ऑपरेशन सिंदूर : “ब्रह्मोस के आगे घुटनों पर था पाकिस्तान”, पूर्व DGP एस.पी. वैद ने भारत को बताया ‘ग्लोबल सुपरपावर’

ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी: "ब्रह्मोस के आगे घुटनों पर था पाकिस्तान", पूर्व DGP एस.पी. वैद ने भारत को बताया 'ग्लोबल सुपरपावर'

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगाँठ पर पूर्व DGP शेष पॉल वैद ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल और भारतीय सेना के पराक्रम ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया और भारत का कद दुनिया में एक ‘सुपरपावर’ के रूप में स्थापित किया।

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगाँठ: “भारत के ‘सुपरपावर’ बनने की मुहर”, पूर्व DGP एस.पी. वैद ने सेना के पराक्रम को सराहा

7 मई, 2025 का वह दिन भारतीय सैन्य इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज है, जब भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सीमा पार आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र को जड़ से हिला दिया था। आज इस ऐतिहासिक सैन्य अभियान की पहली वर्षगाँठ पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) शेष पॉल वैद और रक्षा विशेषज्ञों ने इस ऑपरेशन को भारत के वैश्विक “सुपरपावर” के रूप में उदय का क्षण बताया है।

ब्रह्मोस की दहाड़ और घुटनों पर पाकिस्तान

समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए पूर्व DGP शेष पॉल वैद ने ऑपरेशन सिंदूर के उन तकनीकी और सामरिक पहलुओं पर प्रकाश डाला, जिन्होंने दुनिया को हैरान कर दिया था। उन्होंने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के भीतर गहराई तक जाकर उसके 9 प्रमुख आतंकी शिविरों को नष्ट किया, और सबसे बड़ी बात यह रही कि इस “प्रिसिजन स्ट्राइक” में कोई भी नागरिक हताहत नहीं हुआ। वैद ने खुलासा किया कि जब पाकिस्तान ने बौखलाहट में भारत के नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाया, तो भारतीय वायुसेना और थल सेना ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 11 से 12 एयरबेस को पंगु बना दिया।

उन्होंने विशेष रूप से ‘ब्रह्मोस’ मिसाइल की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा, “पाकिस्तान ब्रह्मोस के सामने घुटनों पर आ गया था; उनके पास इस अचूक मारक क्षमता का कोई जवाब नहीं था। यह केवल मेरा आकलन नहीं है, बल्कि वैश्विक संघर्षों पर नजर रखने वाले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ भी इसे स्वीकार कर रहे हैं।” वैद के अनुसार, यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सशस्त्र बलों को दी गई “फ्री हैंड” नीति के कारण संभव हो सका।

पहलगाम के शहीदों को श्रद्धांजलि और सैन्य संकल्प

रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल राकेश शर्मा (रिटायर्ड) ने भी इस अवसर पर पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों को याद किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पाकिस्तान को दिया गया एक कठोर संदेश था। उन्होंने कहा, “मैं भारत माता के उन वीर सपूतों को सलाम करता हूं जिन्होंने महज चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को आत्मसमर्पण (सीजफायर के लिए विनती) करने पर मजबूर कर दिया। यह एक असाधारण ऑपरेशन था जिसने यह साबित किया कि भारत अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।”

88 घंटे का घटनाक्रम: 7 मई से 10 मई तक का महा-संग्राम

विदित हो कि पहलगाम हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान जाने के बाद भारत ने 7 मई, 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था। भारतीय सशस्त्र बलों ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन के उन ठिकानों को निशाना बनाया जो पीओजेके और पाकिस्तान के अंदर स्थित थे। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए।

जब पाकिस्तान ने ड्रोन और गोलाबारी से उकसाने की कोशिश की, तो भारत ने और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए लाहौर और गुजरांवाला के पास स्थित पाकिस्तानी रडार इंस्टॉलेशन को नष्ट कर दिया। भारी रणनीतिक क्षति के बाद, पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (DGMO) ने भारतीय समकक्ष से संपर्क किया और 10 मई को युद्धविराम की घोषणा हुई।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह: राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक

इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘X’ पर एक पोस्ट के माध्यम से सेना के बलिदान को नमन किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को “राष्ट्रीय संकल्प और तैयारियों का एक शक्तिशाली प्रतीक” बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ऑपरेशन आधुनिक सैन्य संचालन, सेवाओं के बीच तालमेल (Synergy) और ‘आत्मनिर्भरता’ की दिशा में भारत की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है। राजनाथ सिंह ने लिखा कि भारतीय सेना की इस कार्रवाई ने आधुनिक युद्ध के लिए नए मानक स्थापित किए हैं।

एक नया सामरिक युग

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगाँठ पर विशेषज्ञों का यह मानना है कि इस अभियान ने ‘रणनीतिक संयम’ की पुरानी परिभाषा को बदल दिया है। अब भारत न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करता है, बल्कि आतंकवाद के स्रोत पर प्रहार करने की क्षमता और इच्छाशक्ति भी रखता है। पूर्व DGP वैद का यह बयान कि “भारत का कद अब एक महाशक्ति के रूप में स्थापित हो गया है”, इस बात की पुष्टि करता है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के मामले में ‘नया भारत’ अब और अधिक मुखर और सक्षम है। यह दिन न केवल जीत का जश्न है, बल्कि उन 26 निर्दोष नागरिकों को न्याय मिलने का भी प्रतीक है जिन्होंने पहलगाम हमले में अपनी जान गंवाई थी।

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