जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, UAPA समेत 7 मामलों में मिली जमानत

जगतार सिंह जोहल को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, UAPA समेत 7 मामलों में मिली जमानत

 

दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को पंजाब में कथित लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयास से जुड़े सात मामलों में जमानत दी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने ब्रिटिश नागरिक जगतार सिंह जोहल को पंजाब में कथित लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयास से जुड़े सात मामलों में जमानत दे दी है। इनमें कुछ मामले गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत भी दर्ज हैं। हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा शामिल हैं, ने जोहल की ओर से दायर जमानत अपीलों पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। हाईकोर्ट की 18 सितंबर की सूची में फैसले की घोषणा दर्ज है।

2017 से हिरासत में हैं जगतार सिंह जोहल

जगतार सिंह जोहल को पंजाब में 2017 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह हिरासत में हैं। उनके खिलाफ जिन मामलों की सुनवाई हुई, वे मुख्य रूप से 2016-17 के दौरान लुधियाना और जालंधर जिलों में हुई कथित लक्षित हत्याओं और हत्या के प्रयास की घटनाओं से जुड़े हैं। इन मामलों में अभियोजन पक्ष की ओर से भारतीय दंड संहिता, UAPA और आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराएं लगाए जाने की जानकारी पहले की हाईकोर्ट कार्यवाही में सामने आई थी।

इन मामलों को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA का आरोप रहा है कि ये घटनाएं एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं। जांच एजेंसी के अनुसार, कथित साजिश का संबंध खालिस्तान लिबरेशन फोर्स (KLF) से था और इसका उद्देश्य पंजाब में अशांति पैदा करना तथा कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित करना था। ये आरोप अभियोजन पक्ष के हैं और इनका अंतिम निर्धारण संबंधित न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

अभियोजन पक्ष ने क्या आरोप लगाए?

जांच एजेंसी के अनुसार, हरदीप सिंह और रामांदीप सिंह पर कथित हमलों में शूटर के तौर पर शामिल होने का आरोप है। मामले पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं से भी संबंधित बताए गए हैं। वहीं, अभियोजन पक्ष ने जोहल को कथित तौर पर अलग भूमिका में बताया है।

NIA का आरोप है कि जोहल ने कथित तौर पर वित्तीय मदद पहुंचाने और संदेश या धनराशि पहुंचाने वाले व्यक्ति के रूप में भूमिका निभाई। एजेंसी के मुताबिक, उन्हें ब्रिटेन स्थित KLF से जुड़े गुरशरण सिंह से कथित तौर पर 3,000 पाउंड मिले थे, जिन्हें उन्होंने पेरिस में हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू तक पहुंचाया। अभियोजन के अनुसार, बाद में यह धनराशि हरदीप सिंह तक पहुंचाई गई। इन आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल की प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होना है।

पहले भी खारिज हो चुकी थीं जमानत याचिकाएं

जगतार सिंह जोहल की जमानत याचिकाएं पहले भी कई स्तरों पर खारिज की जा चुकी थीं। NIA की विशेष अदालत ने सातों मामलों में उनकी जमानत अर्जियां खारिज की थीं। इनमें से पांच अर्जियां 7 सितंबर 2022 को और बाकी दो अर्जियां 25 अप्रैल 2024 को खारिज हुई थीं। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सितंबर 2024 में उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

हाईकोर्ट की पुरानी कार्यवाही में जोहल से जुड़े कई मामलों का रिकॉर्ड दर्ज है। अदालत के दस्तावेजों में NIA से संबंधित अलग-अलग FIR और जोहल की ओर से दायर आपराधिक अपीलों का उल्लेख मिलता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा सुनवाई

सितंबर 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद जोहल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 15 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मामलों को दोबारा विचार के लिए दिल्ली हाईकोर्ट भेजा। इसके बाद हाईकोर्ट ने जमानत अर्जियों पर नए सिरे से सुनवाई की।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 7 सितंबर को इन मामलों में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 18 सितंबर को अदालत ने फैसला सुनाते हुए सातों मामलों में जमानत मंजूर कर दी। दिल्ली हाईकोर्ट की वेबसाइट पर 18 सितंबर 2026 के लिए फैसले की घोषणा वाली सूची उपलब्ध है।

जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं

जगतार सिंह जोहल को सात मामलों में जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही या गलत घोषित कर दिया है। जमानत एक अंतरिम न्यायिक राहत है, जबकि आरोपों की अंतिम पुष्टि या खारिज होना संबंधित मुकदमों में साक्ष्यों और ट्रायल की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। इसलिए जमानत के आदेश और मामले के अंतिम फैसले को अलग-अलग समझना जरूरी है।

सात मामलों में मिली राहत

दिल्ली हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद जोहल को उन सात मामलों में राहत मिली है, जिनकी जमानत अपीलें इस पीठ के सामने लंबित थीं। यह घटनाक्रम 2017 से चली आ रही उनकी लंबी हिरासत और कई स्तरों पर हुई न्यायिक कार्यवाही के बाद सामने आया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित मामलों में जारी रहेगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जमानत की शर्तों और अन्य औपचारिकताओं के अनुसार उनकी रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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