भारत-भूटान रिश्तों को मिली नई ऊर्जा, 4,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन पर समझौता; हाइड्रोपावर से डिजिटल पेमेंट तक बढ़ा सहयोग

भारत-भूटान रिश्तों को मिली नई ऊर्जा, 4,000 करोड़ की क्रेडिट लाइन पर समझौता; हाइड्रोपावर से डिजिटल पेमेंट तक बढ़ा सहयोग

 

भारत और भूटान ने ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट के समझौते का स्वागत किया। जयशंकर की यात्रा में हाइड्रोपावर, कनेक्टिविटी, डिजिटल पेमेंट और शिक्षा सहयोग पर चर्चा हुई।

भारत और भूटान के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। विदेश मंत्री एस जयशंकर की भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए 4,000 करोड़ रुपये की रियायती लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit) के समझौते का स्वागत किया। विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से शुक्रवार को जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह समझौता दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जयशंकर 16 से 18 सितंबर तक भूटान की आधिकारिक यात्रा पर रहे। उन्हें भूटान के विदेश मामलों और विदेश व्यापार मंत्री डीएन धुंग्येल ने आमंत्रित किया था। यात्रा के दौरान दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय सहयोग के सभी प्रमुख पहलुओं के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की।

भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत-भूटान ऊर्जा साझेदारी में हुई प्रगति पर संतोष जताया। दोनों देशों ने हाल के ऊर्जा क्षेत्र के विकास को महत्वपूर्ण बताया। इसमें 1,020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन और उसके टैरिफ प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर शामिल हैं। इसके अलावा 1,200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना में बांध निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने का भी उल्लेख किया गया। भारत और भूटान ने इस बात का स्वागत किया कि भारतीय कंपनियां भूटान की जलविद्युत परियोजनाओं में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। दोनों पक्षों के अनुसार, भारतीय कंपनियों की भागीदारी से मौजूदा ऊर्जा सहयोग में नई गतिशीलता आई है और भविष्य में इस क्षेत्र में साझेदारी के और विस्तार की संभावनाएं बनी हैं।

कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शुभारंभ

जयशंकर और डीएन धुंग्येल ने भूटान में कई विकास परियोजनाओं का संयुक्त रूप से उद्घाटन और शुभारंभ भी किया। इनमें मोंगर में 65 बिस्तरों वाला ग्याल्त्सुएन जेत्सुन पेमा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल, समद्रुप जोंगखार-त्राशिगांग हाईवे पर जगन्नाथन ब्रिज और 500 किलोवाट का लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन परियोजनाओं को भूटान की विकास प्राथमिकताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने भूटान को 54 इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति किए जाने का भी स्वागत किया। इसके साथ ही भारत से 43 जर्सी गायों को भूटान के बुमथांग स्थित नेशनल कैटल ब्रीडिंग सेंटर में स्थानांतरित किए जाने का भी उल्लेख किया गया।

भूटान की विकास प्राथमिकताओं में भारत का समर्थन

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भूटान के विकास लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया। वहीं, भूटान ने अपनी 13वीं पंचवर्षीय योजना (2024-29) के तहत विभिन्न कार्यक्रमों के लिए भारत की सहायता की सराहना की। दोनों देशों के बीच सहयोग केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे, व्यापार, डिजिटल तकनीक और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रहा है। भारत और भूटान ने इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए कई नए क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श किया।

गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी और कनेक्टिविटी पर जोर

बैठक में गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा व्यापार और ट्रांजिट, सीमा-पार संपर्क, डिजिटल भुगतान तथा अंतरिक्ष सहयोग जैसे विषय भी बातचीत के एजेंडे में शामिल रहे। भारत ने गेलेफू आने वाले निवेशकों और पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए असम के हाटीसार में इमिग्रेशन चेक पोस्ट स्थापित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों पक्षों ने गेलेफू-कोकराझार और सामत्से-बनारहाट सीमा-पार रेल संपर्क परियोजनाओं में हुई प्रगति का भी स्वागत किया। इन परियोजनाओं से दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

डिजिटल पेमेंट और शिक्षा में भी बढ़ा सहयोग

भारत और भूटान के बीच डिजिटल सहयोग को भी बैठक में विशेष महत्व मिला। दोनों देशों ने यूपीआई आधारित सुविधा के संचालन का स्वागत किया, जिसके माध्यम से भूटानी नागरिक भूटानी मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल करते हुए भारत में डिजिटल भुगतान कर सकते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग को विस्तार दिया गया है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) छात्रवृत्ति के तहत पात्र भूटानी छात्रों की संख्या 30 से बढ़ाकर 60 करने का निर्णय स्वागत योग्य कदम बताया गया। वहीं, नालंदा विश्वविद्यालय छात्रवृत्ति योजना के तहत सीटों की संख्या 30 से बढ़ाकर 55 किए जाने का भी दोनों पक्षों ने स्वागत किया।

संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक सहयोग पर भी बातचीत

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-2029 के कार्यकाल के लिए गैर-स्थायी सीट की अपनी उम्मीदवारी को भूटान के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। दूसरी ओर, भारत ने भूटान द्वारा इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस के फ्रेमवर्क एग्रीमेंट के अनुमोदन का स्वागत किया। इससे वन्यजीव संरक्षण और बड़ी बिल्लियों की प्रजातियों के संरक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आगे भी जारी रहेगा उच्चस्तरीय संवाद

भारत और भूटान के बीच ऐतिहासिक और करीबी संबंधों को देखते हुए जयशंकर की यात्रा को द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की समीक्षा के अवसर के रूप में देखा गया। ऊर्जा परियोजनाओं से लेकर सीमा-पार रेल संपर्क, डिजिटल भुगतान, शिक्षा और स्वास्थ्य तक दोनों देशों ने सहयोग के कई क्षेत्रों में प्रगति पर चर्चा की। यात्रा के अंत में जयशंकर ने भूटान के विदेश मामलों और विदेश व्यापार मंत्री डीएन धुंग्येल को सुविधानुसार जल्द भारत आने का निमंत्रण भी दिया। इससे दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और नियमित संवाद आगे भी जारी रहने का संकेत मिलता है।

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