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WTC फाइनल की दौड़ में भारत की राह मुश्किल हो गई है। टीम को बचे 7 टेस्ट में कम से कम 62 अंक हासिल करने होंगे। ऑस्ट्रेलिया सीरीज से पहले खिलाड़ियों की तैयारी भी चुनौतीपूर्ण है।
भारत ने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जीत दर्ज कर कुछ राहत मिली, लेकिन अपने आखिरी टेस्ट मैच में जीत नहीं पाने का प्रभाव अब टीम की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) की दौड़ पर पड़ सकता है। सीरीज में जीत हासिल करने के बावजूद भारत को WTC फाइनल में पहुंचने की राह आसान नहीं रही है। टीम को अपने बचे हुए सात टेस्ट मैचों में कम से कम 62 अंक हासिल करने की जरूरत होगी क्योंकि वह फिलहाल अंक तालिका में पांचवें स्थान पर है। इतने अंक मिलने के बाद भी फाइनल में स्थान पक्का नहीं है। भारतीय टीम के लिए आगामी टेस्ट मैच बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं।
62 अंक सात टेस्ट मैचों में हासिल करने होंगे
वर्तमान WTC चक्र में भारत को अभी सात टेस्ट मैच खेलने हैं। इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू मैदान पर पांच टेस्ट मैचों की सीरीज शामिल हैं। भारत का प्रदर्शन इन मुकाबलों में सीधा WTC फाइनल की उसकी दावेदारी पर पड़ेगा। श्रीलंका के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम को कुछ राहत मिली है, लेकिन अंतिम टेस्ट में जीत नहीं मिलने के कारण उनकी अंक तालिका में स्थिति उतनी मजबूत नहीं हो सकी, जितनी भारतीय टीम चाहती थी।
अब भारतीय टीम को हर टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन करके जीत की कोशिश करनी होगी। WTC के लिहाज से, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए टीम प्रबंधन खिलाड़ियों की तैयारी और संयोजन पर अधिक ध्यान देने लगा है।
भारत ए के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया से पहले अभ्यास का सुझाव
भारतीय कप्तान शुभमन गिल चाहते हैं कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से पहले टेस्ट टीम के खिलाड़ियों को पर्याप्त रेड-बॉल क्रिकेट खेलने का अवसर मिले। उन्होंने आगामी इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए सीरीज में कुछ बड़े टेस्ट बल्लेबाजों को उतारने का सुझाव दिया है। 22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए का मुकाबला खेला जाएगा।
गिल का विचार है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी वातावरण में लाल गेंद से खेलने का अनुभव मिलना बहुत फायदेमंद होगा। भारतीय बल्लेबाजों के लिए अभ्यास, खासतौर पर ऐसे विकेटों पर, जहां गेंद आगे बढ़ने के साथ कुछ बदल जाती है, महत्वपूर्ण हो सकता है।
स्पिन के खिलाफ बल्लेबाजों की कमजोरी चिंता का कारण बन गई
भारतीय बल्लेबाजों ने पिछले दो वर्षों में घरेलू टेस्ट मुकाबलों में स्पिन गेंदबाजी के सामने अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया है। ऐसे में इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए के मुकाबले तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाएंगे। भारतीय बल्लेबाजों को अगर इन मैचों में स्पिन को मदद देने वाली पिचें मिलती हैं तो उन्हें परिस्थितियों से तालमेल बैठाने और अपनी तकनीक को बेहतर बनाने का अवसर मिल सकता है।
गिल के इस सुझाव को लागू करना चयनकर्ताओं के लिए मुश्किल होगा। उसी समय होने वाला ईरानी कप इसकी सबसे बड़ी वजह है।
ईरानी कप और इंडिया ए सीरीज में संघर्ष
ईरानी कप इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए का दूसरा मैच है। 1 अक्टूबर से जम्मू-कश्मीर में ईरानी कप शुरू होना है। ऐसे में इंडिया ए टीम को बहुत से टेस्ट विशेषज्ञ खिलाड़ियों को मिलाने से रेस्ट ऑफ इंडिया की टीम कमजोर हो सकती है।
ईरानी कप भी चयनकर्ताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह घरेलू क्रिकेट में खिलाड़ियों की प्रदर्शन को देखने का महत्वपूर्ण मंच है। यही कारण है कि टीम प्रबंधन को निर्धारित करना होगा कि किन खिलाड़ियों को India A के साथ भेजा जाए और किन्हें ईरानी कप के लिए भेजा जाए।
वेस्टइंडीज सीरीज और एशियन गेम्स की तुलना में बढ़ी कठिनाई
इस दौरान भारत का क्रिकेट कार्यक्रम पहले से ही काफी व्यस्त है। 27 सितंबर से वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज होनी है। इसके अलावा, कुछ खिलाड़ी 17 सितंबर से शुरू होने वाले एशियन गेम्स में भाग लेने जापान जाएंगे। टेस्ट खिलाड़ियों की उपलब्धता इसलिए और भी कठिन हो सकती है।
चयनकर्ताओं को वनडे सीरीज के लिए भी रिजर्व खिलाड़ियों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इंडिया ए और ऑस्ट्रेलिया ए के मुकाबलों के लिए उपलब्ध टेस्ट विशेषज्ञों की संख्या पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
कार्यक्रम न्यूज़ीलैंड दौरे से पहले भी व्यस्त रहेगा
भारत का न्यूजीलैंड दौरा भी बहुत व्यस्त होगा। इस दौरे में पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय, पांच वनडे और दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। दौरा 22 अक्टूबर से टी20 सीरीज से शुरू होगा। इंडिया ए को इस दौरान न्यूजीलैंड ए के खिलाफ तीन रेड-बॉल मुकाबले भी खेलने होंगे।
भारतीय टीम प्रबंधन को लगातार अलग-अलग प्रारूपों में मैच खेलने के कारण खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और तैयारी देना कठिन होगा। रिपोर्ट के अनुसार, टीम प्रबंधन ने बोर्ड के साथ लगभग 60 खिलाड़ियों की सूची साझा की है, ताकि पहले से वीजा प्रक्रिया पूरी की जा सके, ताकि वे न्यूजीलैंड जा सकें।
टेस्ट खिलाड़ियों को दौरे के दौरान रिहाई मिल सकती है
न्यूजीलैंड दौरे पर कुछ टेस्ट खिलाड़ियों को वनडे सीरीज के बीच में रिलीज करने की भी संभावना है। इसका लक्ष्य उन्हें दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला से पहले अधिक समय देना होगा। टीम प्रबंधन चाहता है कि टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों को पर्याप्त आराम और रेड-बॉल अभ्यास मिल सके।
भारत के सामने अब केवल टेस्ट सीरीज जीतने की चुनौती नहीं है; अब हर मुकाबला WTC फाइनल में बने रहने के लिए भी महत्वपूर्ण है। श्रीलंका के खिलाफ आखिरी टेस्ट में जीत से चूकने के बाद टीम की राह मुश्किल जरूर हुई है, लेकिन भारत अभी भी आगामी सात टेस्ट में अच्छा खेल करके अपनी स्थिति को सुधार सकता है। टीम इंडिया का पहला लक्ष्य ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सीरीज से पहले खिलाड़ियों की सही तैयारी और व्यस्त कार्यक्रम के बीच संतुलन बनाना होगा।