इस मामले ने राज्य की राजनीति में भी काफी ध्यान आकर्षित किया, क्योंकि इसमें पिछली सरकार के एक प्रमुख नेता और वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है।
केटी रामाराव ने आरोपों को किया खारिज
केटी रामाराव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को लगातार गलत बताया है। उनका कहना है कि फॉर्मूला-ई रेस के आयोजकों को राशि भेजने का निर्णय हैदराबाद की छवि और प्रतिष्ठा को बढ़ावा देने के लिए लिया गया था। उन्होंने दावा किया था कि सरकार की ओर से भेजा गया पैसा आयोजकों के पास ही मौजूद है और इस मामले में भ्रष्टाचार नहीं हुआ। बचाव पक्ष की डिस्चार्ज याचिका भी इसी दलील पर आधारित है कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं हैं। दूसरी ओर, एसीबी ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया है और अब अदालत में मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।
30 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
फॉर्मूला-ई रेस मामले में अब 30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत में एसीबी का जवाब और बचाव पक्ष की दलीलें आगे की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। केटी रामाराव की याचिका पर अदालत क्या रुख अपनाती है, यह सुनवाई के दौरान स्पष्ट होगा। फिलहाल, उनके खिलाफ लगे आरोपों और बचाव पक्ष के तर्कों पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना बाकी है। ऐसे में मामले को लेकर आगे होने वाली सुनवाई और अदालत की टिप्पणियों पर राजनीतिक तथा कानूनी दोनों ही क्षेत्रों की नजर बनी हुई है।