हरियाणा कैबिनेट के बड़े फैसले: मीट लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म, शामलात भूमि और महिला आयोग पर अहम निर्णय

हरियाणा कैबिनेट के बड़े फैसले: मीट लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म, शामलात भूमि और महिला आयोग पर अहम निर्णय

 

हरियाणा कैबिनेट ने मीट दुकानों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता खत्म की। शामलात भूमि पर मकान मालिकों को राहत और महिला आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ाई।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई हरियाणा कैबिनेट की बैठक में राज्य के विकास और आम नागरिकों को सहूलियत देने के लिए कई महत्वपूर्ण अध्यादेशों और नियमों को मंजूरी दी गई है। इन निर्णयों का मुख्य उद्देश्य सुशासन, व्यापार में सरलता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।

बागवानी और नर्सरी के लिए नए मानक

राज्य में बागवानी क्षेत्र को व्यवस्थित करने के लिए ‘हरियाणा हॉर्टिकल्चर नर्सरी रूल्स, 2026’ को मंजूरी दी गई है। इसके अंतर्गत नर्सरी के लिए न्यूनतम गुणवत्ता मानक तय किए गए हैं, ताकि किसानों और बागवानों को बेहतर पौधे मिल सकें। साथ ही, रिकॉर्ड प्रबंधन को पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल प्रणाली लागू की जाएगी।

मीट व्यापारियों को बड़ी राहत

सरकार ने ‘हरियाणा नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ को मंजूरी देते हुए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब स्लाटर हाउस (वधशाला) और मीट की दुकानें चलाने वाले व्यापारियों को नगर निगम या नगर परिषद से अलग से व्यापार लाइसेंस (Trade License) लेने की जरूरत नहीं होगी, जिससे उन्हें अनावश्यक कागजी कार्यवाही से मुक्ति मिलेगी।

शामलात भूमि पर मकानों को मालिकाना हक

‘हरियाणा ग्राम शामलात भूमि विनियमन अध्यादेश, 2026’ के जरिए उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जो वर्षों से अपनी जमीन पर रह रहे हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक को अब उन पात्र आवेदकों को शामलात देह भूमि बेचने की अनुमति देने का अधिकार होगा, जिन्होंने 31 मार्च, 2004 या उससे पहले उस भूमि पर अपने घर बना लिए थे। इससे इन परिवारों को लंबे समय से प्रतीक्षित मालिकाना हक मिल सकेगा।

महिला आयोग का विस्तार और सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कैबिनेट ने ‘हरियाणा राज्य महिला आयोग (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ को मंजूरी दी है। इसके तहत ‘हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012’ में संशोधन किया गया है, जिसके अनुसार आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 कर दी गई है। इस विस्तार से आयोग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और वे राज्य में महिला अधिकारों से जुड़े मुद्दों को अधिक मजबूती और प्रभावशीलता के साथ उठा सकेंगी।

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