नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बीच उत्तराखंड सरकार ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए राहत सामग्री भेजी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इस बीच उत्तराखंड सरकार ने पड़ोसी देश नेपाल के आपदा प्रभावित लोगों की मदद के लिए आवश्यक राहत सामग्री भेजी है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से राहत सामग्री से लदे वाहनों के काफिले को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस खेप में आपदा से प्रभावित परिवारों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जरूरी राहत सामग्री शामिल की गई है। उत्तराखंड और नेपाल के बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को देखते हुए इस सहायता को पड़ोसी देश के संकट की घड़ी में सहयोग के तौर पर देखा जा रहा है।
नेपाल में प्राकृतिक आपदा से भारी तबाही
नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड यानी अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के ताजा अपडेट के मुताबिक, आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,410 हो गई है, जबकि 6,145 लोग अभी भी लापता बताए गए हैं। प्रभावित जिलों में राहत, बचाव और पुनर्वास अभियान जारी है। अधिकारियों के अनुसार, आपदा के बाद बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।
NDRRMA की गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार मृतकों में 549 पुरुष और 336 महिलाएं शामिल हैं, जबकि 525 शवों की पहचान अभी नहीं हो पाई है। सबसे अधिक मौतें चितवन जिले में दर्ज की गई हैं, जहां 364 लोगों की जान गई। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 232, नवलपरासी वेस्ट में 222, नुवाकोट में 203 और रसुवा में 199 मौतें दर्ज की गई हैं। आंकड़े बताते हैं कि आपदा ने नेपाल के कई जिलों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
हजारों लोग विस्थापित, राहत अभियान जारी
प्राकृतिक आपदा के कारण हजारों लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। अब तक 13,756 लोगों को बचाया जा चुका है। वहीं, 344 लोग 19 अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं, जबकि 290 लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है। सुरक्षा एजेंसियों की ओर से भी 9,820 लोगों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। राहत और बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने, घायलों को चिकित्सा सुविधा देने और जरूरतमंद परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।
उत्तराखंड ने पड़ोसी देश के लिए बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राहत सामग्री भेजने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से राहत सामग्री लेकर जाने वाले वाहनों के काफिले को रवाना किया। इस खेप का उद्देश्य आपदा से प्रभावित परिवारों को जरूरी सामान उपलब्ध कराना है। हिमालयी क्षेत्र में स्थित उत्तराखंड और नेपाल के बीच लंबे समय से सामाजिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में प्राकृतिक आपदा के समय मानवीय सहायता दोनों क्षेत्रों के बीच सहयोग की भावना को भी दर्शाती है।
पीएम मोदी के जन्मदिन पर सीएम धामी ने दी शुभकामनाएं
इससे एक दिन पहले गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आधुनिक भारत का वास्तुकार बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना हर क्षण देश और राष्ट्र कल्याण के लिए समर्पित किया है। धामी ने उत्तराखंड की जनता की ओर से प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान से प्रधानमंत्री के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना भी की।
विकसित भारत के लक्ष्य का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस दिशा में देश के अलग-अलग क्षेत्रों में काम आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, नए संस्थानों की स्थापना, नई परियोजनाओं की शुरुआत, बुनियादी ढांचे का विकास और कई ऐतिहासिक पहल इसी व्यापक लक्ष्य का हिस्सा हैं। उन्होंने आईआईएम, आईआईटी और नए हवाई अड्डों के निर्माण के साथ-साथ चार और छह लेन की सड़कों, राजमार्गों, ओवरब्रिज तथा रेलवे क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों का भी जिक्र किया।
आपदा के बीच क्षेत्रीय सहयोग का महत्व
नेपाल में प्राकृतिक आपदा के बाद सामने आई स्थिति ने राहत और बचाव कार्यों के साथ-साथ पड़ोसी देशों के सहयोग के महत्व को भी रेखांकित किया है। उत्तराखंड से भेजी गई राहत सामग्री का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की तत्काल जरूरतों में सहायता करना है। नेपाल में राहत अभियान के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश, घायलों का इलाज और विस्थापित लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी जारी है। ऐसे समय में आवश्यक राहत सामग्री की आपूर्ति प्रभावित समुदायों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। भारत और नेपाल के बीच निकट संबंधों के मद्देनजर दोनों देशों के विभिन्न हिस्सों से मानवीय सहयोग की पहल आगे भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।