Delhi Bicycle Scam: सौरभ भारद्वाज का रेखा गुप्ता सरकार पर बड़ा आरोप, 1.30 लाख साइकिलों की खरीद में ₹90 करोड़ के घोटाले का दावा

Delhi Bicycle Scam: सौरभ भारद्वाज का रेखा गुप्ता सरकार पर बड़ा आरोप, 1.30 लाख साइकिलों की खरीद में ₹90 करोड़ के घोटाले का दावा

सौरभ भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार पर गरीब छात्राओं के लिए खरीदी गई 1.30 लाख साइकिलों में कथित अनियमितता का आरोप लगाया। AAP ने कीमत और गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

दिल्ली में गरीब छात्राओं को बांटी जा रही साइकिलों की खरीद को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी सरकार के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार पर साइकिल खरीद में बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगाया है। भारद्वाज का दावा है कि दिल्ली सरकार ने गरीब छात्राओं के लिए करीब 1.30 लाख साइकिलें खरीदीं और प्रत्येक साइकिल के लिए 6,957 रुपये का भुगतान किया गया। AAP का आरोप है कि बाजार में समान या मिलती-जुलती साइकिल करीब 4,200 रुपये में उपलब्ध है। इन दावों को लेकर पार्टी ने सरकार से खरीद प्रक्रिया और कीमत का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। उपलब्ध रिपोर्टों में भी AAP द्वारा 4,200 रुपये और 6,957 रुपये के बीच कीमत के अंतर को लेकर सवाल उठाए जाने की पुष्टि होती है।

सौरभ भारद्वाज ने साइकिलों की गुणवत्ता पर उठाए सवाल

 

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि सरकार द्वारा छात्राओं को बांटी जा रही साइकिल और AAP द्वारा बाजार से खरीदी गई साइकिल को आमने-सामने रखकर तुलना की गई। उनके मुताबिक, दोनों साइकिलों की कीमत और पार्ट्स में बड़ा अंतर दिखाई देता है। AAP नेता ने आरोप लगाया कि सरकारी साइकिलों में स्थानीय और अपेक्षाकृत सस्ते टायर तथा रिम लगाए गए हैं, जबकि बाजार से खरीदी गई साइकिल में बेहतर गुणवत्ता वाले पार्ट्स हैं। उन्होंने ब्रेक लीवर और टायर की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए। AAP का कहना है कि जब सरकार बड़ी संख्या में साइकिलें एक साथ खरीदती है तो उसे बाजार कीमत से बेहतर दर मिलनी चाहिए, लेकिन यहां कथित तौर पर इसके उलट स्थिति दिखाई दे रही है।

₹4,200 की साइकिल बनाम ₹6,957 की खरीद

AAP के आरोपों का सबसे बड़ा आधार साइकिल की कीमत में कथित अंतर है। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, उनकी पार्टी ने एक साइकिल बाजार से 4,200 रुपये में खरीदी, जिसमें टैक्स भी शामिल था। दूसरी ओर, दिल्ली सरकार द्वारा खरीदी गई साइकिल की कीमत 6,957 रुपये प्रति यूनिट बताई जा रही है। इस हिसाब से दोनों कीमतों के बीच करीब 2,757 रुपये का अंतर बैठता है। AAP इस अंतर को लेकर सरकार से सवाल कर रही है कि जब बाजार में कम कीमत पर साइकिल उपलब्ध है तो सरकारी खरीद में प्रति साइकिल इतनी अधिक राशि क्यों खर्च की गई। हालांकि, यह अंतर अपने आप में घोटाले का प्रमाण नहीं है; इसकी वास्तविक वजह जानने के लिए टेंडर की शर्तों, तकनीकी स्पेसिफिकेशन, टैक्स, वारंटी, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।

‘Skyler’ मॉडल को लेकर भी AAP का दावा

सौरभ भारद्वाज ने साइकिल के मॉडल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। AAP का दावा है कि सरकारी दस्तावेजों में साइकिल को ‘Hero Skyler 26T’ के तौर पर दर्शाया गया, जबकि छात्राओं को दी जा रही साइकिलों पर लगाए गए स्टिकर और वास्तविक मॉडल को लेकर सवाल हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि वास्तविक साइकिल Hero Bonfire मॉडल की हो सकती है और उस पर ‘Skyler’ का स्टिकर लगाया गया है। AAP की ओर से यह भी दावा किया गया कि Skyler मॉडल का उत्पादन बंद हो चुका है। पार्टी के आधिकारिक बयान में इन आरोपों को विस्तार से रखा गया है।

AAP ने कहा- सरकार से मांगा जाएगा जवाब

AAP का कहना है कि वह इस पूरे मामले में दिल्ली सरकार से जवाब मांगती रहेगी। पार्टी नेताओं ने मांग की है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि साइकिल किस कंपनी और किस मॉडल की खरीदी गईं, टेंडर किस आधार पर दिया गया और प्रति साइकिल 6,957 रुपये की कीमत कैसे तय हुई। पार्टी का आरोप है कि यदि बाजार में उपलब्ध साइकिल की कीमत कम है तो सरकारी खरीद में अतिरिक्त राशि खर्च करने का कारण जनता के सामने रखा जाना चाहिए। AAP नेताओं ने इस मुद्दे को दिल्ली विधानसभा में भी उठाने की बात कही है।

सरकार की खरीद प्रक्रिया पर उठे सवाल

किसी भी सरकारी खरीद में केवल बाजार की खुदरा कीमत की तुलना से अंतिम निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं होता। सरकारी टेंडर में निर्धारित गुणवत्ता, तकनीकी मानक, परिवहन, टैक्स, पैकेजिंग, वारंटी, सर्विस और अन्य शर्तों के कारण कीमत अलग हो सकती है। इसलिए इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि टेंडर में साइकिल की कौन-कौन सी तकनीकी विशेषताएं निर्धारित की गई थीं और सप्लायर ने वास्तव में वही उत्पाद उपलब्ध कराया या नहीं। यदि जांच में टेंडर की शर्तों और सप्लाई किए गए उत्पाद में अंतर पाया जाता है, तो जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

1.30 लाख साइकिलों की खरीद से जुड़ा बड़ा सवाल

1.30 लाख साइकिलों की खरीद को लेकर कीमत का मामूली अंतर भी कुल राशि पर बड़ा असर डाल सकता है। AAP नेताओं ने इसी आधार पर सरकार पर बड़े वित्तीय नुकसान के आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि यदि प्रति साइकिल हजारों रुपये का अंतर है तो पूरी खरीद में बड़ी रकम का अंतर पैदा होता है। हालांकि, इस राशि को घोटाले के रूप में स्थापित करने के लिए आधिकारिक खरीद दस्तावेजों और जांच के निष्कर्ष जरूरी होंगे। फिलहाल सामने आए आरोप राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए दावे हैं।

जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

साइकिल खरीद विवाद अब दिल्ली की राजनीति में बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। AAP जहां इसे कथित भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग से जोड़ रही है, वहीं मामले की वास्तविक स्थिति टेंडर दस्तावेजों, सप्लाई रिकॉर्ड और साइकिलों की तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। खास तौर पर ‘Skyler’ और वास्तविक मॉडल को लेकर उठाए गए सवालों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सौरभ भारद्वाज ने सरकार से जवाब मांगा है और AAP इस मुद्दे को आगे भी उठाने की तैयारी में है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से सामने आने वाला आधिकारिक जवाब यह स्पष्ट कर सकता है कि 6,957 रुपये प्रति साइकिल की कीमत किन शर्तों और तकनीकी मानकों के आधार पर तय की गई थी।

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