साकेत बिल्डिंग हादसा: AAP पार्षदों का साउथ ज़ोन डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर बरसे

साकेत बिल्डिंग हादसा: AAP पार्षदों का साउथ ज़ोन डीसी ऑफिस पर प्रदर्शन, अवैध निर्माण और भ्रष्टाचार पर बरसे

 

 

साकेत बिल्डिंग हादसे के खिलाफ आम आदमी पार्टी ने साउथ ज़ोन डीसी कार्यालय का घेराव किया। अवैध निर्माण और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के निलंबन की मांग की।

 

दिल्ली के साकेत इलाके में हाल ही में हुए दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद आम आदमी पार्टी (AAP) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को बड़ी संख्या में AAP पार्षद साउथ ज़ोन के उपायुक्त (DC) के कार्यालय पहुँचे और हादसे व क्षेत्र में जारी अवैध निर्माणों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। पार्षदों का आरोप है कि डीसी कार्यालय ने उनकी शिकायतों पर ध्यान देने के बजाय उनसे भागना उचित समझा, जिससे आक्रोशित होकर उन्होंने कार्यालय के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और परिसर के बाहर धरना प्रदर्शन किया।

अवैध निर्माण और मिलीभगत का गंभीर आरोप

AAP नेताओं ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर प्रशासनिक मिलीभगत को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि साकेत और उसके आसपास के क्षेत्रों में हो रहे अवैध निर्माणों को सत्ताधारी दल के नेताओं और जिम्मेदार अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है। पार्टी का कहना है कि साकेत हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारी और अवैध निर्माण को फलने-फूलने देने वाले डीसी, न केवल जन सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि दिल्ली को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे हैं। नेताओं ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन को अवैध निर्माणों की जानकारी होती है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

डीसी और दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग

प्रदर्शन के दौरान पार्षदों ने स्पष्ट मांग की कि साकेत बिल्डिंग हादसे में शामिल सभी दोषी अधिकारियों और अवैध निर्माण को बढ़ावा देने वाले साउथ ज़ोन के डीसी को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए। AAP का दावा है कि वर्तमान व्यवस्था में जनता के घरों और उनके जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। प्रदर्शनकारी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो यह संघर्ष और तेज होगा।

क्या है मामला?

गौरतलब है कि साकेत मेट्रो स्टेशन के पास एक बहुमंजिला इमारत के ढहने से छह लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई थी। इस हादसे के बाद से ही पूरे इलाके में अवैध निर्माण और नगर निगम के सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी को लेकर भारी जन आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की होती, तो यह जानलेवा हादसा टाला जा सकता था। फिलहाल, इस प्रदर्शन ने निगम प्रशासन की कार्यशैली पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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