पच्चीसे बैसाख के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया। इसी ऐतिहासिक दिन पर सुवेंदु अधिकारी बंगाल के पहले भाजपा सीएम के रूप में शपथ लेंगे।
रवींद्र जयंती और नया राजनीतिक युग: प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुदेव को दी श्रद्धांजलि
9 मई, 2026 (पच्चीसे बैसाख) का दिन पश्चिम बंगाल के इतिहास में दोहरी महत्ता लेकर आया है। एक ओर जहाँ पूरा बंगाल अपने सबसे प्रिय सपूत और नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मना रहा है, वहीं दूसरी ओर राज्य में एक बड़े राजनीतिक परिवर्तन की पटकथा लिखी जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विशेष अवसर पर गुरुदेव टैगोर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें भारत की सभ्यतागत आत्मा की कालजयी आवाज बताया।
गुरुदेव को प्रधानमंत्री की भावभीनी श्रद्धांजलि
Today, on the special occasion of Pochishe Boishakh, we pay our heartfelt tributes to Gurudev Tagore.
Gurudev Tagore was a writer, thinker and poet of extraordinary brilliance. He made a mark as an exceptional philosopher, educationist, artist and a timeless voice of India’s…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 9, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘पच्चीसे बैसाख’ (बंगाली कैलेंडर के अनुसार वैशाख महीने का 25वां दिन) के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर गुरुदेव टैगोर को याद किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा:
“आज, पच्चीसे बैसाख के विशेष अवसर पर, हम गुरुदेव टैगोर को अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। वह असाधारण प्रतिभा के धनी लेखक, विचारक और कवि थे। उन्होंने एक दार्शनिक, शिक्षाविद् और कलाकार के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उन्होंने मानवता की गहरी भावनाओं और हमारी संस्कृति के महानतम आदर्शों को अभिव्यक्ति दी। उनके विचार आज भी पीढ़ियों को प्रेरित कर रहे हैं।”
पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि टैगोर ने समाज को नई सोच, रचनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से समृद्ध किया। उन्होंने प्रार्थना की कि गुरुदेव के विचार सदैव हमारा मार्गदर्शन करते रहें।
पश्चिम बंगाल में सत्ता का ऐतिहासिक परिवर्तन
गुरुदेव टैगोर की जयंती का यह दिन बंगाल के लिए एक नए राजनीतिक सवेरे के रूप में भी उभरा है। 2026 के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अभूतपूर्व 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 साल पुराने शासन का अंत कर दिया है।
शनिवार को कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह संयोग ही है कि जिस दिन बंगाल अपनी सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मना रहा है, उसी दिन राज्य की कमान एक नई राजनीतिक विचारधारा के हाथों में जा रही है।
कोलकाता में दिग्गजों का जमावड़ा
शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने के लिए केंद्र सरकार और भाजपा के दिग्गज नेता कोलकाता पहुंच चुके हैं। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा और धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए महानगर में मौजूद हैं।
इससे पहले शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुवेंदु अधिकारी को भाजपा विधायक दल का नेता घोषित किया था, जिसके बाद अधिकारी ने राज्यपाल आर.एन. रवि से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया।
सांस्कृतिक विरासत और राजनीतिक भविष्य का संगम
पच्चीसे बैसाख बंगाल के लोगों के लिए केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि यह उनकी अस्मिता और भावनाओं का प्रतीक है। भाजपा ने इस दिन को ‘सोनार बांग्ला’ के अपने विजन के साथ जोड़कर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। सुवेंदु अधिकारी, जो पूर्वी मेदिनीपुर के ग्रामीण अंचल से आते हैं, का मुख्यमंत्री बनना इस बात का संकेत है कि भाजपा बंगाल की जड़ों से जुड़कर शासन करना चाहती है।
रवींद्रनाथ टैगोर ने जिस ‘निर्भय मन’ (Where the mind is without fear) की कल्पना की थी, प्रधानमंत्री मोदी और नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी उसी आदर्श को बंगाल के भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं। 2026 की यह रवींद्र जयंती न केवल गुरुदेव के साहित्य और दर्शन का उत्सव है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का भी गवाह है। अब सभी की निगाहें ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर टिकी हैं, जहाँ से बंगाल की नई सरकार अपनी यात्रा शुरू करेगी।