Delhi Bicycle Scam: AAP विधायक ₹6,957 की सरकारी खरीदी गई साइकिल लेकर विधानसभा पहुंचे और ₹4,200 की बाजार कीमत का दावा करते हुए बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए।
दिल्ली की राजनीति में कथित साइकिल खरीद घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने बीजेपी सरकार पर हमला बोला है। AAP के एक विधायक विधानसभा में उसी तरह की साइकिल लेकर पहुंचे, जिसे लेकर पार्टी ने सरकारी खरीद में भारी कीमत अंतर का आरोप लगाया है। AAP का दावा है कि दिल्ली सरकार ने छात्राओं के लिए साइकिल करीब ₹6,957 प्रति साइकिल की दर से खरीदी, जबकि इसी तरह की साइकिल बाजार में करीब ₹4,200 में उपलब्ध है। विधायक ने विधानसभा परिसर में साइकिल दिखाकर सरकार से खरीद प्रक्रिया और कीमत को लेकर जवाब मांगा।
विधानसभा में साइकिल लेकर पहुंचे AAP विधायक
AAP ने आरोप लगाया कि छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराने के नाम पर सरकारी पैसे का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। पार्टी की ओर से कहा गया कि सरकार ने जिस साइकिल को करीब ₹6,957 की दर से खरीदा, उसी मॉडल या समान स्पेसिफिकेशन वाली साइकिल को बाजार से लगभग ₹4,200 में खरीदा जा सकता है।
इसी कीमत के अंतर को उजागर करने के लिए AAP विधायक साइकिल लेकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने सरकार के सामने सवाल रखा कि जब बाजार में कम कीमत पर साइकिल उपलब्ध है तो सरकारी खरीद में इतनी अधिक कीमत क्यों चुकाई गई। विधायक ने खरीद प्रक्रिया, टेंडर और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की।
₹6,957 बनाम ₹4,200 की कीमत पर उठे सवाल
छात्राओं की साइकिलों में घोटाला करने वाली बीजेपी को बेनकाब करते हुए आम आदमी पार्टी के विधायक वैसी ही साइकिल जो बीजेपी सरकार ने ₹6957 के रेट से ख़रीदी थी, उसे ₹4200 के रेट से ख़रीदकर पहुँचे विधानसभा 🔥 pic.twitter.com/YzSvjwkp87
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 10, 2026
AAP के आरोपों के मुताबिक, सरकारी खरीद में प्रति साइकिल लगभग ₹2,757 का अंतर दिखाई देता है। पार्टी का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में साइकिलें खरीदी गई हैं तो प्रति यूनिट कीमत में यह अंतर सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय प्रभाव डाल सकता है।
AAP ने इसी आधार पर बीजेपी सरकार पर कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि विधानसभा में साइकिल लेकर पहुंचना केवल प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सरकार से यह पूछना है कि बाजार मूल्य और सरकारी खरीद मूल्य में इतना अंतर क्यों है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि दोनों साइकिलों के स्पेसिफिकेशन, गुणवत्ता, वारंटी, परिवहन, वितरण और टेंडर की शर्तें पूरी तरह समान थीं या नहीं। इसलिए ₹6,957 और ₹4,200 की कीमत के अंतर को अपने आप में घोटाले का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसकी पुष्टि संबंधित सरकारी दस्तावेजों और खरीद प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच से ही होगी।
छात्राओं के लिए साइकिल योजना पर सियासत
छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराने की योजनाओं का उद्देश्य दूर-दराज के इलाकों से स्कूल आने वाली छात्राओं की सुविधा बढ़ाना और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना होता है। AAP का आरोप है कि ऐसी योजनाओं में सरकारी खरीद में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि इसमें सार्वजनिक धन का इस्तेमाल होता है।
पार्टी ने कहा कि यदि सरकार किसी सामान को बाजार दर से काफी अधिक कीमत पर खरीदती है तो उसे जनता के सामने इसकी वजह स्पष्ट करनी चाहिए। AAP नेताओं ने सरकार से खरीद से जुड़े टेंडर दस्तावेज, सप्लायर का नाम, साइकिल की तकनीकी विशेषताएं और भुगतान की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
AAP ने बीजेपी सरकार पर साधा निशाना
इस मामले को लेकर AAP ने बीजेपी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि सत्ता में आने के बाद बीजेपी सरकार में लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें सरकारी खर्च और खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विधानसभा में साइकिल लेकर पहुंचने वाले विधायक ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकारी खरीद सही और पारदर्शी है तो सरकार को संबंधित दस्तावेज सामने रखने चाहिए। AAP का तर्क है कि इससे जनता को पता चलेगा कि साइकिल किस कीमत पर, किस कंपनी से और किन शर्तों पर खरीदी गई।
सरकार के जवाब और दस्तावेजों का इंतजार
इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले दिल्ली सरकार या संबंधित विभाग की प्रतिक्रिया और खरीद से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों का सामने आना महत्वपूर्ण है। सरकार की ओर से यदि यह स्पष्ट किया जाता है कि ₹6,957 की कीमत में साइकिल के अलावा परिवहन, टैक्स, वितरण, असेंबली या अन्य सेवाएं शामिल थीं, तो कीमत का अंतर अलग तरीके से समझा जा सकता है।
वहीं, यदि दस्तावेजों से यह साबित होता है कि समान गुणवत्ता और समान शर्तों वाली साइकिल बाजार मूल्य से काफी अधिक दर पर खरीदी गई, तो खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। ऐसे में स्वतंत्र जांच के जरिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि कीमत तय करने की प्रक्रिया क्या थी और सरकारी खजाने को किसी तरह का नुकसान हुआ या नहीं।
फिलहाल AAP ने इस मुद्दे को विधानसभा में जोर-शोर से उठाकर बीजेपी सरकार से जवाब मांगा है। ₹6,957 की सरकारी खरीद दर और ₹4,200 की कथित बाजार कीमत के बीच का अंतर अब दिल्ली की राजनीति में नया विवाद बन गया है। मामले की वास्तविक तस्वीर सरकारी रिकॉर्ड, टेंडर दस्तावेज और आधिकारिक जांच के बाद ही साफ हो सकेगी।