Air India की फ्लाइट में टर्बुलेंस से 17 यात्री घायल हुए। जानें टर्बुलेंस क्यों होता है, क्या पायलट इसे रोक सकते हैं और सीट बेल्ट क्यों जरूरी है।
फुकेत से उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की एक फ्लाइट में टर्बुलेंस के कारण 17 यात्रियों के घायल होने की घटना के बाद सोशल मीडिया पर एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने घटना के लिए सीधे एयर इंडिया को जिम्मेदार ठहराया, जबकि कई अन्य ने विमान, पायलट और एयरलाइन के रखरखाव पर सवाल उठाए। हालांकि, विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि टर्बुलेंस एक प्राकृतिक मौसम संबंधी घटना है, जिसे हमेशा पायलट या एयरलाइन पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर सकते। इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर टर्बुलेंस क्यों होता है और क्या इसे विमान पूरी तरह से टाल सकता है?
सोशल मीडिया पर एयर इंडिया को लेकर नाराजगी
घटना के बाद विमान के अंदर की स्थिति से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आए। इसके बाद कई यूजर्स ने एयर इंडिया की आलोचना शुरू कर दी। कुछ लोगों ने एयरलाइन के बहिष्कार की मांग की तो कुछ ने इसकी तुलना सड़क परिवहन की बसों से तक कर दी। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में एयर इंडिया के पायलटों और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। एक यूजर ने मांग की कि नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) को यह जांच करनी चाहिए कि मौसम संबंधी जानकारी, सीट बेल्ट प्रोटोकॉल और क्रू की प्रतिक्रिया पर्याप्त थी या नहीं। हालांकि, इन टिप्पणियों में टर्बुलेंस की वास्तविक प्रकृति को लेकर कई गलत धारणाएं भी दिखाई दीं।
टर्बुलेंस आखिर होता क्या है?
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, टर्बुलेंस हवा की गति, दबाव और दिशा में अचानक होने वाले बदलाव के कारण उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक घटना है। जब विमान अलग-अलग गति से चलने वाले वायु प्रवाह या एयर मास के बीच से गुजरता है तो विमान को अचानक ऊपर-नीचे होने या झटके महसूस हो सकते हैं। हल्के टर्बुलेंस में यात्रियों को मामूली कंपन महसूस होता है, जबकि गंभीर टर्बुलेंस की स्थिति में विमान कुछ समय के लिए अचानक ऊंचाई खो सकता है। ऐसी स्थिति में सीट बेल्ट नहीं पहने यात्रियों को चोट लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
हर टर्बुलेंस को रडार पर नहीं देखा जा सकता
विमानन वैज्ञानिक वेणु गणपुरम के मुताबिक, विमान के लिए हवा के दबाव का समान वितरण महत्वपूर्ण होता है। किसी क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर हवा के दबाव में अंतर होने पर टर्बुलेंस पैदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि पायलटों को उड़ान से पहले निर्धारित मार्ग के मौसम की जानकारी दी जाती है। यदि किसी क्षेत्र में बारिश या संभावित टर्बुलेंस की जानकारी पहले से उपलब्ध हो, तो पायलट उसके अनुसार तैयारी कर सकते हैं। लेकिन हर टर्बुलेंस का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं होता।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ‘क्लियर एयर टर्बुलेंस’ यानी साफ आसमान में होने वाला टर्बुलेंस विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि इसे सामान्य मौसम संबंधी संकेतों या रडार के जरिए हमेशा आसानी से पहचाना नहीं जा सकता। यही वजह है कि विमान के अंदर यात्रियों के लिए सीट बेल्ट बांधकर रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
खराब मौसम और टर्बुलेंस में अंतर समझना जरूरी
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि पायलट ने खराब मौसम वाले क्षेत्र से विमान को दूसरी दिशा में क्यों नहीं मोड़ा। विशेषज्ञों के मुताबिक, खराब मौसम और टर्बुलेंस को एक ही चीज मानना सही नहीं है। आधुनिक विमान खराब मौसम की कई परिस्थितियों में सुरक्षित तरीके से उड़ान भरने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। यदि कोई तूफान या मौसम संबंधी क्षेत्र बेहद गंभीर हो तो पायलट निर्धारित मार्ग में बदलाव कर उससे बचने का प्रयास कर सकते हैं। लेकिन अचानक उत्पन्न होने वाले टर्बुलेंस को हर बार पूरी तरह टालना संभव नहीं होता।
पायलट टर्बुलेंस के दौरान क्या करते हैं?
