दिल्ली में भीषण जल संकट से जनता त्रस्त। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के शासनकाल में पानी की स्थिति बेहतर थी, जबकि वर्तमान में अव्यवस्था बढ़ गई है।
भीषण गर्मी के बीच दिल्ली इन दिनों गंभीर जल संकट की चपेट में है। राजधानी के कई इलाकों में नलों में पानी की आपूर्ति ठप होने से आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। पानी की किल्लत से जूझ रहे लोग अब पुरानी व्यवस्था को याद कर रहे हैं। कई निवासियों का स्पष्ट मानना है कि “जब अरविंद केजरीवाल सत्ता में थे, तब पानी की आपूर्ति व्यवस्था काफी बेहतर और सुव्यवस्थित थी, लेकिन वर्तमान में हालात पूरी तरह से बदल गए हैं।”
जनता की नाराजगी और पुरानी यादें
“जब तक केजरीवाल थे, खूब बढ़िया पानी आता था। लेकिन जबसे बीजेपी आई है कुछ ठीक नहीं है।” pic.twitter.com/csZlvDXh13
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) June 1, 2026
दिल्ली के दक्षिण और मध्य क्षेत्रों में लोगों का कहना है कि जल आपूर्ति की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। एक स्थानीय निवासी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा, “केजरीवाल जी के कार्यकाल में हमें पानी के लिए इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता था, लेकिन अब न केवल आपूर्ति बाधित है, बल्कि टैंकरों के लिए भी घंटों लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है।”
सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में भी लोग अरविंद केजरीवाल के दौर की जल प्रबंधन योजनाओं और वर्तमान स्थिति के बीच तुलना कर रहे हैं। निवासियों का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड की सेवाओं में भारी गिरावट आई है और शिकायतों के बावजूद उन्हें त्वरित समाधान नहीं मिल पा रहा है।
अस्थिर आपूर्ति और बढ़ता आक्रोश
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में पानी की दैनिक मांग 1,250 MGD (मिलियन गैलन प्रतिदिन) है, जबकि आपूर्ति घटकर 900 MGD के आसपास सिमट गई है। यमुनोत्री बैराज और वजीराबाद में जल स्तर गिरने से स्थिति और विकट हो गई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने समीक्षा बैठकें की हैं और पड़ोसी राज्यों से पानी की मांग तेज की है, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता को राहत अभी भी दूर दिखाई दे रही है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर
जल संकट पर राजनीति भी पूरी तरह से गरमा गई है। आम आदमी पार्टी का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की दूरदर्शी और जन-हितैषी नीतियों को वर्तमान सरकार ने सही ढंग से लागू नहीं किया, जिसके कारण आज दिल्ली को इस भयावह संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने भीषण गर्मी के दबाव और कच्चे पानी की कमी को इस संकट का मुख्य कारण बताया है। इन सबके बीच, दिल्ली की जनता के लिए यह स्पष्ट है कि उनके घरों में पानी की बूंद-बूंद के लिए संघर्ष अब उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक दुखद हिस्सा बन गया है।