केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में शासन को आधुनिक बनाने के लिए पांच प्रमुख राज्य कानूनों को विस्तार दिया है। इसमें रेंटल एग्रीमेंट, स्टाम्प ड्यूटी, फायर सेफ्टी और ट्रैवल एजेंटों पर लगाम कसने के लिए नए नियम शामिल हैं।
चंडीगढ़ में शासन व्यवस्था का आधुनिकीकरण: गृह मंत्रालय ने विस्तारित किए पांच महत्वपूर्ण राज्य कानून
चंडीगढ़: केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में शासन के ढांचे को आधुनिक बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और ‘ईज ऑफ लिविंग’ (सुखद जीवन) व ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार में सुगमता) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच प्रमुख राज्य कानूनों को विस्तार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा बुधवार को जारी पांच अलग-अलग सूचनाओं के माध्यम से इन सुधारों को लागू किया गया। ये बदलाव पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 की धारा 87 के तहत किए गए हैं, जो केंद्र को अन्य राज्यों के उपयुक्त कानूनों को चंडीगढ़ तक विस्तारित करने की शक्ति प्रदान करता है।
संपत्ति मूल्यांकन और स्टाम्प ड्यूटी में पारदर्शिता
इन सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण इंडियन स्टाम्प (पंजाब संशोधन) अधिनियम, 2001 और 2003 का विस्तार है। इसका प्राथमिक उद्देश्य संपत्ति के मूल्यांकन के ढांचे को मजबूत करना और स्टाम्प ड्यूटी के संग्रह को सुव्यवस्थित करना है। नए प्रावधानों के तहत, अब संपत्ति के लेन-देन में कम मूल्यांकन (undervaluation) का पता लगाने और उसे सुधारने के लिए कड़े तंत्र विकसित किए गए हैं। इससे न केवल कर चोरी पर अंकुश लगेगा, बल्कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता भी आएगी, जिससे खरीदारों और सरकार दोनों के हितों की रक्षा होगी।
ग्रामीण और आबादी क्षेत्रों के लिए मालिकाना हक (Abadi Deh Act)
चंडीगढ़ के उन हिस्सों के लिए जो पारंपरिक रूप से औपचारिक भूमि रिकॉर्ड से बाहर रहे हैं, केंद्र ने पंजाब आबादी देह (अधिकारों का रिकॉर्ड) अधिनियम, 2021 को लागू किया है। यह कानून बसावट वाले क्षेत्रों (आबादी देह) में स्वामित्व अधिकारों के सर्वेक्षण और रिकॉर्डिंग के लिए एक आधुनिक कानूनी ढांचा तैयार करता है। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से भूमि विवादों में कमी आएगी, मालिकाना हक में स्पष्टता आएगी और नियोजित शहरी विकास को गति मिलेगी। यह उन निवासियों के लिए एक बड़ी राहत है जिनके पास अपनी संपत्तियों के आधिकारिक दस्तावेज नहीं थे।
ट्रैवल एजेंटों पर नकेल और मानव तस्करी पर रोक
नागरिकों, विशेष रूप से छात्रों और नौकरी चाहने वालों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए, पंजाब मानव तस्करी रोकथाम अधिनियम, 2012 (और 2014 का संशोधन) अब चंडीगढ़ में भी प्रभावी होगा। यह कानून ट्रैवल एजेंटों के लिए एक नियामक ढांचा स्थापित करता है, जिसमें अनिवार्य लाइसेंसिंग, प्रवर्तन और दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं। हाल के वर्षों में अवैध अप्रवासन और धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों को देखते हुए, यह कानून संदिग्ध एजेंटों पर लगाम कसने और मानव तस्करी को रोकने में मील का पत्थर साबित होगा।
अग्नि सुरक्षा मानकों का आधुनिकीकरण (Fire Safety Act)
चंडीगढ़ की सुरक्षा व्यवस्था को अपग्रेड करते हुए हरियाणा अग्नि और आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 को विस्तारित किया गया है। इसने पुराने कानूनी ढांचे की जगह ली है और अब एक जोखिम-आधारित आधुनिक अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पेश की है। इस कानून के तहत अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्रों (Fire Safety Certificates) की वैधता अवधि बढ़ाई गई है और अनुमोदन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। यह सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना अनुपालन के बोझ को कम करता है, जिससे व्यवसायों और निवासियों के लिए प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
किराएदारी सुधार: असम किरायेदारी अधिनियम, 2021
आवास क्षेत्र में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में, असम किरायेदारी अधिनियम, 2021 को चंडीगढ़ में लागू किया गया है, जो मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 के अनुरूप है। इसने पुराने ‘ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रिस्ट्रिक्शन एक्ट, 1949’ की जगह ली है। नया कानून औपचारिक किरायेदारी समझौतों को अनिवार्य बनाता है और मकान मालिकों व किरायेदारों के अधिकारों व दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है। इसमें विवाद समाधान के लिए समयबद्ध प्रक्रिया और संरचित बेदखली प्रक्रियाएं शामिल हैं। उम्मीद है कि इससे रेंटल हाउसिंग मार्केट में विश्वास बढ़ेगा और खाली पड़े घरों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
कुशल शासन की ओर एक कदम
ये सामूहिक सुधार चंडीगढ़ के मौजूदा कानूनी ढांचे में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन कानूनों के विस्तार से न केवल नियामक स्पष्टता आएगी, बल्कि नागरिकों को बेहतर सुरक्षा और कुशल शासन का अनुभव होगा। पारदर्शिता और आधुनिकीकरण पर केंद्रित ये कदम चंडीगढ़ को भविष्य के एक स्मार्ट और सुरक्षित शहर के रूप में स्थापित करने की केंद्र की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।