Table of Contents
कर्नाटक के विजयपुरा में श्री पवाडा बसवेश्वर मंदिर से चोरों ने 32 किलो चांदी की मूर्ति और 1.20 करोड़ रुपये के आभूषण उड़ाए। CCTV कैमरे बंद मिलने से गहराया शक।
कर्नाटक के विजयपुरा ज़िले के मुद्देबिहाल तालुक के बसराकोड गांव में स्थित ऐतिहासिक व अत्यंत प्रतिष्ठित श्री पवाडा बसवेश्वर मंदिर में एक बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया है। 5 जुलाई और 6 जुलाई की मध्यरात्रि को शातिर चोरों ने मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान बसवेश्वर की 32 किलो वजनी बेहद खूबसूरत चांदी की मूर्ति सहित 60 किलो से अधिक चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान चुरा लिए। चोरी की गई भगवान बसवेश्वर की मुख्य मूर्ति की कीमत ही लगभग 51.20 लाख रुपये आंकी गई है, जबकि मंदिर से गायब हुए कुल चांदी के आभूषणों और बर्तनों का बाजार मूल्य 1.20 करोड़ रुपये से अधिक बताया जा रहा है। यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दूर-दूर के श्रद्धालुओं के लिए अगाध श्रद्धा और आस्था का एक मुख्य केंद्र है।
देर रात ताले तोड़कर वारदात को दिया अंजाम
मंदिर समिति के अध्यक्ष, 70 वर्षीय करनंदप्पा बिरदार द्वारा दर्ज कराई गई आधिकारिक शिकायत के अनुसार, इस शर्मनाक घटना का खुलासा 6 जुलाई की सुबह करीब 4 बजे हुआ। मंदिर परिसर में ही रहने वाले एक पुजारी, साधु शंकरलिंग ने जब सुबह उठकर देखा, तो उनके होश उड़ गए। मंदिर के मुख्य गर्भगृह और सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के दरवाजों के ताले टूटे हुए थे और किवाड़ खुले पड़े थे। जब वे अंदर गए तो देखा कि भगवान श्री पवाडा बसवेश्वर की पवित्र मूर्ति अपने आसन से पूरी तरह गायब थी। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि 5 जुलाई की रात करीब 9 बजे मंदिर के नियमित पुजारी शरणय्या सलीमत ने शाम की महाआरती और पूजा संपन्न की थी। उसके बाद उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए अंदर और बाहर के सभी मजबूत लोहे के दरवाज़ों पर ताला लगाया था। आशंका जताई जा रही है कि चोरों ने रात 9 बजे से सुबह 4:30 बजे के बीच के सन्नाटे का फायदा उठाकर इस पूरी लूट को अंजाम दिया।
संतों की मौजूदगी और CCTV का बंद होना खड़ा करता है बड़ा सवाल
इस चोरी ने सुरक्षा व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस वक्त यह वारदात हुई, उस समय मंदिर परिसर के भीतर ही कई संत, संन्यासी और सेवादार सो रहे थे। इसके बावजूद चोरों ने इतनी बड़ी और भारी-भरकम मूर्ति को बिना किसी आहट के वहां से पार कर दिया। संदेह का घेरा तब और गहरा हो गया जब पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि घटना के समय मंदिर में लगे सभी सीसीटीवी (CCTV) कैमरे पूरी तरह से बंद थे। कैमरों का चालू न होना इस बात की ओर साफ इशारा करता है कि चोरों को मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, कैमरों की स्थिति और भौगोलिक बनावट की पहले से पूरी जानकारी थी। यह किसी आंतरिक संलिप्तता या एक बेहद सोची-समझी रेकी (Pre-planned conspiracy) का परिणाम लग रहा है, जिसके कारण चोर बिना किसी डर के वारदात को अंजाम देने में सफल रहे।
ग्रामीणों की बैठक के बाद FIR और पुलिस की सख्त कार्रवाई
चोरी की इतनी बड़ी घटना के बाद भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में थोड़ी देरी हुई। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने तुरंत पुलिस के पास जाने के बजाय पहले बसराकोड गांव के वरिष्ठ नागरिकों और ग्रामीणों के साथ एक आपातकालीन बैठक की। पूरे मामले पर गहन चर्चा करने के बाद ही पुलिस को सूचित किया गया। घटना की सूचना मिलते ही मुद्देबिहाल पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ अधिकारी, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड की टीम ने तुरंत मौके का दौरा किया और साक्ष्य जुटाए।
पुलिस ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की प्रासंगिक धाराओं 305(d) (पूजा स्थलों या निवास स्थानों में चोरी) और 331(4) (रात के समय अनधिकृत रूप से घर या परिसर में प्रवेश) के तहत एक अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। मुद्देबिहाल पुलिस के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल मामले को सुलझाने और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए कई विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया है, जो संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। ग्रामीण और श्रद्धालु जल्द से जल्द भगवान बसवेश्वर की मूर्ति की बरामदगी की मांग कर रहे हैं।