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भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने टोक्यो में क्वाड IPLN अभ्यास पूरा किया। जानें मानवीय सहायता, आपदा राहत और लॉजिस्टिक्स सहयोग को लेकर चारों देशों की नई तैयारी।
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। चारों देशों ने जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) को लेकर टेबलटॉप अभ्यास पूरा किया है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या किसी बड़े मानवीय संकट की स्थिति में चारों देशों के मौजूदा लॉजिस्टिक्स संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और आपसी समन्वय सुनिश्चित करना था। भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस दौरान नेटवर्क के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं यानी SOPs तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इन SOPs के माध्यम से IPLN को एक व्यवस्थित और औपचारिक संस्थागत ढांचा देने की तैयारी की जा रही है।
3 और 4 सितंबर को हुआ टेबलटॉप अभ्यास
जापान के रक्षा मंत्रालय की मेजबानी में यह अभ्यास 3 और 4 सितंबर को आयोजित किया गया। इसमें प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी कई काल्पनिक परिस्थितियां तैयार की गईं, ताकि यह समझा जा सके कि संकट की स्थिति में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया अपने उपलब्ध लॉजिस्टिक्स संसाधनों को किस तरह एक-दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं। अभ्यास में राहत सामग्री की आवाजाही, परिवहन, संसाधनों के इस्तेमाल और आपातकालीन प्रतिक्रिया के दौरान समन्वय जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य चारों देशों की परिचालन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना था। यानी जरूरत पड़ने पर अलग-अलग देशों की व्यवस्थाएं एक-दूसरे के साथ प्रभावी ढंग से काम कर सकें और राहत अभियान में किसी तरह की अनावश्यक देरी न हो।
पहले अभ्यास के बाद आगे बढ़ा सहयोग
टोक्यो में आयोजित यह अभ्यास IPLN के तहत होने वाली गतिविधियों की एक अगली महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले अप्रैल 2025 में हवाई में नेटवर्क का पहला टेबलटॉप अभ्यास आयोजित किया गया था। इसके बाद दिसंबर में गुआम में फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज हुई थी। इन गतिविधियों के जरिए क्वाड देश आपदा राहत अभियानों के दौरान वास्तविक परिस्थितियों में सहयोग की अपनी क्षमता को परख रहे हैं। टोक्यो अभ्यास में प्रतिनिधिमंडलों ने संभावित संकट के दौरान तत्काल प्रतिक्रिया देने और आपातकालीन राहत अभियानों के बेहतर समन्वय को लेकर भी चर्चा की। बैठक के दौरान हाल में बाढ़ से प्रभावित लोगों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की गई, जिससे इस पहल के मानवीय उद्देश्य को रेखांकित किया गया।
2024 में हुई थी IPLN की शुरुआत
इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की शुरुआत सितंबर 2024 में क्वाड नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान एक नागरिक पहल के तौर पर की गई थी। इसका मकसद चारों सदस्य देशों के मौजूदा लॉजिस्टिक्स संसाधनों का इस्तेमाल मानवीय सहायता और आपदा राहत यानी HADR अभियानों के लिए करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है। यहां चक्रवात, बाढ़, भूकंप, सुनामी और अन्य प्राकृतिक आपदाएं समय-समय पर बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे में किसी एक देश की क्षमता सीमित पड़ने पर साझेदार देशों के संसाधनों का तेजी से इस्तेमाल प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत-चीन संबंधों में नरमी के बीच क्वाड की सक्रियता
दिलचस्प बात यह है कि टोक्यो में IPLN अभ्यास ऐसे समय में हुआ है, जब भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान बैठक हुई थी। शी जिनपिंग की भारत यात्रा कई वर्षों के बाद हुई, जिसे दोनों देशों के संबंधों में संवाद बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देखा गया। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-चीन सीमा पर शांति और स्थिरता को द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के लिए जरूरी बताया। उन्होंने मौजूदा समझौतों और दोनों देशों के बीच बनी सहमतियों का पालन करने पर भी जोर दिया।
सीमा विवाद के साथ सहयोग बढ़ाने पर चीन का जोर
दूसरी ओर, चीन ने दोनों देशों के संबंधों में समानांतर प्रगति की रणनीति पर जोर दिया है। बीजिंग का कहना है कि सीमा विवाद के समाधान के प्रयासों के साथ-साथ द्विपक्षीय सहयोग को भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए। दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक संवाद तंत्रों की उपयोगिता को भी स्वीकार किया है। इस संदर्भ में 25 अगस्त को हुई विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता और 6-7 सितंबर को वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के स्तर पर हुई फ्लैग मीटिंग का उल्लेख भी महत्वपूर्ण है। इससे संकेत मिलता है कि सीमा पर तनाव कम करने के साथ संवाद के रास्ते खुले रखने पर जोर दिया जा रहा है।
क्वाड को सैन्य गठबंधन नहीं मानता भारत
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि क्वाड कोई सैन्य गठबंधन नहीं है। इसका सहयोग समुद्री सुरक्षा के अलावा महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों, मानवीय सहायता, आपदा राहत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। हालांकि, चीन क्वाड को अक्सर चीन को सीमित करने की रणनीति से जोड़कर देखता है, लेकिन भारत इस धारणा को खारिज करता रहा है। IPLN इसी दृष्टिकोण का एक उदाहरण है, जिसमें सैन्य कार्रवाई के बजाय प्राकृतिक आपदा और मानवीय संकट के दौरान संसाधनों और क्षमताओं को साझा करने पर जोर दिया गया है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है IPLN?
भारत के लिए इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपदा राहत अभियानों में पहले से सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। क्वाड के माध्यम से अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ लॉजिस्टिक्स सहयोग बढ़ने से किसी बड़े संकट के समय राहत सामग्री और जरूरी संसाधनों को तेजी से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की क्षमता मजबूत हो सकती है। खास बात यह है कि भारत एक तरफ चीन के साथ सीमा और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने के लिए संवाद आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ क्वाड के साथ व्यावहारिक सहयोग को भी मजबूत कर रहा है। इससे भारत की बहुस्तरीय विदेश नीति का संकेत मिलता है, जिसमें पड़ोसी देशों के साथ संवाद और हिंद-प्रशांत साझेदारों के साथ सहयोग दोनों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है।