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डॉलर vs रुपये: सोमवार के शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे मजबूत होकर 88.74 प्रति डॉलर पर पहुंच गया है। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 8 पैसे कमजोर होकर 88.79 पर बंद हुआ था। रुपया मजबूत होने से भारत की विदेशी आयात लागत और मुद्रास्फीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे आयातित वस्तुओं की कीमतों में कमी आ सकती है।
रुपए में तेजी के कारण क्या हैं?
रुपए में आई इस मजबूती के पीछे प्रमुख कारण इस सप्ताह आने वाले बड़े आईपीओ हैं। टाटा कैपिटल, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स और पहले से जारी वीवर्क के आईपीओ में विदेशी निवेशकों से लगभग 31,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है। यह विदेशी निवेश रुपए को मजबूती प्रदान कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह रुपए में 30 से 40 पैसे तक की तेजी देखी जा सकती है।
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भारत-अमेरिका के बीच जारी ट्रेड वार्ता का असर
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता भी रुपए की चाल पर प्रभाव डाल रही है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के लिए सम्मान और उचित स्थितियां जरूरी हैं। हालांकि अभी तक वार्ता का कोई अंतिम नतीजा नहीं निकला है, लेकिन सकारात्मक परिणाम से रुपए को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
रुपये की भविष्य की चाल कैसी रहेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, वीवर्क, टाटा कैपिटल और एलजी जैसे बड़े आईपीओ के चलते रुपया 88.50 के स्तर तक पहुंच सकता है। इस सप्ताह घरेलू शेयर बाजार और करेंसी मार्केट दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, और निवेशकों को रुपया मजबूत होने की संभावना के साथ लाभ मिलने की उम्मीद है।