मिडिल ईस्ट संकट के मद्देनजर भारत सरकार ने अमित शाह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मंत्री समिति बनाई। एलपीजी आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा पर निगरानी जारी।
मिडिल ईस्ट में जारी संकट के मद्देनजर भारत सरकार ने गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय मंत्री समिति का गठन किया है। इस समिति में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य स्थिति की लगातार निगरानी करना और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए तैयारियां करना है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल देश पर संकट का कोई गंभीर असर नहीं दिख रहा है, लेकिन अग्रिम तैयारी के तौर पर यह समिति सक्रिय रूप से काम कर रही है।
समिति के कार्य और जिम्मेदारियां
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विदेश मंत्रालय कूटनीतिक स्तर पर स्थिति का विश्लेषण करेगा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव का मूल्यांकन करेगा।
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पेट्रोलियम मंत्रालय तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला पर संकट के संभावित असर का आकलन करेगा। विशेष रूप से घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति और वैकल्पिक स्रोतों के प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है।
- समिति अन्य संबंधित मंत्रालयों के साथ मिलकर लगातार स्थिति की समीक्षा करेगी, ताकि आम जनता और ऊर्जा सुरक्षा पर संकट का न्यूनतम प्रभाव पड़े।
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एलपीजी और घरेलू उपभोक्ताओं की सुरक्षा
कई हिस्सों में एलपीजी की अस्थायी कमी देखी जा रही है, जिससे नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। तेल कंपनियों को पर्याप्त भंडारण बनाए रखने और वितरण प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों का निकलना
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बातचीत के बाद ईरान से भारतीय जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति मिली। ये दो जहाज बुधवार रात से गुरुवार सुबह के बीच ट्रांजिट कर रहे हैं। यह कदम भारत के लिए राहत भरा साबित हुआ क्योंकि युद्ध और बंद ट्रैफिक के कारण तेल की आपूर्ति पर दबाव था। इन जहाजों के निकलने से तेल की कमी में राहत मिलने की उम्मीद है।