केजरीवाल का कांग्रेस पर बड़ा हमला: पंजाब में बेअदबी और मोगा ब्लास्ट पर न्याय की मांग, ‘बेअदबी पार्टी’ का लगाया आरोप

केजरीवाल का कांग्रेस पर बड़ा हमला: पंजाब में बेअदबी और मोगा ब्लास्ट पर न्याय की मांग, 'बेअदबी पार्टी' का लगाया आरोप

 

अरविंद केजरीवाल ने पंजाब में बेअदबी और मोगा ब्लास्ट पीड़ितों को न्याय न मिलने पर कांग्रेस को घेरा। पूछा- दोषियों को आखिर कौन बचा रहा है?

चंडीगढ़: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर बेअदबी और नशीले पदार्थों (चिट्टा) का मुद्दा गरमा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के पूर्ववर्ती शासन और विपक्ष पर निशाना साधते हुए राज्य में न्याय की कमी पर तीखे सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि वे इन संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साधकर दोषियों को बचाने का काम कर रहे हैं।

न्याय का वादा, लेकिन सन्नाटा क्यों?

केजरीवाल ने याद दिलाया कि दिसंबर 2021 में पंजाब की जनता को न्याय का भरोसा दिया गया था। उन्होंने सवाल किया कि चार साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी 2015 के बेअदबी (Sacrilege) मामलों और मोगा बम विस्फोट के दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

केजरीवाल ने कहा, “पंजाब की जनता आज भी पूछ रही है कि बरगाड़ी बेअदबी कांड और मोगा ब्लास्ट के पीड़ित परिवारों को न्याय कब मिलेगा? आखिर किसे बचाया जा रहा है? वोट मांगते समय न्याय की बड़ी-बड़ी गारंटी दी गई थी, लेकिन आज न तो न्याय मिला और न ही कोई जवाब।”

कांग्रेस और विपक्ष पर ‘सांठगांठ’ का आरोप

अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि वह अब ‘ईडी पार्टी’ और ‘बेअदबी/चिट्टा पार्टी’ के बचाव में खुलकर सामने आ गई है। केजरीवाल ने हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा, “कांग्रेस को मेरे द्वारा ईडी पार्टी, बेअदबी पार्टी और चिट्टा पार्टी के खिलाफ बोलने पर इतनी तकलीफ क्यों हो रही है? ऐसा लगता है कि वे परोक्ष रूप से इन ताकतों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केजरीवाल का यह बयान पंजाब में AAP की ‘ईमानदार राजनीति’ की छवि को पुनर्जीवित करने और विपक्षी दलों को एक ही मंच पर लाने की कोशिश है।

क्या हैं केजरीवाल के प्रमुख सवाल?

  • 4.5 साल का अंतराल: इतने वर्षों बाद भी दोषियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
  • पीड़ितों का हक: पीड़ित परिवारों को न्याय कब मिलेगा?
  • राजनीतिक मिलीभगत: कांग्रेस और अन्य दल इन मुद्दों पर बचाव की मुद्रा में क्यों हैं?
  • चुनावी गारंटी: सत्ता के लिए किए गए वादों का क्या हुआ?

केजरीवाल का यह आक्रामक रुख पंजाब में आगामी राजनीतिक गतिविधियों को एक नई दिशा दे रहा है। जहां एक ओर AAP इसे ‘न्याय बनाम राजनीति’ के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने की कवायद बता रहे हैं। पंजाब की जनता अब इस उम्मीद में है कि क्या वाकई इन पुराने जख्मों पर न्याय का मरहम लगेगा या फिर यह मुद्दा केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप बनकर रह जाएगा।

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