E20 ईंधन को लेकर अरविंद केजरीवाल ने मोदी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पर्याप्त तैयारी के बिना E20 को देश पर थोपा जा रहा है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने E20 ईंधन को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि दुनिया के कई देशों ने E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लागू करने से पहले लंबे समय तक इसके प्रभावों का अध्ययन किया और चरणबद्ध तरीके से बदलाव किया, लेकिन भारत में मोदी सरकार ने पर्याप्त तैयारी के बिना इसे लागू करने में जल्दबाजी की। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर केंद्र सरकार देश में E20 ईंधन को क्यों लागू करने पर जोर दे रही है।
केजरीवाल ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए E20 ईंधन को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग देशों ने E20 ईंधन की ओर बढ़ने से पहले इसके प्रभावों का अध्ययन किया और उसके बाद धीरे-धीरे बदलाव किया। इसके विपरीत, उनके मुताबिक मोदी सरकार ने पर्याप्त तैयारी और व्यापक अध्ययन के बिना ही E20 को देश में लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी।
E20 क्या है?
Why is Modi Govt forcing E20 on the nation?
While countries around the world took time to study and transition to E20 fuel, Modi govt on the other hand has been impatient by forcing E20 without adequate preparation.@ArvindKejriwal pic.twitter.com/v9gXOgrhVa
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 7, 2026
E20 पेट्रोल ऐसा ईंधन है जिसमें पेट्रोल के साथ 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जाता है। भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा देने का उद्देश्य आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और देश में उत्पादित इथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ाना है। हालांकि, E20 के इस्तेमाल को लेकर वाहन मालिकों और ऑटोमोबाइल क्षेत्र में इसके प्रभावों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।
‘पर्याप्त तैयारी के बिना लागू करने’ का आरोप
केजरीवाल ने अपने बयान में सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा कि दूसरे देशों ने E20 को लागू करने से पहले समय लिया और इसके प्रभावों का अध्ययन किया। उनका आरोप है कि भारत में इसके विपरीत सरकार ने पर्याप्त तैयारी के बिना E20 को आगे बढ़ाया। हालांकि, अपने बयान में केजरीवाल ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किन देशों और किन विशेष अध्ययनों का हवाला दे रहे हैं।
E20 को लेकर क्यों हो रही है बहस?
E20 ईंधन को लेकर मुख्य बहस इसके पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों के साथ-साथ वाहनों पर संभावित प्रभावों को लेकर है। समर्थकों का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण से पेट्रोल में जीवाश्म ईंधन की हिस्सेदारी कम करने और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है। वहीं, आलोचक पुराने वाहनों के इंजन, ईंधन दक्षता और वाहन के रखरखाव पर संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।
सरकार की E20 नीति पर राजनीतिक टकराव
E20 का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है। अरविंद केजरीवाल के ताजा बयान में केंद्र सरकार की ईंधन नीति और उसे लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। केजरीवाल का कहना है कि सरकार को किसी भी बड़े ईंधन बदलाव से पहले पर्याप्त तैयारी, विस्तृत अध्ययन और उसके प्रभावों का आकलन करना चाहिए। उनके बयान के बाद E20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस फिर तेज होने की संभावना है।