वेणु गणपुरम के अनुसार, टर्बुलेंस की स्थिति में पायलट विमान को स्थिर रखने के लिए उपलब्ध प्रक्रियाओं और प्रशिक्षण का इस्तेमाल करते हैं। कई बार मौसम में अचानक बदलाव होने से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है जिसका अनुमान उड़ान शुरू होने से पहले नहीं लगाया गया था। ऐसे मामलों में पायलट पूरी कोशिश करते हैं कि विमान को सुरक्षित और नियंत्रित स्थिति में रखा जाए। हालांकि, हर परिस्थिति में टर्बुलेंस से पूरी तरह बचना संभव नहीं होता।
सीट बेल्ट ही यात्रियों की सबसे बड़ी सुरक्षा
विशेषज्ञों ने इस घटना के बाद यात्रियों को सीट बेल्ट को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। पूर्व एयर मार्शल संजीव कपूर ने भी कहा कि टर्बुलेंस के दौरान सबसे गंभीर चोटें अक्सर उन यात्रियों को लगती हैं, जो सीट बेल्ट नहीं लगाए होते। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि जब भी विमान में ‘Fasten Seat Belt’ का संकेत चालू हो, सीट बेल्ट जरूर बांधें और पायलट तथा केबिन क्रू के निर्देशों का पालन करें।
उड़ान के दौरान सीट बेल्ट क्यों जरूरी है?
डिजिटल क्रिएटर अंश मेहरा ने भी घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए यात्रियों की सीट बेल्ट आदतों पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि टर्बुलेंस के दौरान विमान अचानक काफी ऊंचाई खो सकता है और ऐसी स्थिति में बिना सीट बेल्ट बैठे यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई यात्री सीट बेल्ट का संकेत चालू होने के बावजूद अपनी सीट छोड़कर गलियारे में घूमते रहते हैं। जबकि केबिन क्रू बार-बार यात्रियों को अपनी सीट पर बैठने और सीट बेल्ट लगाने की सलाह देता है।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ सकता है टर्बुलेंस का खतरा
विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन को भी बढ़ते टर्बुलेंस की संभावित वजहों में शामिल किया है। भारत का एक बड़ा हिस्सा इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन (ITCZ) से प्रभावित होता है, जहां अलग-अलग वायु धाराओं के कारण मौसम में तेजी से बदलाव हो सकते हैं। वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव हो रहा है, जिससे भविष्य में कुछ क्षेत्रों में टर्बुलेंस की घटनाएं बढ़ने की आशंका जताई जाती है।
घटना से यात्रियों के लिए क्या सीख मिलती है?
एयर इंडिया की इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर एयरलाइन की आलोचना और समर्थन दोनों देखने को मिले। हालांकि, विशेषज्ञों की राय का मुख्य संदेश यही है कि टर्बुलेंस को हमेशा एयरलाइन की लापरवाही मानना सही नहीं है। यह प्राकृतिक और कई बार अप्रत्याशित मौसम संबंधी घटना हो सकती है। यात्रियों की सुरक्षा में पायलट और केबिन क्रू की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन यात्रियों को भी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए। खासकर सीट बेल्ट का संकेत चालू होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, टर्बुलेंस से पूरी तरह बचना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन सही प्रशिक्षण, मौसम संबंधी जानकारी और यात्रियों द्वारा सुरक्षा नियमों का पालन चोट के जोखिम को काफी कम कर सकता है।