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दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की रोजाना निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर मेडिकल सहायता देने का निर्देश दिया है।
देश की राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों के मुख्य केंद्र जंतर-मंतर पर एक बार फिर बड़ी कानूनी और सामाजिक हलचल देखने को मिल रही है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला सुनाते हुए सरकारी अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि वे जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की दैनिक आधार पर (डेली बेसिस पर) निगरानी करें। इसके साथ ही अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि यदि वांगचुक को किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता होती है, तो उसे तुरंत बिना किसी देरी के उपलब्ध कराया जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की एक पीठ ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि “मानव जीवन अनमोल है” और किसी भी परिस्थिति में इसे जोखिम में नहीं डाला जा सकता। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकारी डॉक्टरों की टीम द्वारा वांगचुक की शारीरिक स्थिति की नियमित जांच की जानी चाहिए।
अदालत में सरकार का पक्ष और सॉलिसिटर जनरल का बयान
इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के समक्ष सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कोर्ट को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन सरकार के लिए अत्यंत कीमती है। उन्होंने कहा कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित जांच और मेडिकल चेकअप कराने में सरकार को किसी भी प्रकार की कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि प्रशासन उनके स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
सॉलिसिटर जनरल के इस सकारात्मक रुख की कोर्ट ने भी सराहना की। अदालत ने अपने आदेश में कहा, “हम इस बात को रेखांकित करते हैं कि किसी भी नागरिक का जीवन अमूल्य है और इसे बचाने के लिए सरकारी अधिकारियों द्वारा हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। हम सॉलिसिटर जनरल द्वारा व्यक्त किए गए रुख की सराहना करते हैं और निर्देश देते हैं कि वांगचुक की चिकित्सा स्थिति की दैनिक आधार पर निगरानी की जाए और जो भी आवश्यक चिकित्सीय हस्तक्षेप हो, वह तुरंत किया जाए।”
जनहित याचिका (PIL) पर कोर्ट का त्वरित एक्शन
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह संवेदनशील और बड़ा आदेश सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य को लेकर दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के सामने यह चिंता जताई थी कि वांगचुक कई दिनों से बिना कुछ खाए-पिए अनशन पर बैठे हैं, जिससे उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर बुरा असर पड़ सकता है। अगर समय रहते उनके स्वास्थ्य की उचित देखभाल नहीं की गई, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। कोर्ट ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को बेहद गंभीर माना और तुरंत इस पर अंतरिम दिशा-निर्देश जारी कर दिए।
नीट (NEET) परीक्षा विवाद और कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन
सोनम वांगचुक का यह अनशन एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे से जुड़ा हुआ है। दरअसल, जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले 25 से अधिक दिनों से लगातार एक बड़ा विरोध-प्रदर्शन कर रही है। इस प्रदर्शन की मुख्य मांग राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। छात्र संगठन और राजनीतिक कार्यकर्ता इस परीक्षा के आयोजन पर लगातार सवाल उठा रहे हैं और केंद्रीय मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
सोनम वांगचुक के अनशन के दिन और आंदोलन को मिला बल
लद्दाख के पर्यावरण और देश के युवाओं के मुद्दों को मुखरता से उठाने वाले सोनम वांगचुक 28 जून को जंतर-मंतर पर चल रहे इस छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे। आंदोलन की गंभीरता और छात्रों के भविष्य को देखते हुए उन्होंने उसी दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Indefinite Fast) शुरू कर दी थी। वांगचुक के इस कदम के बाद इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई धार मिली है। मनोरंजन जगत से लेकर कई बड़ी हस्तियों और आम जनता का समर्थन भी उन्हें लगातार मिल रहा है। अब कोर्ट के इस दखल के बाद यह सुनिश्चित हो गया है कि प्रशासन उनकी सेहत पर चौबीसों घंटे नजर रखेगा।