Delhi Rice Scam: संजीव झा का बड़ा आरोप- ‘रेखा गुप्ता सरकार में घोटाले, सिरसा को तुरंत हटाया जाए’

Delhi Rice Scam: संजीव झा का बड़ा आरोप- ‘रेखा गुप्ता सरकार में घोटाले, सिरसा को तुरंत हटाया जाए’

 

 

दिल्ली के कथित ₹22,000 करोड़ राइस स्कैम को लेकर AAP नेता संजीव झा ने रेखा गुप्ता सरकार पर निशाना साधा और मनजिंदर सिरसा को हटाकर निष्पक्ष जांच की मांग की।

दिल्ली की राजनीति में कथित राइस स्कैम को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने रेखा गुप्ता सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि सरकार में एक के बाद एक कथित घोटाले सामने आ रहे हैं। संजीव झा ने कहा कि ऐसा लगता है जैसे बीजेपी नेताओं को ‘लूट का लाइसेंस’ दे दिया गया है। उन्होंने कथित चावल घोटाले में दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका पर भी सवाल उठाए और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।

संजीव झा ने क्या कहा?

AAP विधायक संजीव झा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए रेखा गुप्ता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार से जुड़े नए कथित घोटाले लगातार सामने आ रहे हैं और इस मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत है। झा ने आरोप लगाया कि कथित राइस स्कैम में मनजिंदर सिंह सिरसा की भूमिका की जांच होनी चाहिए और जांच को निष्पक्ष बनाने के लिए उन्हें तत्काल जिम्मेदारी से हटाया जाना चाहिए।

संजीव झा की यह प्रतिक्रिया उस राजनीतिक विवाद के बीच आई है, जिसमें AAP ने दिल्ली में सब्सिडी वाले चावल की खरीद और वितरण को लेकर करीब ₹22,000 करोड़ के कथित घोटाले की योजना का आरोप लगाया है। AAP का दावा है कि इस मामले में गरीबों के लिए उपलब्ध सब्सिडी वाले चावल को कथित तौर पर निजी कंपनी को बेचने की व्यवस्था की जा रही थी।

₹22,000 करोड़ के कथित राइस स्कैम पर बढ़ा विवाद

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इससे पहले आरोप लगाया था कि दिल्ली सरकार की प्रस्तावित चावल खरीद और वितरण व्यवस्था में कथित अनियमितता से हर सप्ताह करीब ₹143 करोड़ का नुकसान या कथित लाभ का अंतर बन सकता था। पार्टी ने दावा किया कि यदि ऐसी व्यवस्था तीन साल तक चलती तो इसका संभावित आकार करीब ₹22,000 करोड़ तक पहुंच सकता था।

संजीव झा ने भी चावल की खरीद और उसके बाद बिक्री की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। AAP नेताओं का कहना है कि इस पूरे मामले में सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए। पार्टी ने आरोपों की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, ₹22,000 करोड़ का आंकड़ा फिलहाल AAP नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप का हिस्सा है और इसे सिद्ध घोटाले के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

संजीव झा ने सिरसा को हटाने की मांग की

संजीव झा ने कहा कि यदि किसी मंत्री की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं तो निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए। उन्होंने मनजिंदर सिंह सिरसा को तत्काल हटाने और पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

AAP का आरोप है कि इस मामले में केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर जांच होनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि सरकारी स्तर पर किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने आरोपों को बताया झूठा

AAP के आरोपों के बाद दिल्ली के मंत्री और बीजेपी नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने पलटवार किया है। उन्होंने सौरभ भारद्वाज और संजीव झा के आरोपों को झूठा, मनगढ़ंत और दुर्भावनापूर्ण बताया। सिरसा ने दोनों नेताओं को 24 घंटे के भीतर अपने आरोप वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की है।

सिरसा ने चेतावनी दी है कि यदि आरोप वापस नहीं लिए गए और माफी नहीं मांगी गई तो वह कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ लगाए गए दावे उनकी छवि खराब करने के इरादे से किए जा रहे हैं।

आरोप और पलटवार से गरमाई दिल्ली की राजनीति

राइस स्कैम को लेकर AAP और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव अब और बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक तरफ AAP नेताओं ने कथित ₹22,000 करोड़ की योजना को लेकर सरकार से जवाब मांगा है और मनजिंदर सिंह सिरसा को हटाने की मांग की है, वहीं बीजेपी की ओर से आरोपों को खारिज किया गया है।

मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल सरकारी दस्तावेजों और चावल की खरीद-वितरण प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड का है। AAP नेताओं ने कहा है कि वे संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे। वहीं सिरसा ने आरोप लगाने वाले नेताओं को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

क्या है पूरे मामले की सच्चाई?

फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के स्तर पर है। AAP ने कथित चावल घोटाले और ₹22,000 करोड़ की संभावित राशि को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं, जबकि बीजेपी और मनजिंदर सिंह सिरसा ने इन्हें खारिज किया है। इसलिए पूरे मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक दस्तावेज, जांच और संबंधित सरकारी एजेंसियों की रिपोर्ट का सामने आना जरूरी है।

यदि जांच में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग और तेज हो सकती है। दूसरी ओर, यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त तथ्य नहीं मिलते हैं तो राजनीतिक विवाद और आरोपों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठेंगे। फिलहाल दिल्ली की राजनीति में ₹22,000 करोड़ का कथित राइस स्कैम बड़ा मुद्दा बन चुका है और इस पर आने वाले दिनों में और सियासी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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