राजस्थान में दांडी यात्रा दिवस: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और अशोक गहलोत ने महात्मा गांधी को किया नमन

राजस्थान में दांडी यात्रा दिवस: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और अशोक गहलोत ने महात्मा गांधी को किया नमन

दांडी यात्रा दिवस पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने महात्मा गांधी को नमन किया। शांति और अहिंसा के संदेश को याद करते हुए दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ मनाई गई।

देश के स्वतंत्रता संग्राम के ऐतिहासिक आंदोलन दांडी मार्च की 96वीं वर्षगांठ पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने गांधी जी के सत्य और अहिंसा के मार्ग को याद करते हुए नागरिकों से उनके सिद्धांतों पर चलने की अपील की।

अशोक गहलोत ने निकाला शांति मार्च

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में शांति मार्च का आयोजन किया। यह मार्च शहीद स्मारक से गांधी वाटिका तक निकाला गया, जिसमें कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। गहलोत ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश को अहिंसा और सत्य का मार्ग दिखाया और अन्याय के खिलाफ बिना हिंसा के संघर्ष का उदाहरण पेश किया।

गहलोत ने यह भी कहा कि गांधी जी के विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनके मार्ग पर चलकर समाज में शांति, भाईचारा और सामाजिक समरसता को मजबूत किया जा सकता है।

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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी दांडी मार्च की वर्षगांठ पर महात्मा गांधी और इस आंदोलन में भाग लेने वाले सभी सत्याग्रहियों को नमन किया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से बापू के योगदान और 1930 में साबरमती से दांडी तक की यात्रा के महत्व को याद किया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि गांधी जी का यह कदम दिखाता है कि मजबूत संकल्प और एकता के बल पर किसी भी अन्याय के खिलाफ संघर्ष जीता जा सकता है। दांडी मार्च ने देश की आजादी की लड़ाई में निर्णायक भूमिका निभाई और पूरे देश में स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया।

दांडी मार्च का ऐतिहासिक महत्व

दांडी मार्च, जिसे नमक सत्याग्रह भी कहा जाता है, की शुरुआत 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से 78 साथियों के साथ की थी। यह यात्रा लगभग 24 दिनों तक चली और 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुंचकर समाप्त हुई।

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए नमक कर का विरोध करना था। दांडी पहुंचकर गांधी जी ने समुद्र के पानी से नमक बनाकर कानून का उल्लंघन किया, जो अहिंसक आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया।

आज भी प्रेरणा देता है गांधी का संदेश

दांडी मार्च केवल आंदोलन नहीं था, बल्कि यह भारत के स्वतंत्रता संघर्ष की पहचान बन गया। इसने साबित किया कि अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलकर भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

आज देशभर में दांडी मार्च की वर्षगांठ पर महात्मा गांधी और उनके विचारों को याद किया जाता है। नेताओं और नागरिकों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि देकर उनके आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया जाता है।

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