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भारत की पहली करोड़पति गायिका गौहर जान की अनसुनी कहानी, जिन्होंने 1902 में पहला रिकॉर्ड बनाया और अपनी आवाज से पूरे देश को दीवाना बना दिया।
विशेष स्टोरी: जब भी भारत के संगीत इतिहास में सबसे अमीर, लोकप्रिय और दिग्गज गायकों का जिक्र होता है, तो अमूमन लोगों के जेहन में लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी या किशोर कुमार जैसे नाम आते हैं। लेकिन भारतीय संगीत उद्योग में पहला ‘करोड़पति सिंगर’ बनने का रिकॉर्ड किसी बॉलीवुड बैकग्राउंड वाले गायक के नाम नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला के नाम दर्ज है जिसने भारतीय सिनेमा के अस्तित्व में आने से दशकों पहले देश भर में अपनी गायकी का परचम लहराया था।
उन्हें अपने दौर में ‘ग्रामोफोन गर्ल’ और ‘भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार’ कहा जाता था। वह उस जमाने की सबसे महंगी और प्रभावशाली कलाकार थीं, जिनकी अमीरी और रुतबे के किस्से पूरे देश में मशहूर थे। हालांकि, जीवन के आखिरी पड़ाव में किस्मत ने ऐसी करवट ली कि शाही जिंदगी जीने वाली यह महान गायिका गुमनामी और कंगाली के साये में दुनिया से रुखसत हो गई।
एंजलिना से ‘गौहर जान’ बनने का संघर्षपूर्ण सफर
भारत की इस पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार का असली नाम एंजेलिना येवार्ड (Angelina Yeoward) था। उनका जन्म 26 जून 1873 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक अर्मेनियाई क्रिश्चियन परिवार में हुआ था। उनके पिता विलियम येवार्ड एक बर्फ फैक्ट्री में कार्यरत थे और उनकी मां विक्टोरिया एक प्रशिक्षित भारतीय नृत्यांगना व गायिका थीं।
एंजेलिना जब महज छह वर्ष की थीं, तब उनके माता-पिता का तलाक हो गया। इस कठिन मोड़ पर मां-बेटी बेसहारा हो गईं। इसके बाद उनकी मां विक्टोरिया ने खुर्शीद नाम के व्यक्ति से विवाह किया और दोनों ने इस्लाम धर्म अपना लिया। धर्म परिवर्तन के बाद मां विक्टोरिया ‘मलका जान’ और नन्हीं एंजलिना ‘गौहर जान’ के नाम से पहचानी जाने लगीं।
बनारस की तालीम और कलकत्ता के शाही दरबार में पहला कदम
तलाक और धर्म परिवर्तन के बाद मलका जान अपनी बेटी गौहर को लेकर सांस्कृतिक नगरी बनारस (वाराणसी) आ गईं। बनारस के संगीतमय माहौल में गौहर जान की प्रतिभा निखरने लगी। उनकी मां स्वयं एक स्थापित गायिका और नृत्यांगना बन चुकी थीं, जिन्हें लोग ‘बड़ी मलका जान’ के नाम से जानते थे।
वर्ष 1883 में यह परिवार कलकत्ता (अब कोलकाता) स्थानांतरित हो गया। कलकत्ता उस समय नवाब वाजिद अली शाह के निर्वासन के बाद संगीत और कला का एक बड़ा केंद्र बन चुका था। यहीं पर गौहर जान ने पटियाला घराने के उस्ताद काले खान, रामपुर के उस्ताद वजीर खान, और महान कथक गुरु बिंदादीन महाराज से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत, ध्रुपद और नृत्य की कठोर तालीम ली।
मात्र 15 वर्ष की आयु में, वर्ष 1888 में गौहर जान ने दरभंगा राज के शाही दरबार में अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी। उनकी अद्भुत प्रतिभा से प्रभावित होकर दरभंगा के महाराजा ने उन्हें अपने दरबार की राजकीय गायिका नियुक्त कर लिया। इसके बाद 1896 से उन्होंने कलकत्ता में नियमित रूप से सार्वजनिक प्रस्तुतियां देना शुरू कर दिया और जल्द ही पूरे भारत में उनकी गायकी का डंका बजने लगा।
1902 की ऐतिहासिक रिकॉर्डिंग: जब बनीं देश की पहली ‘ग्रामोफोन गर्ल’
20वीं सदी की शुरुआत में जब ‘ग्रामोफोन कंपनी’ भारत में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रही थी, तब उन्हें एक ऐसे आवाज की तलाश थी जो पूरे उपमहाद्वीप को मंत्रमुग्ध कर सके। 8 नवंबर 1902 को कलकत्ता के एक होटल में अस्थायी स्टूडियो बनाकर भारत की पहली ऑडियो रिकॉर्डिंग की गई।
गौहर जान भारत की पहली कलाकार बनीं जिन्होंने 78 RPM के रिकॉर्ड पर अपनी आवाज दर्ज कराई। उनका पहला रिकॉर्ड किया गया गाना खयाल शैली में था—”राग जोगिया: कन्हैया जी की मुरली बजाई”। अपने हर गाने के अंत में वे अंग्रेजी में अपनी पहचान दर्ज कराते हुए कहती थीं—”माई नेम इज गौहर जान” (My name is Gauhar Jaan)। 1902 से 1920 के बीच उन्होंने हिंदी, बंगाली, गुजराती, मराठी, तमिल, अरबी, फ़ारसी और अंग्रेजी समेत 10 से अधिक भाषाओं में 600 से भी ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए।
रईसी की मिसाल और अंतिम दिनों की दुखद दास्तान
गौहर जान का रुतबा ऐसा था कि वे उस दौर में एक गाना रिकॉर्ड करने या प्राइवेट महफिल में गाने की फीस 3,000 रुपये लेती थीं—जो उस जमाने में एक बहुत बड़ी संपत्ति के बराबर था, जब सोना ₹20 प्रति तोले के आसपास बिकता था। वे अपनी बग्घी, निजी ट्रेन के डिब्बों और बेशकीमती गहनों के लिए जानी जाती थीं।
लेकिन अफसोस, जीवन के अंतिम वर्षों में करीबियों, प्रेमियों और धोखेबाज कानूनी मुकदमों के कारण उनकी अपार संपत्ति धीरे-धीरे खत्म हो गई। अपने जीवन के आखिरी दिनों में वे मैसूर के महाराजा कृष्णराज वाडियार चतुर्थ के आमंत्रण पर मैसूर चली गईं और वहां की राज गायिका बनीं। 17 जनवरी 1930 को भारत की यह पहली करोड़पति और महान रिकॉर्डिंग सुपरस्टार कंगाली और गुमनामी के माहौल में इस दुनिया को अलविदा कह गईं।