सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार की साइकिल खरीद पर सवाल उठाए। AAP नेता ने ₹4,200 की बाजार साइकिल और ₹6,957 की सरकारी साइकिल की तुलना कर जांच की मांग की।
दिल्ली में सरकारी स्कूलों की कक्षा 9 की छात्राओं को मुफ्त साइकिल बांटने की योजना को लेकर आम आदमी पार्टी और बीजेपी सरकार के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने साइकिलों की खरीद कीमत और गुणवत्ता को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। दिल्ली सरकार ने कक्षा 9 की छात्राओं के लिए करीब 1.30 लाख साइकिलें बांटने की योजना शुरू की है। यह योजना 2026-27 के दिल्ली बजट में घोषित प्रमुख योजनाओं में शामिल थी।
₹6,957 की सरकारी साइकिल बनाम ₹4,200 की साइकिल
सौरभ भारद्वाज का दावा है कि दिल्ली सरकार द्वारा छात्राओं को दी जा रही साइकिल की कीमत 6,957 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि उन्होंने खुद बाजार से 4,200 रुपये में एक साइकिल खरीदकर उसकी तुलना की। AAP नेता का कहना है कि दोनों साइकिलों को सामने रखकर देखने पर उनकी गुणवत्ता और इस्तेमाल किए गए पार्ट्स को लेकर अंतर दिखाई देता है। इसी कीमत के अंतर को आधार बनाकर भारद्वाज ने रेखा गुप्ता सरकार पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, किसी सरकारी खरीद को केवल बाजार में उपलब्ध एक साइकिल की खुदरा कीमत से सीधे घोटाला साबित नहीं किया जा सकता। सरकारी खरीद में टेंडर की शर्तें, गुणवत्ता के मानक, टैक्स, परिवहन, वारंटी, सर्विस और अन्य लागत शामिल हो सकती हैं। इसलिए पूरे मामले में आधिकारिक खरीद दस्तावेज और तकनीकी स्पेसिफिकेशन महत्वपूर्ण होंगे।
सौरभ भारद्वाज ने दिखाई साइकिलों की तुलना
AAP नेता के मुताबिक, उन्होंने सरकार द्वारा छात्राओं को बांटी जा रही साइकिल और बाजार से खरीदी गई 4,200 रुपये की साइकिल को आमने-सामने रखकर तुलना की। उनका आरोप है कि सरकारी साइकिल के कई पार्ट्स अपेक्षित गुणवत्ता के नहीं हैं। इससे पहले भी AAP ने साइकिलों के मॉडल, पार्ट्स और खरीद कीमत को लेकर सरकार से सवाल पूछे हैं। पार्टी ने आरोप लगाया है कि सरकारी खरीद में साइकिलों की वास्तविक गुणवत्ता और भुगतान की गई राशि के बीच अंतर की जांच होनी चाहिए।
1.30 लाख छात्राओं को मिलनी है मुफ्त साइकिल
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष @Saurabh_MLAgk जी ने दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद द्वारा बांटी गई ₹6,957 की साइकिल और खुद ₹4,200 में खरीदी साइकिल के बीच का अंतर बताते हुए रेखा गुप्ता सरकार के भ्रष्टाचार को किया Expose। pic.twitter.com/AYoF0J1EKE
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 12, 2026
दिल्ली सरकार की मुफ्त साइकिल योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 1.30 लाख छात्राओं को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का उद्देश्य छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देना और दूरी के कारण पढ़ाई प्रभावित होने की समस्या को कम करना है। अधिकारियों के मुताबिक, साइकिलों की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी और अलग-अलग बैच में साइकिलें पहुंचने के बाद वितरण शुरू किया गया।
AAP ने खरीद प्रक्रिया पर उठाए सवाल
सौरभ भारद्वाज का कहना है कि जब बड़ी संख्या में साइकिलें सरकारी स्तर पर खरीदी जाती हैं तो सरकार को बाजार कीमत की तुलना में बेहतर दर मिलनी चाहिए। उनका सवाल है कि अगर समान साइकिल बाजार में 4,200 रुपये में उपलब्ध है, तो सरकारी खरीद में प्रति साइकिल 6,957 रुपये खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ी। AAP इस कीमत के अंतर को लेकर सरकार से टेंडर और खरीद प्रक्रिया का विवरण सार्वजनिक करने की मांग कर रही है।
AAP की ओर से इससे पहले भी इस खरीद को लेकर जांच की मांग की गई है। पार्टी ने सवाल उठाया है कि सरकार इस मामले में स्वतंत्र जांच क्यों नहीं करा रही है।
मॉडल और गुणवत्ता पर भी विवाद
साइकिल की कीमत के अलावा उसके मॉडल और गुणवत्ता को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए जा रहे हैं। AAP ने दावा किया है कि सरकार द्वारा खरीदी गई साइकिलों को लेकर मॉडल और वास्तविक उत्पाद के बीच अंतर है। पार्टी ने इस संबंध में साइकिल के पार्ट्स और लेबलिंग की जांच की मांग की है। यदि वास्तव में टेंडर में तय किए गए मॉडल या तकनीकी मानकों से अलग उत्पाद की आपूर्ति हुई है, तो यह खरीद प्रक्रिया में गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
लेकिन इन आरोपों की पुष्टि के लिए सरकारी टेंडर दस्तावेज, सप्लाई ऑर्डर, तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट और वितरित साइकिलों की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
सरकार की ओर से जवाब का इंतजार
विवाद के बीच अब नजर दिल्ली सरकार के आधिकारिक जवाब पर है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि 6,957 रुपये प्रति साइकिल की कीमत किस टेंडर प्रक्रिया के तहत तय की गई और इसमें कौन-कौन से खर्च शामिल हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि छात्राओं को दी जा रही साइकिलें टेंडर में निर्धारित सभी तकनीकी और गुणवत्ता मानकों को पूरा करती हैं या नहीं।
राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा मामला
दिल्ली में साइकिल खरीद का विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है। AAP इसे सरकार में कथित भ्रष्टाचार और सरकारी धन के इस्तेमाल से जोड़ रही है, जबकि इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकता है। करीब 1.30 लाख छात्राओं से जुड़ी इस योजना का उद्देश्य शिक्षा और आवागमन को आसान बनाना है, इसलिए साइकिलों की गुणवत्ता और खरीद में पारदर्शिता दोनों महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल सौरभ भारद्वाज द्वारा दिखाई गई 4,200 रुपये की साइकिल और सरकार द्वारा बताई जा रही 6,957 रुपये की कीमत के बीच अंतर ने सवाल जरूर खड़े किए हैं। अब यह देखना अहम होगा कि दिल्ली सरकार इस कीमत के अंतर और साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या पूरे मामले की जांच कराई जाती है।