जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन: सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन: सोनम वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

 

जंतर-मंतर पर CJP का प्रदर्शन जारी है। भूख हड़ताल पर बैठे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को देश की धरोहर बताते हुए अनशन खत्म करने की अपील की गई और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई गई।

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर जनता की आवाज, लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और न्याय की गुहार का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। पिछले कई दिनों से यहाँ CJP (सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस) द्वारा एक महत्वपूर्ण और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इस आंदोलन ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, क्योंकि यह केवल कुछ व्यक्तियों की मांग नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों की रक्षा से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा बन चुका है। इसी कड़ी में देश के प्रख्यात शिक्षाविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी कई दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, जिससे यह आंदोलन और भी अधिक संवेदनशील और गंभीर हो गया है।

सोनम वांगचुक का सत्याग्रह और उनकी बिगड़ती सेहत

लद्दाख से आने वाले सोनम वांगचुक केवल एक कार्यकर्ता नहीं हैं; वे एक विजनरी हैं जिन्होंने शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है। जंतर-मंतर पर उनका यह सत्याग्रह उनके अदम्य साहस और व्यवस्था को सुधारने की उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। लेकिन पिछले कई दिनों से अन्न-जल त्याग कर भूख हड़ताल पर बैठने के कारण उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता जा रहा है। कड़कड़ाती धूप और विपरीत परिस्थितियों में भी उनका हौसला नहीं टूटा है, लेकिन एक राष्ट्र के रूप में यह हमारी सामूहिक चिंता का विषय होना चाहिए कि देश के लिए इतना बड़ा योगदान देने वाला व्यक्ति आज न्याय के लिए सड़कों पर अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर है। हम CJP और सोनम वांगचुक द्वारा उठाई गई सभी जायज मांगों का पूर्ण रूप से समर्थन करते हैं।

धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग

इस पूरे जन आंदोलन के बीच जो एक सबसे प्रमुख और जायज मांग उठकर सामने आ रही है, वह है जवाबदेही तय करने की मांग। शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने पूरे देश में आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। जब व्यवस्थाएं विफल होती हैं और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होता है, तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी शीर्ष पर बैठे लोगों को लेनी ही पड़ती है। इसी संदर्भ में, यह मांग बिल्कुल उचित है कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक व्यवस्था में सुधार की कोई भी उम्मीद बेमानी है। उनके इस्तीफे से यह संदेश जाएगा कि सरकार जनता और छात्रों की चिंताओं को लेकर गंभीर है।

सोनम वांगचुक जी से विनम्र अपील: ‘आप देश की धरोहर हैं’

इस लेख और अपने वक्तव्य के माध्यम से मैं आदरणीय सोनम वांगचुक जी से एक बेहद भावुक और विनम्र अपील करना चाहता हूँ। वांगचुक जी, आपकी लड़ाई सत्य और न्याय की लड़ाई है, लेकिन आपका जीवन इस देश के लिए अनमोल है। आप केवल एक व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि आप इस ‘देश की धरोहर’ हैं। आपके विचार, आपके नवाचार (innovations) और आपका मार्गदर्शन आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। सरकार की संवेदनहीनता के सामने हम आपको अपने स्वास्थ्य और प्राणों की आहुति देते हुए नहीं देख सकते। आपकी आवाज पूरे देश तक पहुँच चुकी है और अब करोड़ों लोग आपके साथ खड़े हैं। इसलिए, मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि कृपया अपनी भूख हड़ताल अब समाप्त कर दें। हमें आपके जीवन और आपके नेतृत्व की लंबे समय तक आवश्यकता है।

16 जुलाई को जंतर-मंतर पर समर्थन का ऐलान

लोकतंत्र में समर्थन केवल सोशल मीडिया या दूर बैठकर नहीं दिया जा सकता; इसके लिए जमीन पर उतरकर साथ खड़े होना पड़ता है। इसी जिम्मेदारी को समझते हुए, मैं यह घोषणा करता हूँ कि मैं परसों, 16 जुलाई को शाम 5 बजे जंतर-मंतर पर पहुँचूँगा। मेरा उद्देश्य वहाँ जाकर CJP के प्रदर्शनकारियों और विशेष रूप से सोनम वांगचुक जी को अपना पूर्ण और बिना शर्त समर्थन देना है। मैं चाहता हूँ कि उन्हें यह अहसास हो कि वे इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। पूरा देश, देश का युवा और हर वह नागरिक जो न्याय और पारदर्शिता में विश्वास रखता है, वह उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।

अधिकारों की यह लड़ाई लंबी हो सकती है, लेकिन जब इरादे नेक हों और जनता का समर्थन साथ हो, तो बड़ी से बड़ी सत्ता को भी झुकना पड़ता है। हम तब तक इस आवाज को बुलंद करते रहेंगे, जब तक कि न्याय सुनिश्चित नहीं हो जाता और जवाबदेही तय नहीं कर दी जाती।

 

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