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हरियाली अमावस्या 2026 इस बार 12 अगस्त को मनाई जाएगी। जानिए तुलसी, पीपल, चंद्रमा और मां लक्ष्मी से जुड़े 4 खास उपाय, जिनसे सुख-समृद्धि की मान्यता है।
हिंदू धर्म में हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व है। सावन की अमावस्या को प्रकृति, भगवान शिव, माता पार्वती और पिता की पूजा करने के लिए शुभ मानते हैं। इस दिन पूजा-पाठ करने, दान करने, स्नान करने और पौधरोपण करने की परंपरा है। 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या होगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करना सुख-शांति और समृद्धि लाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन किए गए कुछ विशेष उपाय सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं और आर्थिक परेशानियों को दूर करते हैं।
ग्रीष्म अमावस्या पर तुलसी की पूजा का महत्व
तुलसी के पौधे की पूजा हरियाली अमावस्या के दिन की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तुलसी मां लक्ष्मी का प्रतिरूप है। तुलसी के पौधे के सामने हर दिन सुबह और शाम घी का दीपक जलाया जाता है। दीप जलाते समय मां लक्ष्मी का स्मरण कर सकते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद मिलता है। तुलसी को जल देते समय श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक जलाएं
पीपल के वृक्ष की पूजा भी हरियाली अमावस्या पर विशेष फलदायी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या की रात सरसों के तेल का दीपक पीपल के पेड़ के नीचे जलाया जा सकता है। इसके बाद 108 बार मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” जाप करना प्रचलित है। मंत्र जाप करने के बाद पीपल वृक्ष की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए। माना जाता है कि इससे आर्थिक समस्याओं और जीवन में सुख-समृद्धि के लिए सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसके बावजूद, पूजा करते समय स्थानीय रीति-रिवाजों और धार्मिक नियमों का पालन करना उचित माना जाता है।
चंद्रमा को चावल और दूध से अर्घ्य दें।
कई स्थानों पर अमावस्या की रात चंद्रमा की पूजा करने और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा भी है। इसके लिए, थोड़ा कच्चा चावल और दूध को एक पात्र में मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देना मान्यता है। अर्घ्य देते समय आप ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ मंत्र जाप सकते हैं। ज्योतिषियों ने चंद्रमा को भावनाओं और मन का कारक मानते हैं। इसलिए चंद्र उपायों को भावनात्मक संतुलन और मानसिक शांति से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु अपनी क्षमतानुसार पूजा, ध्यान और दान कर सकते हैं।
मां लक्ष्मी की कृपा के लिए करें ये उपाय
यह धार्मिक मान्यता है कि हरियाली अमावस्या पर आर्थिक समृद्धि के लिए एक विशेष उपाय करना चाहिए। इसके लिए लाल कपड़े में श्री यंत्र, सात कौड़ियां और ग्यारह गोमती चक्र रखने की परंपरा है। विधि-विधान से पूजा करने के बाद, इस कपड़े को घर की तिजोरी या उस स्थान पर रखा जा सकता है, जहां धन और आभूषण रखे जाते हैं। माना जाता है कि इस उपाय से घर की शांति बनी रहती है और आर्थिक परेशानियों को दूर किया जा सकता है। ध्यान रखें कि ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इनके परिणामों की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।
पितरों के लिए भी श्रावण अमावस्या महत्वपूर्ण है
श्रावण अमावस्या भी कहलाता है, पितरों की शांति के लिए महत्वपूर्ण है। इस दिन कई स्थानों में पितरों को पवित्र नदी, सरोवर या अन्य जलाशय में स्नान करके तर्पण करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी क्षमतानुसार जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं दे सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सौहार्द्र बना रहता है।
पौधरोपण से जुड़ी है हरियाली अमावस्या
हरियाली अमावस्या को पूजा-पाठ के अलावा प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। आज कई जगह पेड़-पौधे लगाने की परंपरा देखने को मिलती है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार तुलसी, पीपल, नीम या अन्य आवश्यक पौधे लगा सकते हैं और नियमित रूप से उनकी देखभाल करने का निश्चय कर सकते हैं। इस तरह धार्मिक विश्वास पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करता है।
हरियाली अमावस्या पर सात्विकता और सम्मान रखें
हरियाली अमावस्या के दिन पूजा करते समय सकारात्मक और शांत रहना चाहिए। जरूरतमंदों को भोजन देना, गौसेवा करना, दान देना और पौधरोपण करना भी शुभ कार्यों में आता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धार्मिक उपायों को अंधविश्वास के स्थान पर परंपरा और आस्था के रूप में समझें। 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या पर भगवान शिव, माता पार्वती और मां लक्ष्मी का स्मरण करके परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जा सकती है।