दिल्ली विधानसभा के लगातार दूसरे सत्र में प्रश्नकाल शामिल नहीं होने पर आप विधायक संजीव झा ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पीकर से प्रश्नकाल बहाल करने और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की।
आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा ने दिल्ली विधानसभा के मौजूदा सत्र में प्रश्नकाल (Question Hour) शामिल न किए जाने पर भाजपा सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह लगातार दूसरा विधानसभा सत्र है, जिसमें प्रश्नकाल नहीं रखा गया है। संजीव झा ने कहा कि सरकार अपने चुनावी वादों को पूरा करने में विफल रही है और विभिन्न मामलों में घोटालों के आरोपों का सामना कर रही है, इसलिए वह विपक्ष के सवालों से बच रही है।
“प्रश्नकाल लोकतंत्र की आत्मा है”
दिल्ली विधानसभा का लगातार दूसरा ऐसा सेशन रखा गया है जिसमें Q&A नहीं रखा गया है।
सरकार ने अपने वादे पूरे नहीं किए, घोटाले हो रहे और अब सरकार सवालों से बच रही है।
मेरा स्पीकर साहब से निवेदन है कि वो CM को direct करें कि सेशन में Q&A रखा जाए।
– @Sanjeev_aap pic.twitter.com/fcZC2CWcuV
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) July 29, 2026
संजीव झा ने कहा कि विधानसभा में प्रश्नकाल जनता के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने का सबसे प्रभावी संवैधानिक माध्यम होता है। यदि प्रश्नकाल ही नहीं होगा तो जनता के प्रतिनिधि सरकार से जवाबदेही कैसे तय करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार का दायित्व है कि वह विपक्ष के सवालों का जवाब दे और जनता के सामने अपनी कार्यप्रणाली स्पष्ट करे।
स्पीकर से हस्तक्षेप की अपील
आप विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वे मुख्यमंत्री को निर्देश दें कि विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल को शामिल किया जाए। उनका कहना है कि इससे सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी तथा जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो सकेगी।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
संजीव झा ने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार ने जनता से किए गए कई महत्वपूर्ण वादे अब तक पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न मामलों में अनियमितताओं और घोटालों के आरोप सामने आ रहे हैं, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर जवाब देने के बजाय विधानसभा में प्रश्नकाल से ही बच रही है। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है और जनता के अधिकारों का भी हनन है।
विपक्ष ने उठाई जवाबदेही की मांग
संजीव झा ने कहा कि विधानसभा जनता की आवाज़ उठाने का सर्वोच्च मंच है। यदि विपक्ष को सवाल पूछने का अवसर नहीं मिलेगा तो लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने दोहराया कि प्रश्नकाल को तुरंत बहाल किया जाना चाहिए ताकि सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभा सके।