राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी में उनके भाषण के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ का मुद्दा उठाया। जेपी नड्डा ने घटना की जांच का आश्वासन दिया।
राज्यसभा में गुरुवार को उस समय हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। खरगे ने सदन में इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक सभा को संबोधित किया था, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने भाषण में किसी समुदाय या धर्म का नाम लिए बिना केवल आम लोगों से जुड़े मुद्दों और उनकी समस्याओं पर बात की थी। खरगे का आरोप है कि उनके भाषण के बाद बीजेपी से जुड़े लोगों ने उस मंच का ‘शुद्धिकरण’ किया। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक समानता पर भी सवाल उठाए।
हल्द्वानी में कांग्रेस की सभा का किया जिक्र
मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में बताया कि 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की एक बड़ी सभा आयोजित की गई थी। यह कार्यक्रम उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत पार्टी के अभियान का हिस्सा था। खरगे के मुताबिक, सभा में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और उन्होंने अपने भाषण के दौरान जनता से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने वहां किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की और उनका पूरा ध्यान लोगों की समस्याओं पर था। इसके बावजूद, उनके आरोप के अनुसार, बाद में उस मंच का कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया। खरगे ने कहा कि इस तरह की घटना लोकतांत्रिक व्यवस्था में गंभीर सवाल खड़े करती है।
खरगे बोले- क्या लोकतंत्र में ऐसा होना चाहिए?
राज्यसभा में अपनी बात रखते हुए खरगे ने कहा कि यह घटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी नेता के भाषण के बाद मंच का कथित शुद्धिकरण किया जाता है, तो क्या इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार किया जा सकता है? उन्होंने संविधान की भावना और सामाजिक बराबरी का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में भेदभाव की भावना को बढ़ावा देती हैं। खरगे ने सदन में यह भी कहा कि वह इस घटना को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहते, लेकिन उनके साथ अगर छुआछूत जैसी मानसिकता के आधार पर व्यवहार किया जाता है, तो यह उनके सम्मान का सवाल है।
जेपी नड्डा ने आरोपों पर जताई चिंता
खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए राज्यसभा में सदन के नेता और बीजेपी के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने कथित घटना पर चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। नड्डा ने कहा कि खरगे ने आरोप लगाया है कि इस घटना में बीजेपी से जुड़े लोग शामिल थे, इसलिए सरकार और पार्टी इस मामले की जांच कराएगी। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी घटना वास्तव में हुई है तो यह चिंता का विषय है। नड्डा ने दोहराया कि बीजेपी इस तरह की किसी भी गतिविधि का समर्थन या अनुमोदन नहीं करती और इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
खरगे ने कहा- इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता
नड्डा के जवाब के बाद खरगे एक बार फिर सदन में खड़े हुए। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य इस घटना को राजनीतिक विवाद में बदलना नहीं है। खरगे ने अपने लंबे राजनीतिक और संसदीय अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपने अधिकारों के लिए केवल अपनी जाति या सामाजिक पहचान का हवाला देकर किसी से मदद की मांग नहीं की। उन्होंने कहा कि उनमें परिस्थितियों का सामना करने और संघर्ष करने की क्षमता है और वह हमेशा अपने अधिकारों के लिए लड़ते रहे हैं। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि अगर उनके साथ छुआछूत की भावना के आधार पर व्यवहार किया जाता है, तो यह उनके लिए अपमान और humiliation का विषय है।
नड्डा ने फिर दोहराया- बीजेपी समर्थन नहीं करती
खरगे की प्रतिक्रिया के बाद जेपी नड्डा ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि बीजेपी ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि पार्टी के नाम पर यदि किसी व्यक्ति ने इस तरह की कार्रवाई की है तो उसकी जांच होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और संवैधानिक मूल्यों को लेकर चर्चा देखने को मिली। सत्ता पक्ष ने जहां घटना की जांच कराने की बात कही, वहीं विपक्ष ने इसे सामाजिक बराबरी और सम्मान के मुद्दे से जोड़ा।
सभापति ने कहा- छुआछूत की सभी करते हैं निंदा
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी इस मामले पर स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सदन के सभी सदस्य, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े हों, छुआछूत की निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी व्यक्ति के साथ छुआछूत का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता। सभापति ने यह भी कहा कि सभी पहले से ही ‘शुद्ध’ हैं और किसी को बार-बार शुद्ध करने की आवश्यकता नहीं है। उनकी इस टिप्पणी को सदन में सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के संदेश के रूप में देखा गया।
दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग
सभापति ने सरकार से इस मामले की जांच कराने का अनुरोध भी किया। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें पकड़ा जाना चाहिए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत काम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर कोई दो राय नहीं हो सकती। इस तरह राज्यसभा में उठाया गया यह मुद्दा केवल एक मंच के कथित शुद्धिकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छुआछूत, सामाजिक समानता, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर व्यापक बहस का कारण बन गया।
उत्तराखंड की राजनीति में भी बढ़ सकती है चर्चा
हल्द्वानी की यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो रही हैं। कांग्रेस अपनी राजनीतिक गतिविधियों को तेज कर रही है और बीजेपी भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। ऐसे में खरगे के आरोपों और बीजेपी की जांच की घोषणा के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकता है। हालांकि, पूरे विवाद की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने छुआछूत की निंदा की है और यह बात सामने आई है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।