भारत और नेपाल व्यापार संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार, ट्रेड, ट्रांजिट और कनेक्टिविटी पर बनी सहमति

भारत और नेपाल व्यापार संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार, ट्रेड, ट्रांजिट और कनेक्टिविटी पर बनी सहमति

 

भारत और नेपाल ने नई दिल्ली में व्यापार, ट्रांजिट, कनेक्टिविटी, कस्टम्स और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देशों ने आर्थिक साझेदारी मजबूत करने पर जोर दिया।

भारत और नेपाल ने द्विपक्षीय व्यापार, ट्रांजिट, सीमा-पार कनेक्टिविटी और अनधिकृत व्यापार पर नियंत्रण से जुड़े कई अहम मुद्दों की समीक्षा की। नई दिल्ली में 16 और 17 सितंबर को भारत-नेपाल अंतर-सरकारी उपसमिति (IGSC) की बैठक हुई, जिसमें दोनों देशों के अधिकारियों ने व्यापार और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव उज्ज्वल कुमार घोष ने किया, जबकि नेपाली प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई उद्योग, वाणिज्य एवं आपूर्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव बुद्ध बहादुर गुरूंग ने की। बैठक में दोनों देशों के संबंधित मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

व्यापार से जुड़े कई अहम मुद्दों पर मंथन

भारत-नेपाल IGSC दोनों देशों के बीच व्यापार और व्यापार से जुड़े मुद्दों की विस्तृत समीक्षा के लिए एक संस्थागत व्यवस्था है। इसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और ट्रांजिट को सुविधाजनक बनाना तथा कारोबार से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान तलाशना है। बैठक में बाजार पहुंच, सीमा शुल्क, व्यापार सुविधा, मानक, खाद्य सुरक्षा, पादप स्वच्छता उपाय, फार्मास्यूटिकल्स, मेडिकल डिवाइस और आयुष उत्पादों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इसके अलावा सीमा अवसंरचना और रेल एवं सड़क संपर्क को बेहतर बनाने के मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहे।

भारतीय और नेपाली उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने पर जोर

दोनों पक्षों ने भारतीय और नेपाली उत्पादों के लिए बाजार पहुंच को और आसान बनाने के संभावित उपायों पर विचार किया। इसमें कृषि और डेयरी उत्पादों के साथ-साथ खाद्य सामग्री, दवाइयां, चिकित्सा उपकरण और आयुष उत्पाद शामिल हैं। बाजार पहुंच बेहतर होने से दोनों देशों के कारोबारियों के लिए सीमा-पार व्यापार को आसान बनाने में मदद मिल सकती है। अधिकारियों ने व्यापार प्रक्रिया में आने वाली व्यावहारिक अड़चनों की पहचान कर उन्हें दूर करने की दिशा में भी चर्चा की।

कस्टम्स प्रक्रिया में डिजिटल बदलाव

बैठक में सीमा शुल्क यानी कस्टम्स सहयोग को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। दोनों देशों ने आगमन से पहले सूचना के आदान-प्रदान, सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन के इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन, कस्टम्स ऑटोमेशन और डिजिटलीकरण जैसे उपायों पर चर्चा की। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य वैध व्यापार को अधिक सुगम बनाना और सीमा पर प्रक्रियाओं को तेज करना है। साथ ही दोनों पक्षों ने नियमों के पालन को सुनिश्चित करने और प्राथमिकता वाले व्यापार प्रावधानों के दुरुपयोग को रोकने के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने पर जोर दिया।

रेल और सड़क कनेक्टिविटी पर भी हुई चर्चा

भारत और नेपाल के आर्थिक संबंधों में ट्रांजिट और कनेक्टिविटी की अहम भूमिका है। बैठक में दोनों देशों ने रेल और सड़क संपर्क, माल ढुलाई, इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और लैंड पोर्ट से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर इस्तेमाल करने और द्विपक्षीय तथा ट्रांजिट व्यापार में आने वाली परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सीमा-पार व्यापार को अधिक व्यवस्थित और सुचारु बनाने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच निरंतर सहयोग की जरूरत पर सहमति जताई।

खाद्य सुरक्षा और मानकों में सहयोग

भारत और नेपाल ने मानकों, खाद्य सुरक्षा, प्लांट क्वारंटीन और कंफॉर्मिटी असेसमेंट के क्षेत्र में सहयोग जारी रखने का भी स्वागत किया। इसके तहत संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों के लिए यह सहयोग महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि और खाद्य उत्पादों का सीमा-पार व्यापार करते समय गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन आवश्यक होता है।

अनधिकृत व्यापार रोकने पर भी सहमति

बैठक में वैध सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ अनधिकृत व्यापार और वाणिज्यिक धोखाधड़ी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने संबंधित एजेंसियों के बीच सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया ताकि व्यापार नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके। बैठक का माहौल सौहार्दपूर्ण और रचनात्मक रहा। दोनों देशों ने तय किया कि जिन मुद्दों के लिए आगे तकनीकी स्तर पर विस्तृत जांच की आवश्यकता है, उन पर समयबद्ध तरीके से आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नेपाल के वित्त मंत्री का दिल्ली दौरा भी अहम

भारत-नेपाल व्यापार वार्ता के बीच नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले तीन दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे। यह वित्त मंत्री के रूप में पद संभालने के बाद उनकी पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। इस दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के साथ-साथ नेपाल में हाल की बाढ़ से हुए नुकसान और राहत, पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण प्रयासों पर चर्चा हुई।

बाढ़ के बाद भारत ने मदद जारी रखने का भरोसा दिया

नेपाल में हाल की प्राकृतिक आपदाओं से हुए जान-माल के नुकसान पर निर्मला सीतारमण ने संवेदना व्यक्त की और नेपाल के रिकवरी और पुनर्निर्माण प्रयासों में भारत के निरंतर समर्थन का भरोसा दिलाया। नेपाल के वित्त मंत्री ने राहत सामग्री और बचाव एवं राहत कार्यों के लिए तकनीकी सहायता समेत भारत की ओर से दी गई मदद के लिए आभार जताया। दोनों पक्षों ने बाढ़ के प्रभाव और नेपाल की पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श किया।

आर्थिक साझेदारी और कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा

वित्त मंत्रियों की बैठक में बुनियादी ढांचे और सीमा-पार कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने सहित आर्थिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया। भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और निवेश का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। हाल की बैठकों से संकेत मिलता है कि दोनों देश व्यापार, ट्रांजिट, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर संस्थागत संवाद को आगे भी जारी रखने पर जोर दे रहे हैं।

 

 

Related posts

जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, UAPA समेत 7 मामलों में मिली जमानत

आपदा से पहले मिले चेतावनी, स्थानीय लोगों को मिले प्रशिक्षण: गुलाब चंद कटारिया ने बेहतर समन्वय पर दिया जोर

नेपाल में बाढ़ से मची तबाही के बीच उत्तराखंड ने बढ़ाया मदद का हाथ, CM पुष्कर सिंह धामी ने राहत सामग्री रवाना की

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Read More