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कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले पर भारत ने सख्त रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को अपने गिरेबान में झांकने और आतंकी ढांचे को नष्ट करने की नसीहत दी है।
पाकिस्तान के सबसे बड़े आर्थिक केंद्र कराची में हाल ही में हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर हुआ यह हमला न केवल पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है, बल्कि उस क्षेत्र में पनप रहे कट्टरपंथी समूहों के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। इस हमले में चार सुरक्षाकर्मियों की शहादत हुई, जबकि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में छह आतंकवादी मारे गए और एक को जिंदा पकड़ा गया। इस घटना ने एक तरफ जहां पाकिस्तान की सरकारी नीतियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत ने इस पर अत्यंत कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है।
हमले की भयावहता और जिम्मेदारी
शनिवार रात लगभग 8:30 बजे हुए इस हमले ने कराची के निवासियों में दहशत फैला दी। आतंकियों ने पहले शक्तिशाली धमाके किए और फिर फायरिंग करते हुए सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय में घुस गए। लगभग 90 मिनट तक चली भीषण मुठभेड़ ने साबित किया कि हमलावर पूर्व-नियोजित रणनीति और हथियारों के साथ आए थे। प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ‘जमात-उल-अहरार’ ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। यह संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का ही एक अति-चरमपंथी गुट है, जो लंबे समय से सुरक्षा बलों और नागरिकों को निशाना बनाता रहा है। इस घटना ने पाकिस्तान की उस चिंता को भी बढ़ा दिया है, जिसमें वह लगातार अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर टीटीपी को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप लगाता है।
भारत का मुंहतोड़ जवाब: ‘अपने गिरेबान में झांके पाकिस्तान’
इस हमले के बाद पाकिस्तान की ओर से हमेशा की तरह भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाने की कोशिश की गई। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस बार अत्यंत आक्रामक और स्पष्ट कूटनीतिक जवाब दिया। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान के लिए बेहतर होगा कि वह अपने गिरेबान में झांके।”
भारत का यह रुख दर्शाता है कि अब वह पाकिस्तान के छद्म युद्ध और आतंकवाद को संरक्षण देने वाली नीति को और अधिक बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को अपनी सरजमीं पर मौजूद आतंकी ढांचे (Terror Infrastructure) को नष्ट करने के लिए ठोस और निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए। भारत की यह नसीहत कि पाकिस्तान सरकारी नीति के तौर पर आतंकवाद का सहारा लेना छोड़े, वैश्विक मंच पर एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है। यह दर्शाता है कि पाकिस्तान की विफलता के लिए दूसरों को दोष देना अब पुराना पड़ चुका है।
अस्थिरता की ओर बढ़ता पाकिस्तान
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान गहरे राजनीतिक और आर्थिक संकट के साथ-साथ गंभीर सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव अपने चरम पर है। इस्लामाबाद लगातार यह शिकायत कर रहा है कि टीटीपी के आतंकी अफगानिस्तान के भीतर से सीमा पार करके हमले कर रहे हैं। जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तानी सेना द्वारा अफगानिस्तान के भीतर सैन्य ऑपरेशन किए जाने के कारण दोनों पड़ोसी देशों के बीच कड़वाहट बढ़ गई है।
कराची में अक्टूबर 2024 के बाद से यह पहला बड़ा हमला है। इससे पूर्व कराची एयरपोर्ट के समीप हुए आत्मघाती धमाके में चीनी इंजीनियरों की मृत्यु ने पहले ही पाकिस्तान में विदेशी निवेश और सुरक्षा के प्रति अंतरराष्ट्रीय विश्वास को हिला दिया था। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) का सक्रिय होना और अब टीटीपी समर्थित संगठनों का कराची जैसे सुरक्षित माने जाने वाले शहरों में घुसपैठ करना, पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी विफलता है।
आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक अपेक्षा
भारत ने बार-बार यह रेखांकित किया है कि आतंकवाद एक ऐसा वैश्विक कैंसर है जिसका कोई ‘अच्छा’ या ‘बुरा’ स्वरूप नहीं होता। पाकिस्तान यदि अपनी धरती का उपयोग अन्य देशों या अपने ही सुरक्षा बलों के खिलाफ आतंकवाद फैलाने के लिए होने देगा, तो इसका खामियाजा उसे खुद भुगतना पड़ेगा। भारत का रुख साफ है: क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी है कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी आधिकारिक नीति का हिस्सा बनाना बंद करे।
जब तक पाकिस्तान अपनी ‘आतंकवाद को संरक्षण’ देने की नीति में सुधार नहीं करता, तब तक न तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वास हासिल कर पाएगा और न ही अपने देश में शांति स्थापित कर पाएगा। कराची की यह घटना पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी है कि जो आग उसने अपने पड़ोसियों के लिए जलाई थी, वह अब उसके अपने घर को जला रही है। भारत का ‘मुंहतोड़ जवाब’ केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि यथार्थवादी सत्य है, जिसे पाकिस्तान को जल्द से जल्द समझना होगा।